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कवि होता या शिक्षक, वर्तमान पहचान के पीछे अंत्योदय का उपासक

Thu, 25 Dec 2014 12:08 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा/ नगला चंद्रभ्ाान
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा/ नगला चंद्रभ्ाान Updated Thu, 25 Dec 2014 12:08 AM IST
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Atal bihari vajpeyi's stories in mathura
करीब इक्कीस साल पुराना दृश्य। स्थान: दीनदयाल धाम स्मारक। समय: दोपहर करीब तीन बजे। एक मेज के पीछे लगी तीन कुर्सियां, सामने बिछे फर्श पर बैठे पदाधिकारी और कार्यकर्ता।
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यकायक लोकसभा में नेता विपक्ष अटल बिहारी वाजपेयी, संघ पदाधिकारी भाऊराव देवरस और क्षेत्र प्रचारक ओमप्रकाश जी का आगमन होता है। बैठे लोग तीनों के सम्मान में खड़े होते हैं।
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तीनों विभूतियों के स्थान ग्रहण करते ही सभी अपने स्थान पर विराजमान होते हैं। ओमप्रकाश जी और भाऊराव देवरस के उद्बोधन के बाद अटल बिहारी वाजपेयी खड़े होते हैं। उस समय हो रही हल्की-फुल्की खुसर-फुसर बंद हो जाती है। वातावरण में छा जाती है सुई गिरने की आवाज सुनाई देने वाली शांति।
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अटलबिहारी वाजपेयी पास बैठे वक्ताओं के बाद सामने बैठे परिचित चेहरों का नाम लेकर बोलना शुरू करते हैं। पंडित दीनदयाल उपाध्याय... इतना कहने के बाद कवि हृदय अटल की आंखें अश्रुओं का सैलाब ले आती हैं। पूरा माहौल गंभीर हो जाता है।

करीब तीस सेकेंड बाद कुर्ते की सीधी जेब से रुमाल निकालकर वाजपेयी चेहरे पर फैल रहे आंसुओं को पोंछते हैं और बोझिल वातावरण को फिर संबोधित करते हैं।

मित्रों... आज राजनीति मैं जो कुछ हूं, वह अंत्योदय के उपासक पंडित दीनदयाल उपाध्याय की देन है। दीनदयाल जी नहीं होते तो मैं शिक्षक या कवि होता और पहचान भी नहीं होती। शिंदे की छावनी ग्वालियर रहने के दौरान उनका सानिध्य मुझे मिला। मेरे राजनीतिक गुरु दीनदयाल उपाध्याय भारत माता को सुजला और सुफला बनाने के लिए पैदा हुए। उनके अधूरे सपने को हम साकर करेंगे...।



स्वागत में बजाया कालेज का घंटा
माह नवंबर और सन 1987 का दिन। दीनदयाल धाम में आने से पहले भाजपाइयों ने फरह कस्बा में  अटलबिहारी वाजपेयी को खुली जीप में सवार करके बाजार से निकालने की योजना बनाई। उस समय इंटर की कक्षा में पढ़ रहे कई छात्र बजरंग दल से जुडे़ थे। तय हुआ स्वागत में कालेज के सभी छात्र शामिल होंगे। सुबह करीब ग्यारह बजे बाजार से उठा अटलबिहारी जिंदाबाद के नारों का शोर जैसे ही कस्बा के सेठ प्रेम सुख दास कालेज के कमरों में पहुंचा तो तीन छात्रों ने आपस में इशारा किया। एक छात्र पानी पीने के बहाने निकला और सामने बरामदे में लगा घंटा बजा दिया। घंटा बजते ही सभी छात्र पेपर छोड़कर बाहर निकल आए और अटल बिहारी जिंदाबाद कहकर स्वागत जुलूस में शामिल हो गए। यह अलग बात है,छात्रों को अगले दिन इस कृत्य के लिए अभिभावकों समेत माफी मांगनी पड़ी थी। 
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