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Mathura News: गो सेवा के अनन्य साधक बाबा पंचतत्व में विलीन, उमड़ा जनसैलाब
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आजनौख गांव में चंद्रशेखर उर्फ़ फरसा वाले बाबा का हुआ अंतिम संस्कार।
बरसाना। अजनौंख स्थित उस गोशाला में, जिसे चंद्रशेखर महाराज उर्फ फरसे वाले बाबा ने अपनी तपस्या और त्याग से जीवंत किया था, शनिवार को उनका पार्थिव शरीर पहुंचते ही पूरा वातावरण शोक और श्रद्धा से द्रवित हो उठा। सैकड़ों की संख्या में उमड़े गोभक्तों ने अंतिम दर्शन कर श्रद्धांजलि दी। जिलाधिकारी ने बाबा की समाधि बनवाने और पुलिस चौकी की स्थापना करके उसका नामकरण बाबा के नाम पर करने की घोषणा की।
वर्षों तक जिस भूमि को बाबा ने गो सेवा की तपस्थली बनाया, उसी पवित्र स्थल पर उनकी अंतिम झलक पाने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। हर चेहरे पर वेदना थी और हर हृदय में एक ही भाव गो सेवा का एक अदम्य संकल्प आज देह से विलग हो गया। बाबा के निधन के उपरांत क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर आक्रोश की स्थितियां भी बनीं, किंतु गोशाला में पूरा वातावरण गहन संवेदना और संयम से परिपूर्ण रहा। हालांकि इसी बीच गोभक्तों ने प्रशासन के समक्ष कई मांगें रखीं और जिलाधिकारी को मौके पर बुलाने की बात पर अड़े रहे। जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने बरसाना पहुंचकर उनके समर्थकों से वार्ता की। सूचना पर जिलाधिकारी मौके पर पहुंचे और लोगों से वार्ता की। इस दौरान गोभक्तों ने बाबा के हत्यारों पर सख्त कार्रवाई, गो रक्षकों को शस्त्र लाइसेंस देने, गोशाला की सुरक्षा सुनिश्चित करने और बाबा को सम्मान दिए जाने की मांग रखी। साथ ही हिरासत में लिए गए गोभक्तों की रिहाई का मुद्दा भी उठाया गया।
जिलाधिकारी ने लोगों को आश्वासन दिया कि अजनौंख स्थित गोशाला में बाबा की स्मृति में समाधि स्थल बनाया जाएगा और सुरक्षा के लिए वहां पुलिस चौकी भी स्थापित की जाएगी। इसके अलावा गो सेवकों को प्राथमिकता के आधार पर शस्त्र लाइसेंस दिए जाने की प्रक्रिया पर भी उचित कार्रवाई का भरोसा दिया गया। उनके नाम पर पुलिस चौकी खुलवाने का भी आश्वासन दिया।
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जब सैकड़ों गौवंश के मध्य बाबा का पार्थिव शरीर रखा गया, तो दृश्य अत्यंत मार्मिक हो उठा। जिन गायों की सेवा को उन्होंने अपने जीवन का परम धर्म माना, उन्हीं के सान्निध्य में उनकी अंतिम यात्रा प्रारंभ हुई। बाबा अमर रहें और गो माता की जय के उदघोषों से पूरा क्षेत्र गूंजायमान हो उठा। वैदिक विधि-विधान के साथ बाबा का अंतिम संस्कार संपन्न किया गया।
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वर्षों तक जिस भूमि को बाबा ने गो सेवा की तपस्थली बनाया, उसी पवित्र स्थल पर उनकी अंतिम झलक पाने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। हर चेहरे पर वेदना थी और हर हृदय में एक ही भाव गो सेवा का एक अदम्य संकल्प आज देह से विलग हो गया। बाबा के निधन के उपरांत क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर आक्रोश की स्थितियां भी बनीं, किंतु गोशाला में पूरा वातावरण गहन संवेदना और संयम से परिपूर्ण रहा। हालांकि इसी बीच गोभक्तों ने प्रशासन के समक्ष कई मांगें रखीं और जिलाधिकारी को मौके पर बुलाने की बात पर अड़े रहे। जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने बरसाना पहुंचकर उनके समर्थकों से वार्ता की। सूचना पर जिलाधिकारी मौके पर पहुंचे और लोगों से वार्ता की। इस दौरान गोभक्तों ने बाबा के हत्यारों पर सख्त कार्रवाई, गो रक्षकों को शस्त्र लाइसेंस देने, गोशाला की सुरक्षा सुनिश्चित करने और बाबा को सम्मान दिए जाने की मांग रखी। साथ ही हिरासत में लिए गए गोभक्तों की रिहाई का मुद्दा भी उठाया गया।
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जिलाधिकारी ने लोगों को आश्वासन दिया कि अजनौंख स्थित गोशाला में बाबा की स्मृति में समाधि स्थल बनाया जाएगा और सुरक्षा के लिए वहां पुलिस चौकी भी स्थापित की जाएगी। इसके अलावा गो सेवकों को प्राथमिकता के आधार पर शस्त्र लाइसेंस दिए जाने की प्रक्रिया पर भी उचित कार्रवाई का भरोसा दिया गया। उनके नाम पर पुलिस चौकी खुलवाने का भी आश्वासन दिया।
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जब सैकड़ों गौवंश के मध्य बाबा का पार्थिव शरीर रखा गया, तो दृश्य अत्यंत मार्मिक हो उठा। जिन गायों की सेवा को उन्होंने अपने जीवन का परम धर्म माना, उन्हीं के सान्निध्य में उनकी अंतिम यात्रा प्रारंभ हुई। बाबा अमर रहें और गो माता की जय के उदघोषों से पूरा क्षेत्र गूंजायमान हो उठा। वैदिक विधि-विधान के साथ बाबा का अंतिम संस्कार संपन्न किया गया।