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Mathura News: ब्लैकबोर्ड पर नहीं, छत से गिरते प्लास्टर पर रहती हैं बच्चों की नजरें

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 07 Aug 2025 01:03 AM IST
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Children's eyes are not on the blackboard, but on the plaster falling from the ceiling
उच्च प्राथमिक विद्यालय सतोहा का जर्जर भवन।
मथुरा। जर्जर स्कूलों में बच्चों की नजरें ब्लैकबोर्ड पर नहीं, बल्कि छत से गिरते प्लास्टर पर टिकी रहती हैं। कई बार प्लास्टर गिरने के दौरान वे बाल-बाल बच चुके हैं। शिक्षक भी पूरी एहतियात बरत रहे हैं, लेकिन न तो वे भवन की मरम्मत करा सकते हैं और ना ही नया भवन बनवा सकते हैं। उनका काम तो बस अफसरों को पत्र लिखना है। अधिकांश जर्जर विद्यालयों का हाल कुछ ऐसा ही है।
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विकास खंड मथुरा के सतोहा में बना उच्च प्राथमिक विद्यालय का भवन करीब छह दशक पुराना है। कहीं छज्जा टूटकर गिर रहा है, तो कहीं कमरों की छत से प्लास्टर गिरना रोज की बात है। यहां बच्चों की संख्या भी अच्छी खासी है। विद्यालय में 235 छात्र-छात्राओं के साथ ही उन्हें पढ़ाने के लिए 11 शिक्षक भी तैनात हैं। शिक्षक प्रतिदिन कक्षाएं लगाते हैं, लेकिन बारिश शुरू होते ही छत टपकने लगती है। कभी-कभी बच्चे कमरे के एक कोने में इकट्ठे हो जाते हैं, तो कभी दूसरे में। शिक्षक कमरे के उस भाग को खाली छोड़ देते हैं, जहां प्लास्टर गिरने की आशंका होती है।
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इसके बाद भी बच्चों का ध्यान छत पर ही रहता है। कई बार कक्षा संचालित होने के दौरान भी छत से प्लास्टर गिर चुका है। प्लास्टर गिरने के बाद सरिया नजर आने लगी हैं, जो कहीं न कहीं जर्जर भवन की चेतावनी है। शिक्षकों को भी यह चेतावनी बखूबी समझ आ रही है, लेकिन उनकी मजबूरी है कि वे कुछ नहीं कर सकते। प्रधानाध्यापक तनुजा गोयल ने बताया कि बारिश में स्कूल संचालन मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने स्थिति से अधिकारियों को अवगत भी कराया, लेकिन नए भवन की आस पूरी नहीं हो सकी।
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सियरा में आंगनबाड़ी केंद्र में पढ़ते हैं बच्चे
विकास खंड राया के गांव सियरा में प्राथमिक विद्यालय का भवन जर्जर हो गया था। 1986 में बना यह भवन बेसिक शिक्षा विभाग ने नीलाम कर ध्वस्त करा दिया। बीते कुछ सालों से बच्चों का नया ठिकाना परिसर में ही बना आंगनबाड़ी केंद्र है। विद्यालय में पंजीकृत 54 बच्चे एक ही कमरे में बैठकर पढ़ते हैं। आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन होने पर इन बच्चों को आधा कमरा ही नसीब होता है। प्रधानाध्यापक स्नेहलता ने बताया कि बीएसए को पत्र भेजकर नए भवन की मांग की है। उम्मीद है कि इस साल नए भवन के लिए बजट मिल जाएगा।

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सभी प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिए गए हैं कि जर्जर भवनों में बच्चों को न बैठाएं। उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था करें। अगर कहीं वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं हो पा रही है तो तत्काल अवगत कराएं, प्रशासन द्वारा व्यवस्था कराई जाएगी।
-रवींद्र सिंह, बीएसए
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