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भरत नाट्यम की प्रस्तुति से रिझाए ठाकुर बांकेबिहारी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 09 Apr 2016 11:32 PM IST
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भरत नाट्यम
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नव संवत्सर के अवसर पर शुक्रवार शाम स्वामी हरिदासजी के समाधि स्थल निधिवन राज मंदिर में भरत नाट्यम की मनमोहक प्रस्तुति देकर निधि बेरीवाला ने स्वामीजी और उनके आराध्य ठाकुर बांकेबिहारी को रिझाया। उन्होंने अपनी गुरु और दिल्ली की प्रख्यात नृत्य संस्था नृत्य गीतांजलि की संस्थापक माला मुरली के साथ प्रस्तुति दी।
सूरदास की रचना रास गोपी गोपाल वाल रासमंडल माही... के बाद तुलसीदास की रचना गाईये गणपति जगबंधन... और राधे तू बड़ भागिनी कौन तपस्या कीन, तीन लोक तारन तरन सो तेरे आधीन... गायन पर नृत्य किया तो उनकी भाव भंगिमा देखते ही बन रहीं थीं। भरतनाट्यम की विभिन्न मुद्राओं से गीता के उपदेश और हिरण्यकश्यप वध आदि को दर्शाया गया। भजनों का गायन वैंकटेश्वर, मृदंग पर रामचंद्रन और बांसुरी पर किरन ने साथ दिया।
महोत्सव में राधेश्याम बेरीवाला, राधाकृष्ण पाठक ने कहा कि निधिवन राज मंदिर वह भूमि है जहां स्वामी हरिदासजी ने अपनी संगीत साधना के बल पर ठाकुर बांकेबिहारी का प्राकट्य किया और ध्रुपद संगीत को दुनिया में स्थापित किया। आज भी दिग्गज संगीतज्ञ यहां अपनी कला के जरिए स्वामीजी को भावांजलि प्रस्तुत कर खुद को गौरवान्वित महसूस करते हैं।
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विनीत बेरीवाला, उमा बेरीवाला, विमला बेरीवाला, संतोश बाई बागड़ोदिया, चंपालाल भुवालका, दासबिहारी अग्रवाल, गोपाल बेरीवाला, बल्लभ बेरीवाला, नमन केडिया, विक्की गोस्वामी, आशा पोद्दार आदि उपस्थित रहे।
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सूरदास की रचना रास गोपी गोपाल वाल रासमंडल माही... के बाद तुलसीदास की रचना गाईये गणपति जगबंधन... और राधे तू बड़ भागिनी कौन तपस्या कीन, तीन लोक तारन तरन सो तेरे आधीन... गायन पर नृत्य किया तो उनकी भाव भंगिमा देखते ही बन रहीं थीं। भरतनाट्यम की विभिन्न मुद्राओं से गीता के उपदेश और हिरण्यकश्यप वध आदि को दर्शाया गया। भजनों का गायन वैंकटेश्वर, मृदंग पर रामचंद्रन और बांसुरी पर किरन ने साथ दिया।
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महोत्सव में राधेश्याम बेरीवाला, राधाकृष्ण पाठक ने कहा कि निधिवन राज मंदिर वह भूमि है जहां स्वामी हरिदासजी ने अपनी संगीत साधना के बल पर ठाकुर बांकेबिहारी का प्राकट्य किया और ध्रुपद संगीत को दुनिया में स्थापित किया। आज भी दिग्गज संगीतज्ञ यहां अपनी कला के जरिए स्वामीजी को भावांजलि प्रस्तुत कर खुद को गौरवान्वित महसूस करते हैं।
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विनीत बेरीवाला, उमा बेरीवाला, विमला बेरीवाला, संतोश बाई बागड़ोदिया, चंपालाल भुवालका, दासबिहारी अग्रवाल, गोपाल बेरीवाला, बल्लभ बेरीवाला, नमन केडिया, विक्की गोस्वामी, आशा पोद्दार आदि उपस्थित रहे।