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नटखट कान्हा को छड़ी मार कर गोपियों ने खेला हुरंगा
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Thu, 09 Mar 2017 11:49 PM IST
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छड़ीमार हुरंगा
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ब्रज में छा रहा होली का उल्लास गुरुवार को गोकुल की कुंज गलियों तक पहुंच गया। नंदभवन से ठाकुरजी का डोला निकला तो इस पर पुष्प वर्षा के साथ रंग, गुलाल ने श्रद्धालुओं को रंगों से सराबोर कर दिया। मुरलीघाट पर गोपियों ने बाल स्वरूप कान्हा से छड़ी हुरंगा खेला। इस अलौकिक दृश्य को देख श्रद्धालु निहाल हो गए।
गुरुवार को सुबह से ही गोकुल में देश और विदेश से आए श्रद्धालुओं की भीड़ थी। हर कोई आज यहां बरसने वाले होली के रंग में सराबोर होने को मचल रहा था। सुबह नंदभवन से ठाकुर जी का डोला निकला। इस डोले पर पुष्प वर्षा करने की होड़ मच गई। गांव की गलियों और सड़कों पर पुष्प की पंखुड़ियां बिछ गई।
दोपहर बाद ठाकुर जी मुरलीघाट पर पहुंचे। यहां सजी-धजी गोपियों के हाथों में छड़ी थी। कान्हा के सखाओं के रूप में बाल ग्वाल भी पारंपरिक पोशाकों में थे। यहां ठाकुर जी से अनुमति लेने के साथ ही विश्व प्रसिद्ध छड़ी मार हुरंगा शुरू हो गया। इस बीच होली के गीतों के बोल ‘बाबा नंद के द्वार मची है होली’ पर श्रद्धालु थिरकने लगे। रंग के इस आनंद में देश और विदेश से आए श्रद्धालु सराबोर रहे।
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अमृतसर से आए राघव शर्मा, आरती शर्मा इस अलौकिक दृश्य को देख अभिभूत हो गए। प्रवीन शर्मा भी अपनी पत्नी सहित पहली बार जालंधर से इस अद्भुत होली को देखने के लिए आए। रंग से सराबोर होने के बाद वो होली के गीतों पर झूम रहे थे।
गोकुल में भगवान का बालरूप
सेवायत पुजारी ठाकुर मथुरा दास ने बताया गोकुल में भगवान श्रीकृष्ण का बाल स्वरूप है। ऐसे में गोपियां यहां उनसे छड़ी मारकर हंसी ठिठोली करती हैं और होली खेलती हैं। द्वापर की इसी अलौकिक लीला को छड़ी मार हुरंगे के रूप में मनाया जाता है। जिसे देखने के लिए देश और विदेश से श्रद्धालु आते हैं।
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गुरुवार को सुबह से ही गोकुल में देश और विदेश से आए श्रद्धालुओं की भीड़ थी। हर कोई आज यहां बरसने वाले होली के रंग में सराबोर होने को मचल रहा था। सुबह नंदभवन से ठाकुर जी का डोला निकला। इस डोले पर पुष्प वर्षा करने की होड़ मच गई। गांव की गलियों और सड़कों पर पुष्प की पंखुड़ियां बिछ गई।
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दोपहर बाद ठाकुर जी मुरलीघाट पर पहुंचे। यहां सजी-धजी गोपियों के हाथों में छड़ी थी। कान्हा के सखाओं के रूप में बाल ग्वाल भी पारंपरिक पोशाकों में थे। यहां ठाकुर जी से अनुमति लेने के साथ ही विश्व प्रसिद्ध छड़ी मार हुरंगा शुरू हो गया। इस बीच होली के गीतों के बोल ‘बाबा नंद के द्वार मची है होली’ पर श्रद्धालु थिरकने लगे। रंग के इस आनंद में देश और विदेश से आए श्रद्धालु सराबोर रहे।
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अमृतसर से आए राघव शर्मा, आरती शर्मा इस अलौकिक दृश्य को देख अभिभूत हो गए। प्रवीन शर्मा भी अपनी पत्नी सहित पहली बार जालंधर से इस अद्भुत होली को देखने के लिए आए। रंग से सराबोर होने के बाद वो होली के गीतों पर झूम रहे थे।
गोकुल में भगवान का बालरूप
सेवायत पुजारी ठाकुर मथुरा दास ने बताया गोकुल में भगवान श्रीकृष्ण का बाल स्वरूप है। ऐसे में गोपियां यहां उनसे छड़ी मारकर हंसी ठिठोली करती हैं और होली खेलती हैं। द्वापर की इसी अलौकिक लीला को छड़ी मार हुरंगे के रूप में मनाया जाता है। जिसे देखने के लिए देश और विदेश से श्रद्धालु आते हैं।