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Mathura: सिटी मजिस्ट्रेट की कोर्ट ने दिए नगर आयुक्त को आदेश, बंदरों से दिलाई जाए मुक्ति; 15 दिन का दिया समय
Thu, 21 Nov 2024 01:28 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 21 Nov 2024 01:28 PM IST
सार
बंदरों के उत्पात से मुक्ति के लिए सिटी मजिस्ट्रेट की कोर्ट में याचिका दायर की गई। इस मामले में कोर्ट ने आयुक्त को 15 दिन में कृष्णापुरी क्षेत्र से बंदरों के उत्पात से मुक्ति दिलाने के आदेश दिए हैं।
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बंदर।
विस्तार
मथुरा में बंदरों के आतंक से लोग परेशान हैं। कृष्णापुरी निवासी एडवोकेट ने बंदरों के उत्पात से मुक्ति दिलाने के लिए सिटी मजिस्ट्रेट की कोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए नगर आयुक्त को 15 दिन में कृष्णापुरी क्षेत्र से बंदरों के उत्पात से मुक्ति दिलाने के आदेश दिए हैं। साथ ही जल्द ही आख्या देने के निर्देश दिए हैं।
कृष्णापुरी निवासी डॉ. प्रकाश चंद अग्रवाल एडवोकेट ने 26 दिसंबर 2018 में सिटी मजिस्ट्रेट राकेश कुमार की कोर्ट में बंदरों के आतंक और गंदगी से मुक्ति दिलाने के लिए याचिका दी थी। याचिका पर सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सदर पुलिस से आख्या मांगी। 2 जनवरी 2019 को सदर पुलिस ने अपनी आख्या में स्पष्ट किया कि क्षेत्र के लोग बंदर और गंदगी से परेशान हैं। इस मामले की सुनवाई लगातार सिटी मजिस्ट्रेट की कोर्ट में चली। सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पुलिस की आख्या का संज्ञान लेते हुए 15 दिन के अंदर बंदरों के उत्पात और गंदगी से मुक्ति दिलाने के लिए नगर आयुक्त को निर्देश दिए।
याचिकाकर्ता ने बताया कि नगर निगम ने कोर्ट में दी आख्या में स्पष्ट किया कि बंदरों से मुक्ति दिलाने का कार्य वन विभाग का है। इसके साथ ही सफाई कार्य भी उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। इसके बाद याचिकाकर्ता ने नगर निगम की आख्या का विरोध करते हुए कोर्ट में बहस की। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के पक्ष को सही मानते हुए नगर निगम को क्षेत्रीय लोगों को बंदरों के उत्पात और गंदगी से मुक्ति दिलाने के आदेश दिए हैं। साथ ही 15 दिन में कोर्ट में आख्या प्रस्तुत करने के आदेश भी दिए।
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कृष्णापुरी निवासी डॉ. प्रकाश चंद अग्रवाल एडवोकेट ने 26 दिसंबर 2018 में सिटी मजिस्ट्रेट राकेश कुमार की कोर्ट में बंदरों के आतंक और गंदगी से मुक्ति दिलाने के लिए याचिका दी थी। याचिका पर सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सदर पुलिस से आख्या मांगी। 2 जनवरी 2019 को सदर पुलिस ने अपनी आख्या में स्पष्ट किया कि क्षेत्र के लोग बंदर और गंदगी से परेशान हैं। इस मामले की सुनवाई लगातार सिटी मजिस्ट्रेट की कोर्ट में चली। सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पुलिस की आख्या का संज्ञान लेते हुए 15 दिन के अंदर बंदरों के उत्पात और गंदगी से मुक्ति दिलाने के लिए नगर आयुक्त को निर्देश दिए।
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याचिकाकर्ता ने बताया कि नगर निगम ने कोर्ट में दी आख्या में स्पष्ट किया कि बंदरों से मुक्ति दिलाने का कार्य वन विभाग का है। इसके साथ ही सफाई कार्य भी उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। इसके बाद याचिकाकर्ता ने नगर निगम की आख्या का विरोध करते हुए कोर्ट में बहस की। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के पक्ष को सही मानते हुए नगर निगम को क्षेत्रीय लोगों को बंदरों के उत्पात और गंदगी से मुक्ति दिलाने के आदेश दिए हैं। साथ ही 15 दिन में कोर्ट में आख्या प्रस्तुत करने के आदेश भी दिए।
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