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लुधियाना में पकड़े गए साले से मिला चंदन का सुराग
अमर उजाला मथुरा
Updated Thu, 16 Jun 2016 12:10 AM IST
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चंदन बोस
- फोटो : अमर उजाला
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पुलिस ने मंगलवार को चंदनबोस के साले को लुधियाना में दबोच लिया और उसी से पुलिस को उसके लुधियाना में होने की जानकारी मिली। इसके बाद मथुरा पुलिस की सूचना पर उसे और उसकी पत्नी को बस्ती पुलिस ने दबोच लिया।
गत दो जून को हुई जवाहर बाग में हिंसा के दौरान चंदनबोस भी घायल हो गया था, लेकिन वह अपनी पत्नी और राकेश गुप्ता के साथ फरार होने में कामयाब रहा। उसके पैर में चोट आई थी और यहां से भागने के बाद उसने बदायूं में अपना इलाज कराया। सात जून को उसके मोबाइल की आखिरी लोकेशन बदायूं में मिली थी। इसके बाद उसने सिम निकालकर फेंक दिया था, ताकि वह पुलिस के सर्विलांस से बचा रहे।
तब तक पुलिस को उसके साले का मोबाइल नंबर मिल गया था और चंदनबोस लगातार उससे बात कर रहा था। सर्विलांस की मदद से पुलिस ने उसके साले की लोकेशन ट्रैस की और उसे उसे लुधियाना में पकड़ लिया। उससे ही सुराग मिला कि चंदन बोस बस्ती में छिपा है। वहां से भी पश्चिमी बंगाल या नेपाल भागने की तैयारी में है।
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इस पर मथुरा पुलिस ने खुद जाल बिछाने के बजाय बस्ती जिला की पुलिस से संपर्क किया और पूरी डिटेल दी। बस्ती पुलिस ने रात में ही उसे पकड़ लिया। मथुरा पुलिस उसे खुद पकड़ना चाहती थी लेकिन डर यह था कि बस्ती जाने में समय लगेगा, कहीं इस बीच वह भागने में कामयाब न हो जाए।
चंदन ने भी चलाई थी दरोगा संतोष यादव पर गोली
चंदन बोस पर 13 मामले दर्ज हैं, इनमें एक मुकदमा जवाहर बाग में फायरिंग और आगजनी करने का भी है। पुलिस रिकार्ड के मुताबिक हिंसा के दौरान एसओ फरह संतोष यादव पर गोली चलाने वाले कब्जाधारियों में चंदन बोस भी शामिल था। इसके बाद वह आग लगाकर भागा था। उसकी लगाई आग में ही कई कब्जाधारी गिरे और उनकी जान गई। पुलिस ने फायरिंग और आगजनी मामले में कोर्ट से उसका बी-वारंट लिया है। इसी पर उससे पूछताछ की जाएगी।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि उसके लिए सवालों की सूची बन गई है। सबसे अहम सवाल यह होगा कि मथुरा के तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी पर प्रहार करने में कौन कौन कब्जाधारी रहे। पुलिस ने बताया कि वह उस समय वहीं पर मौजूद था। उसे मालूम है कि मुकुल द्विवेदी की जान किसने ली? इसके अलावा जब फायरिंग शुरू हुई तो उसने भी गोली चलाई थी। संतोष यादव की जान इसी गोलीबारी में गई थी।
किसानों को छलकर भरा रामवृक्ष का खजाना
चंदन बोस को रामवृक्ष का राइट हैंड यूं ही नहीं कहा जा रहा है। वह उसके सारे काम संभालता था। सबसे जरूरी दो काम थे। पहला वह जवाहर बाग में भूल से आ जाने वाले लोगों को बंधक बनाकर रखता था। दूसरा रामवृक्ष का खजाना भरता था। उसने 20 किसानों को झांसे में लेकर उनकी जमीन बिकवा दी थी। उनसे पैसा लेकर रामवृक्ष को दे दिया। उन्होंने वापस मांगा, तो धमकी देकर चुप कर दिया।
जवाहर बाग में दो तरह के लोग रहे। एक तो वे जो अपनी मर्जी से रामवृक्ष के साथ आए। इनका मकसद कब्जा करना था। दूसरे वे थे जो उसकी बातों में आकर भूल से वहां पहुंच गए। उन्होंने सच्चाई देखी, तो वहां से जाना चाहा। लेकिन यह ऐसी कैद थी जिसमें जाने का रास्ता ही नहीं था।
जो एक बार आ जाता, उसे वापसी की इजाजत नहीं थी। कोई कोशिश करता, तो उसे बंधक बना लिया जाता। इसका जिम्मा चंदन बोस पर था। पुलिस ने बताया कि ऐसे ही 20 किसानों को चंदन ने छला। उन्हें मिशन के बारे में गलत जानकारी दी। वे झांसे में आ गए। अपनी जमीन बेच दी। पैसा चंदन को दे दिया। चंदन ने रामवृक्ष को पकड़ा दिया। किसानों की आंख बाद में खुली। वहां कोई राष्ट्रभक्ति का मिशन नहीं, गैर कानूनी धंधे थे। उन्होंने अपना पैसा मांगा, तो चंदन ने धमकी देकर उनका मुंह बंद कर दिया।
