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कत्थक नृत्य कला को पहचान दिलाने वाले बिरजू महाराज के निधन पर शोक

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 17 Jan 2022 07:36 PM IST
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Condolences on the death of Birju Maharaj, who gave recognition to the art of Kathak dance
वृंदावन (मथुरा)। भारतीय संगीत जगत का एक नक्षत्र आज प्रकाशहीन हो गया। कथक नृत्य कला में अपनी अद्भुत नृत्यकला से विश्व में पहचान बनाने वाले पद्म विभूषण पंडित बिरजू महाराज के देहांत से ब्रज क्षेत्र के संगीत जगत में शोक है। अपनी अंतिम यात्रा पर जाने से पूर्व कान्हा की नगरी में नृत्य करने की बिरजू महाराज की इच्छा ब्रजवासियों को हमेशा याद रहेगी। पंडित बिरजू महाराज का ब्रज और वृंदावन से पुराना नाता रहा है। स्वामी हरिदास जयंती दिवस पर आयोजित होने वाले स्वामी हरिदास संगीत व नृत्य महोत्सव में प्रस्तुति देने को बिरजू महाराज अपना सौभाग्य मानते थे।
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पिछले महीने की ही बात है, बिरजू महाराज वृंदावन में आयोजित स्वामी हरिदास संगीत व नृत्य महोत्सव में पुत्र व नातिनी के साथ प्रस्तुति देने आ रहे थे, लेकिन आने से कुछ घंटे पहले अचानक तबियत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। समारोह में न आने से मायूस बिरजू महाराज ने वीडियो मेसेज जारी कर जल्द ही वृंदावन आने का वायदा किया था। संगीत शिरोमणि स्वामी हरिदास समिति ने पंडित बिरजू महाराज के देहांत पर शोक जताया है।
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स्वामी हरिदास संगीत व नृत्य महोत्सव के सचिव गोपी गोस्वामी ने बताया कि सदियों तक पंडित जी के योगदान को याद रखा जाएगा। संयोजक अनूप शर्मा, अभय वशिष्ठ, मुरलीधर गोस्वामी, मदन गोपाल गोस्वामी, विश्वनाथ गोस्वामी, श्रीनाथ गोस्वामी, गोवर्धन अग्रवाल, कुणाल शर्मा, विनीत शर्मा, रवि शर्मा ने श्रद्धांजलि दी है।
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1982 में हुए तानसेन समारोह में आए थे पंडितजी
पंडित बिरजू महाराज के देहांत से विश्व के संगीत जगत को बहुत बड़ी क्षति हुई है जो कभी पूरी नहीं हो सकती। सूफी गायक जेएसआर मधुकर ने बताया कि बिरजू महाराज वर्ष 1982 में मथुरा में हुए तानसेन समारोह में आए थे। उस वक्त मैं 12 वर्ष का था और संगीत की शिक्षा पिताश्री से प्राप्त कर रहा था। तब बिरजू महाराज उनके पिताश्री ब्रज रसिक संत संगीत के आचार्य आशुदास से मिले थे। पिताश्री ने उनसे वृंदावन में स्वामी हरिदास समारोह में आने के लिए भी प्रार्थना की थी, तब पंडित जी 1985 में स्वामी हरिदास समारोह वृंदावन में भी पधारे थे।
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