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वर्तमान हालात से दुखी हो लौटाई है आजम ने गाय: शंकराचार्य

Mon, 10 Apr 2017 11:44 PM IST
अमर उजाला मथुरा
अमर उजाला मथुरा Updated Mon, 10 Apr 2017 11:44 PM IST
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azam have returned the cow due to circumustances
आजम खां ने लौटाई गाय पहुंची शंकराचार्य आश्रम - फोटो : अमर उजाला
पूर्व मंत्री आजम खां ने शंकराचार्य से भेंट में मिली गाय को रविवार को वापस गोवर्धन भेज दिया। आजम खां द्वारा वापस भेजी गयी गाय रविवार की मध्य रात्रि को शंकराचार्य आश्रम पहुंच गई। रामपुर के सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष ओमेंद्र सिंह चौहान एवं सुरजनपुर गांव के प्रधान गुड्डू सिंह गाय व एक बछिया को लेकर शंकराचार्य आश्रम पहुंचे। सोमवार प्रात: शंकराचार्य अद्योक्षजानंद देवतीर्थ ने कहा कि आजम खां नेक नीयत इंसान हैं।
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वर्तमान हालातों से दुखी होकर उन्होंने डेढ़ वर्ष पूर्व भेंट स्वरूप दी गयी गाय वापस भेज कर अपनी जिम्मेदारी का परिचय दिया है। वर्तमान में देश व समाज के हालातों व अलवर में घटित घटना से आंतरिक रूप से आजम खान दुखी हैं व भय का माहौल है। ऐसा आजम खान द्वारा भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया है। हिंदुस्तानी लोग घर व पंथ से ऊपर उठ कर गो सेवा करते हैं। इनमें मुस्लिम भी हैं। शंकराचार्य ने कहा कि उन्हें पता चला है कि मुख्यमंत्री आदित्यनाथ की गोशाला में भी गोसेवा के लिए मुस्लिम रहते हैं। जाति, धर्म व मजहब के नाम पर इस प्रकार का माहौल बनाया जाना गलत है। सरकारों को माहौल बनाना पड़ेगा।
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जिससे गो भक्त निर्भीक होकर गो सेवा कर सकें, चाहे वह किसी जाति व सम्प्रदाय का हो। उन्होंने कहा कि कानून हाथ में लेने वालों पर सख्ती होनी चाहिए। आरएसएस जहां हिंदू मापदंडों व राष्ट्रीयता की लड़ाई लड़ रही है, वहीं सतत गो रक्षा कानून बनाने के लिए भी खड़ा होना चाहिए। शंकराचार्य देवतीर्थ ने कहा कि अब समय आ गया है कि देश में राष्ट्र व्यापी गो रक्षा कानून बना कर सख्ती से लागू किया जाए। केंद्र एवं राज्य में हिंदूवादी सरकार है।
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उन्होंने कहा कि गाय का सम्मान हिंदू ही नहीं अनेक मुसलमान भी करते हैं। गो रक्षा के लिए संतों ने बहुत संघर्ष किया है। करपात्री महाराज, प्रभुदत्त ब्रह्मचारी ने अनशन और आंदोलन किए। उनके गुरु व पुरी पीठ के शंकराचार्य निरंजन देवतीर्थ महाराज ने 72 दिन अनशन रखा था। उन्होंने संघ प्रमुख मोहन भागवत से भी आह्वान किया है कि वे शक्ति से प्रधानमंत्री से गो रक्षा के लिए कानून बनानवे के लिए कहें।
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