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नव संवत्सर पर बांकेबिहारी को लगेका माखन, मिश्री और नीम की पत्तियों का भोग
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वृंदावन (मथुरा)। हिंदू नववर्ष के पहले दिन 2 अप्रैल को नव संवत्सर पर्व पर तीर्थ नगरी वृंदावन के मंदिरों एवं देवालयों में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान होंगे। वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य ठाकुर श्रीबांकेबिहारी को नवीन पोशाक धारण कराने के साथ माखन, मिश्री एवं नीम की पत्तियों का भोग भी लगाया जाएगा।
ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के सेवायत प्रह्लादवल्लभ गोस्वामी ने बताया कि नव संवत्सर पर्व भारतीय हिंदू संस्कृति में साल का पहला दिन माना जाता है। नववर्ष के पहले दिन ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर महाराज का आकर्षक शृंगार करने के साथ नवीन पोशाक पहनाई जाती है। इस दिन माखन-मिश्री एवं नीम की कोपल पत्तियां प्रसाद के रूप में अर्पित की जाती हैं। इसके बाद भक्तों को माखन-मिश्री एवं नीम की पत्तियों का प्रसाद भी बांटा जाएगा। वहीं मंदिर कुल पुरोहित नव संवत्सर वाचन करेंगे।
इसमें पहले ठाकुर श्रीबांकेबिहारी की राशि का फल सुनाएंगे। इसके बाद स्वामी हरिदास की राशि पढ़कर सुनाएंगे। ठाकुर राधावल्लभ मंदिर में भी विशेष आयोजन होंगे। मंदिर के सेवायत विशाललाल गोस्वामी ने बताया कि नव संवत्सर पर ठाकुरजी नवीन वस्त्र धारणकर भक्तों को विशेष दर्शन देंगे। साथ ही मंदिर ध्वजा बदलकर नई स्थापित की जाएगी।
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राजभोग में ठाकुरजी को विशेष भोग निवेदित किया जाएगा। इस भोग में खीर के साथ ही कढ़ी, दाल, (अंगा) मिस्सी रोटी, मीठी रोटी, पीले चावल, सादा चावल, फुल्का, मसूल की दाल, सब्जी दो प्रकार की भोग निवेदित किया जाएगा। मंदिर में ठाकुरजी के समक्ष समाज गायन का आयोजन भी होगा। इसमें रसिक संतों द्वारा नव संवत्सर पर्व से जुड़े पदों का गायन होगा।
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ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के सेवायत प्रह्लादवल्लभ गोस्वामी ने बताया कि नव संवत्सर पर्व भारतीय हिंदू संस्कृति में साल का पहला दिन माना जाता है। नववर्ष के पहले दिन ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर महाराज का आकर्षक शृंगार करने के साथ नवीन पोशाक पहनाई जाती है। इस दिन माखन-मिश्री एवं नीम की कोपल पत्तियां प्रसाद के रूप में अर्पित की जाती हैं। इसके बाद भक्तों को माखन-मिश्री एवं नीम की पत्तियों का प्रसाद भी बांटा जाएगा। वहीं मंदिर कुल पुरोहित नव संवत्सर वाचन करेंगे।
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इसमें पहले ठाकुर श्रीबांकेबिहारी की राशि का फल सुनाएंगे। इसके बाद स्वामी हरिदास की राशि पढ़कर सुनाएंगे। ठाकुर राधावल्लभ मंदिर में भी विशेष आयोजन होंगे। मंदिर के सेवायत विशाललाल गोस्वामी ने बताया कि नव संवत्सर पर ठाकुरजी नवीन वस्त्र धारणकर भक्तों को विशेष दर्शन देंगे। साथ ही मंदिर ध्वजा बदलकर नई स्थापित की जाएगी।
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राजभोग में ठाकुरजी को विशेष भोग निवेदित किया जाएगा। इस भोग में खीर के साथ ही कढ़ी, दाल, (अंगा) मिस्सी रोटी, मीठी रोटी, पीले चावल, सादा चावल, फुल्का, मसूल की दाल, सब्जी दो प्रकार की भोग निवेदित किया जाएगा। मंदिर में ठाकुरजी के समक्ष समाज गायन का आयोजन भी होगा। इसमें रसिक संतों द्वारा नव संवत्सर पर्व से जुड़े पदों का गायन होगा।