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Braj Ki Holi 2023: दाऊजी मंदिर पर होली की धूम, भागन तै फागुन आयो, होरी खेलूंगी श्याम संग...
Fri, 10 Mar 2023 11:41 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 10 Mar 2023 11:41 PM IST
सार
हुरंगे को देखने के लिए आसपास के गांवों के काफी ग्रामीण वहां एकत्रित हुए। समाज गायन के बाद जाब के हुरियारे ढोल-नगाड़े लेकर नाचते-कूदते चल रहे थे जो हाथों में ढप ढोल बजाते हुए गायन कर रहे थे।
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Braj Ki Holi 2023
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
फाल्गुन में जेठ कहै भाभी... वाली कहावत शुक्रवार को बठैन में देखने को मिली। बलराम जी ने झाड़ियों की ओट लेकर राधा से होली खेली। प्रेम रस रंग भरे हुरंगे की धमक बंब-नगाड़ों की गूंज बठैन में सुनाई दी। बठैन पहुंचे जाब के हुरियारों पर हुरियारिनों ने लाठियां चलाकर बृहस्पतिवार का बदला लिया। प्रेम से सराबोर होली को देखकर दूर दराज से आए श्रद्धालु प्रेम रस में डूबकर अबीर-गुलाल की वर्षा कर जय-जयकार करने लगे।
दोपहर करीब तीन बजे जाब के हुरियारे बलराम की प्रतीक झंडी को लेकर दाऊजी मंदिर पर एकत्रित हुए। मंदिर में भागन तै फागुन आयो, होरी खेलूंगी श्याम संग..., नंदी भागन तै फागुन आयो, उनने चलाई पिचकारी, अरक जा, हमनै उडायौ गुलाल...सहित रसिया और ब्रजभाषा प्राचीन होली पदों के स्वर गूंजे। हुरंगे को देखने के लिए आसपास के गांवों के काफी ग्रामीण वहां एकत्रित हुए। समाज गायन के बाद जाब के हुरियारे ढोल-नगाड़े लेकर नाचते-कूदते चल रहे थे जो हाथों में ढप ढोल बजाते हुए गायन कर रहे थे। पीछे सींग की झाड़ियां लेकर युवक चल रहे थे।
शोभायात्रा शाम साढ़े पांच बजे गांव के बाहर मैदान पर पहुंची। हुरियारिन जहां घूंघट ओढ़े और हाथों में लाठियां लिए स्थान-स्थान पर खड़ी थीं और बरसाने की लट्ठमार होली की भांति लाठियों से हुरियारों पर लकड़ी के विशेष प्रकार से बने हलों पर वार कर रही थीं। गोल घेर में 35 फीट व्यास के आकार के गोले में हुरियारे भागते हुए हुरियारिनों की लाठियों के प्रहार को रोक रहे थे। एक घंटे तक चले हुरंगे में बलदाऊ की जय, राधारानी के जयघोष गूंजते रहे।
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दोपहर करीब तीन बजे जाब के हुरियारे बलराम की प्रतीक झंडी को लेकर दाऊजी मंदिर पर एकत्रित हुए। मंदिर में भागन तै फागुन आयो, होरी खेलूंगी श्याम संग..., नंदी भागन तै फागुन आयो, उनने चलाई पिचकारी, अरक जा, हमनै उडायौ गुलाल...सहित रसिया और ब्रजभाषा प्राचीन होली पदों के स्वर गूंजे। हुरंगे को देखने के लिए आसपास के गांवों के काफी ग्रामीण वहां एकत्रित हुए। समाज गायन के बाद जाब के हुरियारे ढोल-नगाड़े लेकर नाचते-कूदते चल रहे थे जो हाथों में ढप ढोल बजाते हुए गायन कर रहे थे। पीछे सींग की झाड़ियां लेकर युवक चल रहे थे।
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शोभायात्रा शाम साढ़े पांच बजे गांव के बाहर मैदान पर पहुंची। हुरियारिन जहां घूंघट ओढ़े और हाथों में लाठियां लिए स्थान-स्थान पर खड़ी थीं और बरसाने की लट्ठमार होली की भांति लाठियों से हुरियारों पर लकड़ी के विशेष प्रकार से बने हलों पर वार कर रही थीं। गोल घेर में 35 फीट व्यास के आकार के गोले में हुरियारे भागते हुए हुरियारिनों की लाठियों के प्रहार को रोक रहे थे। एक घंटे तक चले हुरंगे में बलदाऊ की जय, राधारानी के जयघोष गूंजते रहे।
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