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गत दो जून को हुई जवाहर बाग में हिंसा के दौरान चंदनबोस भी घायल हो गया था, लेकिन वह अपनी पत्नी और राकेश गुप्ता के साथ फरार होने में कामयाब रहा। उसके पैर में चोट आई थी और यहां से भागने के बाद उसने बदायूं में अपना इलाज कराया। सात जून को उसके मोबाइल की आखिरी लोकेशन बदायूं में मिली थी। इसके बाद उसने सिम निकालकर फेंक दिया था, ताकि वह पुलिस के सर्विलांस से बचा रहे।
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तब तक पुलिस को उसके साले का मोबाइल नंबर मिल गया था और चंदनबोस लगातार उससे बात कर रहा था। सर्विलांस की मदद से पुलिस ने उसके साले की लोकेशन ट्रैस की और उसे उसे लुधियाना में पकड़ लिया। उससे ही सुराग मिला कि चंदन बोस बस्ती में छिपा है। वहां से भी पश्चिमी बंगाल या नेपाल भागने की तैयारी में है।
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इस पर मथुरा पुलिस ने खुद जाल बिछाने के बजाय बस्ती जिला की पुलिस से संपर्क किया और पूरी डिटेल दी। बस्ती पुलिस ने रात में ही उसे पकड़ लिया। मथुरा पुलिस उसे खुद पकड़ना चाहती थी लेकिन डर यह था कि बस्ती जाने में समय लगेगा, कहीं इस बीच वह भागने में कामयाब न हो जाए।
चंदन ने भी चलाई थी दरोगा संतोष यादव पर गोली
चंदन बोस पर 13 मामले दर्ज हैं, इनमें एक मुकदमा जवाहर बाग में फायरिंग और आगजनी करने का भी है। पुलिस रिकार्ड के मुताबिक हिंसा के दौरान एसओ फरह संतोष यादव पर गोली चलाने वाले कब्जाधारियों में चंदन बोस भी शामिल था। इसके बाद वह आग लगाकर भागा था। उसकी लगाई आग में ही कई कब्जाधारी गिरे और उनकी जान गई। पुलिस ने फायरिंग और आगजनी मामले में कोर्ट से उसका बी-वारंट लिया है। इसी पर उससे पूछताछ की जाएगी।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि उसके लिए सवालों की सूची बन गई है। सबसे अहम सवाल यह होगा कि मथुरा के तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी पर प्रहार करने में कौन कौन कब्जाधारी रहे। पुलिस ने बताया कि वह उस समय वहीं पर मौजूद था। उसे मालूम है कि मुकुल द्विवेदी की जान किसने ली? इसके अलावा जब फायरिंग शुरू हुई तो उसने भी गोली चलाई थी। संतोष यादव की जान इसी गोलीबारी में गई थी।
किसानों को छलकर भरा रामवृक्ष का खजाना
चंदन बोस को रामवृक्ष का राइट हैंड यूं ही नहीं कहा जा रहा है। वह उसके सारे काम संभालता था। सबसे जरूरी दो काम थे। पहला वह जवाहर बाग में भूल से आ जाने वाले लोगों को बंधक बनाकर रखता था। दूसरा रामवृक्ष का खजाना भरता था। उसने 20 किसानों को झांसे में लेकर उनकी जमीन बिकवा दी थी। उनसे पैसा लेकर रामवृक्ष को दे दिया। उन्होंने वापस मांगा, तो धमकी देकर चुप कर दिया।
जवाहर बाग में दो तरह के लोग रहे। एक तो वे जो अपनी मर्जी से रामवृक्ष के साथ आए। इनका मकसद कब्जा करना था। दूसरे वे थे जो उसकी बातों में आकर भूल से वहां पहुंच गए। उन्होंने सच्चाई देखी, तो वहां से जाना चाहा। लेकिन यह ऐसी कैद थी जिसमें जाने का रास्ता ही नहीं था।
जो एक बार आ जाता, उसे वापसी की इजाजत नहीं थी। कोई कोशिश करता, तो उसे बंधक बना लिया जाता। इसका जिम्मा चंदन बोस पर था। पुलिस ने बताया कि ऐसे ही 20 किसानों को चंदन ने छला। उन्हें मिशन के बारे में गलत जानकारी दी। वे झांसे में आ गए। अपनी जमीन बेच दी। पैसा चंदन को दे दिया। चंदन ने रामवृक्ष को पकड़ा दिया। किसानों की आंख बाद में खुली। वहां कोई राष्ट्रभक्ति का मिशन नहीं, गैर कानूनी धंधे थे। उन्होंने अपना पैसा मांगा, तो चंदन ने धमकी देकर उनका मुंह बंद कर दिया।