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संगठन और सरकार में तालमेल को बनेगा फार्मूला

Sun, 02 Apr 2017 11:55 PM IST
पुनीत शर्मा, अमर उजाला मथुरा
पुनीत शर्मा, अमर उजाला मथुरा Updated Sun, 02 Apr 2017 11:55 PM IST
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bjp meeting in vrindavan
भाजपा की बैठक
प्रदेश सरकार और संगठन में बेहतर तालमेल बनाने को भाजपा और संघ के दिग्गज फार्मूला तैयार कर रहे हैं। जो योजना बनाई जा रही रही है उसके मुताबिक संगठन की बैठकों में भाजपा के विधायकों की मौजूदगी अनिवार्य रहेगी। लंबे समय से पार्टी की सेवा करने वालों को महत्व दिया जाएगा। इतना ही नहीं संगठन के जो खामोश सिपहसलार हैं वो माननीयों के कामकाज की भी निगरानी करेंगे। रविवार को वृंदावन में जुटे भाजपा के दिग्गजों ने इस विषय पर मंथन किया।
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प्रदेश के सोलह जिलों के जिलाध्यक्ष, जिला प्रभारी और विधानसभा प्रभारी रविवार को वृंदावन में जुटे थे। मौका था श्रीकृष्ण साधक ट्रस्ट में कार्यकर्ता अभिनंदन बैठक का। यूपी को फतह करने के बाद हुई संगठन की इस पहली बैठक में हर पदाधिकारी जोश और उत्साह में दिखा। यहां पहुंचे सभी पदाधिकारी चुनाव के दौरान उनके द्वारा की गई मेहनत का गुणगान भी करते रहे।
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आपसी चर्चा में कइयों को शिकायत थी कि जीतने के बाद से ही विधायक उनके फोन नहीं उठा रहे हैं। संगठन के पदाधिकारियों से बात नहीं कर रहे हैं। कुछ ने तो इस तरह की शिकायतें बड़े पदाधिकारियों से भी की है। 
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कार्यकर्ता अभिनंदन बैठक को संबोधित करने पहुंचे प्रदेश महामंत्री संगठन सुनील बंसल से जब हमने बात की तो उनका कहना था कि अभी तो शिशु का जन्म हुआ है (सरकार बनी ही है)। चलने फिरने लगे तब तालमेल की बात सामने आती है। हालांकि इसके लिए फार्मूला तैयार किया जा रहा है। कुछ नियम और शर्तें रखी जाएंगी। सरकार बनाने में भाजपा के हर कार्यकर्ता ने मेहनत की है लिहाजा सभी का सम्मान रखना पार्टी का फर्ज भी है। ब्रज क्षेत्र के प्रभारी और भाजपा के प्रदेश महामंत्री अशोक कटारिया ने कहा कि पार्टी और सरकार के बीच बेहतर तालमेल रहेगा। 

मीटिंग में केवल तीन ही विधायक पहुंचे थे
चुनाव के बाद भाजपा संगठन की ये पहली मीटिंग थी। सभी जनप्रतिनिधियों को बुलावा भी भेजा गया था। लेकिन रविवार को वृंदावन में हुई मीटिंग में केवल तीन ही जनप्रतिनिधि पहुंचे थे। ये तीनों भी मथुरा के ही थे। विधायकों के न पहुंचने को लेकर भी मीटिंग में सवाल गूंजते रहे। पदाधिकारी आपस में चर्चा करते रहे।

लेकिन बाद में संगठन के नेताओं ने कहा कि यह मीटिंग संगठन की थी इसमें विधायकों को बुलाया ही नहीं गया था। जबकि पार्टी सूत्रों का कहना है कि सभी को निमंत्रण भेजा गया था। इस मीटिंग में आगरा, मथुरा, हाथरस, फिरोजाबाद, अलीगढ़, कासगंज, एटा, मैनपुरी, बरेली, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत और शाहजहांपुर के पदाधिकारी पहुंचे थे। 

2017 के ब्लूप्रिंट पर ही 2019 का चुनाव
उत्तर प्रदेश को फतह करने वाली भाजपा ने 2019 में लोकसभा इलेक्शन को भी इसी ब्लूप्रिंट पर लड़ने का फैसला किया है। इस चुनाव में जिस तरह से संगठन के पदाधिकारियों को लगाया गया था उसी तरह से क्षेत्रवार नेताओं की तैनाती की जाएगी। प्रदेश महामंत्री संगठन सुनील बंसल और ब्रज क्षेत्र के संगठन महामंत्री भवानी सिंह ने उन सभी 135 चुनाव सहायकों की मीटिंग ली जो विधानसभा चुनावों में अपना घर छोड़कर पार्टी का झंडा लेकर निकले थे।


इन सभी को लोकसभा चुनावों की भी जिम्मेदारी दी जा रही है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने भी माना है कि प्रदेश की सभी सीटों पर तैनात रहे चुनाव सहायकों ने बड़ी ही खामोशी के साथ सीटवार रिपोर्ट संगठन को दी थी। जहां भी छोटी मोटी कमियां थीं, उनकी रिपोर्ट पर दुरुस्त कर लिया गया था।
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