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Mathura News: भ्रष्टाचार की गवाही दे रही टंकी की जांच करेगी एएमयू की टीम
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मथुरा। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) की तकनीकी टीम धौलीप्याऊ क्षेत्र के चंद्रपुरी में स्थित भ्रष्टाचार की गवाही दे रही टंकी की जांच करेगी। जल निगम के अधिकारियों ने टंकी का परीक्षण करने के बाद यह निर्णय लिया है। ओवरहेड टैंक में अधिकारियों को जल रिसाव के चिन्ह मिले हैं। विभाग ने नौ जुलाई को एएमयू को पत्र लिखकर जांच की मांग की थी।
पुनर्गठन पेयजल योजना के तहत तीन साल पहले बीएसए कॉलेज के पास कृष्णापुरी और धौलीप्याऊ के चंद्रपुरी में दो टंकियों का निर्माण कराया गया था। कार्य पूरा होने के बाद जल निगम ने दोनों टंकियों को नगर निगम के हैंडओवर कर दिया था। कहा था कि 25 साल तक निर्बाध इन टंकियों का प्रयोग किया जा सकेगा। हालांकि निर्माण के एक साल बाद ही कृष्णापुरी में बनी पानी की टंकी अचानक धराशायी हो गई। हादसे में कई लोगों की मौत हो गई थी। उस समय एएमयू की तकनीकी टीम ने धराशायी हुई टंकी का परीक्षण किया था। जांच में टंकी के निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयोग होने की बात सामने आई थी।
हादसे के बाद चंद्रपुरी में बनी टंकी भी जांच के घेरे में आ गई थी। स्थानीय लोगों ने पानी की टंकी से निरंतर लीकेज की समस्या सामने आने का दावा किया था। इसके बाद अधिकारियों ने टंकी से पेयजल आपूर्ति बंद कर दी और विशेषज्ञों ने भी टंकी को कंडम घोषित किया था। समय बीतने के बाद अधिकारियों ने मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। एक साल तक किसी जिम्मेदार ने चंद्रपुरी में बनी टंकी की सुध नहीं ली।
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स्थानीय लोगों की शिकायत पर छह जुलाई को अमर उजाला में प्रमुखता से खबर प्रकाशित हुई तो जिम्मेदार जागे। अब जल निगम के अधिकारियों ने एएमयू की तकनीकी टीम से टंकी का परीक्षण कराने के लिए पत्र लिखा है। अधिकारियों ने यह भी कहा है कि टंकी के ओवरहेड टैंक में जल रिसाव के चिन्ह पाए गए हैं। कुछ स्थानों पर पानी का लीकेज होना भी पाया गया है। एक्सईएन विशाल सिंह ने बताया कि एएमयू की तकनीकी टीम से टंकी का परीक्षण कराया जाएगा। इसके बाद आगे की दिशा तय हो सकेगी।
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पुनर्गठन पेयजल योजना के तहत तीन साल पहले बीएसए कॉलेज के पास कृष्णापुरी और धौलीप्याऊ के चंद्रपुरी में दो टंकियों का निर्माण कराया गया था। कार्य पूरा होने के बाद जल निगम ने दोनों टंकियों को नगर निगम के हैंडओवर कर दिया था। कहा था कि 25 साल तक निर्बाध इन टंकियों का प्रयोग किया जा सकेगा। हालांकि निर्माण के एक साल बाद ही कृष्णापुरी में बनी पानी की टंकी अचानक धराशायी हो गई। हादसे में कई लोगों की मौत हो गई थी। उस समय एएमयू की तकनीकी टीम ने धराशायी हुई टंकी का परीक्षण किया था। जांच में टंकी के निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयोग होने की बात सामने आई थी।
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हादसे के बाद चंद्रपुरी में बनी टंकी भी जांच के घेरे में आ गई थी। स्थानीय लोगों ने पानी की टंकी से निरंतर लीकेज की समस्या सामने आने का दावा किया था। इसके बाद अधिकारियों ने टंकी से पेयजल आपूर्ति बंद कर दी और विशेषज्ञों ने भी टंकी को कंडम घोषित किया था। समय बीतने के बाद अधिकारियों ने मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। एक साल तक किसी जिम्मेदार ने चंद्रपुरी में बनी टंकी की सुध नहीं ली।
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स्थानीय लोगों की शिकायत पर छह जुलाई को अमर उजाला में प्रमुखता से खबर प्रकाशित हुई तो जिम्मेदार जागे। अब जल निगम के अधिकारियों ने एएमयू की तकनीकी टीम से टंकी का परीक्षण कराने के लिए पत्र लिखा है। अधिकारियों ने यह भी कहा है कि टंकी के ओवरहेड टैंक में जल रिसाव के चिन्ह पाए गए हैं। कुछ स्थानों पर पानी का लीकेज होना भी पाया गया है। एक्सईएन विशाल सिंह ने बताया कि एएमयू की तकनीकी टीम से टंकी का परीक्षण कराया जाएगा। इसके बाद आगे की दिशा तय हो सकेगी।