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Mathura News: उड़ते गुलाल में आभा बिखेरेगा चरकुला नृत्य

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 06 Mar 2025 01:00 AM IST
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Charkula dance will spread the aura in flying gulal
मथुरा। चरकुला नृत्य करती महिला। फाइल फोटो - फोटो : mathura
राधाकुंड (मथुरा)। होली में राधारानी की ननिहाल गांव मुखराई का जिक्र न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता। यहां के चरकुला नृत्य की चर्चा भारत के साथ अब विदेशों में भी होने लगी है। विदेश में भी यहां के कलाकार चरकुला नृत्य की प्रस्तुति दे आए हैं। इसमें 108 जलते दीपकों को पहिए पर रख गांव मुखराई की गोपीकाएं नृत्य करती हैं। इस बार मुखराई में चरकुला नृत्य का आयोजन 15 मार्च को शाम 8 बजे से किया जाएगा।
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श्रीकृष्ण की बाल लीला स्थली राधाकुंड से गांव मुखराई 2 किलोमीटर दूर है। यह गांव राधारानी की ननिहाल है। यहीं से चरकुला नृत्य की शुरुआत हुई। वैसे तो चरकुला नृत्य की कथा श्रीराधारानी के जन्म से जुड़ी है। पर अब यह नृत्य होली महोत्सव का मुख्य हिस्सा बन चुका है। फाग मास की मस्ती में उड़ते रंग-गुलाल, फूलों की पंखुड़ियां के बीच नृत्य की चमक अलग ही आभा बिखेरती है।
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कथा के अनुसार जब मुखरा देवी ने सुना की उनकी पुत्री कीरत ने श्रीराधारानी को जन्म दिया है तो वह बड़ी प्रसन्न हुईं। खुशी में उन्होंने आंगन में रखे रथ के पहिए पर 108 दीप जलाकर उसे सिर पर रखकर नृत्य किया था। आगे चलकर यही नृत्य चरकुला के रूप में प्रसिद्ध हुआ। हुरियारे लोकगीत जुग-जुग जियो, तुम नाचन हारी गाकर महिलाओं को उत्साहित करते हैं। ब्रज लोक कला फाउंडेशन के निर्देशक दानी शर्मा ने बताया कि इस बार तोती देवी, उर्मिला देवी, प्रभा देवी और पिंकी देवी द्वारा मदनमोहनजी मंदिर से नृत्य के लिए चरकुला उठाया जाएगा। संवाद
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चरकुला को दिया नया रूप
गांव मुखराई के प्यारेलाल बाबा ने 1845 में चरकुला को नया स्वरूप दिया था। उन्होंने लकड़ी का घेरा, लोहे की थाल और लोहे की पट्टी मिट्टी के बने 108 दीपक रख 5 मंजिला चरकुला बनाया था। इसका वजन 40 किलोग्राम होता है। इसे महिला कलाकार सिर पर रख गांव मुखराई स्थित मदन मोहन मंदिर में ठाकुर जी का आशीर्वाद प्राप्त कर चौपाल पर नृत्य करती हैं। वर्ष 1930 से 1980 तक यह नृत्य लक्ष्मी देवी और अशर्फी देवी ने किया। चरकुला नृत्य का पहली बार गांव से बाहर आयोजन मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर किया गया था। सन 1992 में गांव के मदनलाल शर्मा व छगनलाल शर्मा चरकुला नृत्यांगना लक्ष्मी देवी के साथ पहली बार मॉरीशस गए थे।
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