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Mathura News: रामवीर प्रधान की हत्या का मुख्य आरोपी था अमोल पहलवान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 24 Aug 2024 03:00 AM IST
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Amol Pehlwan was the main accused in the murder of Ramveer Pradhan
मथुरा। अमोल की हत्या के पीछे शुक्रवार देर रात तक पुरानी अदावत की बात सामने आई। पुलिस व गांव वालों ने बताया कि अमोल पहलवान पर प्रधान रामवीर सिंह की हत्या शूटरों द्वारा कराने का आरोप था। इस वारदात में तीन शूटरों सहित छह आरोपी गिरफ्तार हुए थे।
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चुनाव में कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण के प्रस्तावक रहे पैगांव ग्राम प्रधान रामवीर सिंह की हत्या 29 जनवरी 2022 को कोकिलावन धाम में उस समय हुई जब वह शनिदेव मंदिर में दर्शन करने गए थे। मार्ग पर पहले से ही घात लगाए बैठे हमलावरों ने रामवीर पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर उन्हें मौत के घाट उतार दिया था। उनके सिर में चार गोलियां लगीं थी। मामले का खुलासा करते हुए पुलिस ने अमोल पहलवान को मुख्य आरोपी बताया था।
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बताया जाता है कि 20 करोड़ रुपये करीब की ग्रांट ग्राम पंचायत के विकास को स्वीकृत हुई थी। पुलिस ने उस समय रामवीर की हत्या के पीछे का उद्देश्य बताते हुए कहा था कि अमोल ने रामवीर के सामने प्रधानी का चुनाव लड़ा था। वह हार गया था। मगर, जैसे ही 20 करोड़ रुपये करीब की ग्रांट मंजूर हुई तो उसने रामवीर की हत्या की साजिश रच दी, ताकि वह रामवीर की हत्या करा दे और उपचुनाव में खड़ा होकर इस पैसे का इस्तेमाल कर सके। इसके अलावा यह भी थ्योरी पुलिस ने रखी थी कि अमोल ने इस ग्रांट से होने वाले विकास कार्यों की ठेकेदारी भी मांगी थी।
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ठेकेदारी न मिलने पर उसने कमीशन मांगी थी। मगर, उसकी मांगों को सिरे से रामवीर ने खारिज कर दिया था। अमोल ने हापुड़ के शूटर डमरु के अलावा शूटर मोनू जाट उर्फ अजय, शिवम, के अलावा पैगांव के रोहताश और दान सिंह को शामिल किया था। हत्या के बदले शूटरों को प्रलोभन दिया था कि वह जल्द कोसीकलां बॉर्डर पर स्थित टोल का ठेका लेने जा रहा है। इसमें शूटरों को शामिल कर लेगा। हालांकि बाद में एक लाख रुपये की सुपारी देने की भी बात सामने आई थी। रामवीर की हत्या का मुकदमा कोर्ट में विचाराधीन है।


घटनाक्रम को लेकर दूसरी चर्चा यह भी आई पुलिस के सामने
वारदात के संबंध में मृतक अमोल के भाई ने मुकदमे में तो कृष्ण कुमार और उसके साथियों द्वारा पंचायत में आते ही ताबड़तोड़ गोलियां चलाने की बात लिखी है। मगर, पुलिस को शुरुआती जांच में गांव वालों से यह भी पता लगा कि कृष्ण कुमार उसके साथी पहले से ही पंचायत में मौजूद थे। दोनों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हुई और उसके बाद गोलियां चलाई गईं।


मृतक पक्ष ने लगाया पुलिस पर मिलीभगत का आरोप
मृतक पक्ष के लोगों ने जाम हाईवे पर जाम लगाया तो पुलिस अधिकारियों को बताया कि कृष्ण कुमार को एक पुलिसकर्मी घटनास्थल से बाइक पर बैठाकर भगाकर ले गया था। उस पुलिसकर्मी को कृष्ण कुमार का गनर बताया जा रहा है। हालांकि पुलिस ने देर रात तक यह बात स्वीकार नहीं की कि वारदात के समय कृष्ण कुमार के साथ उसका गनर था या नहीं। पुलिस इस तथ्य की पुख्ता जांच के बात कहती रही।



क्या थम पाएगी रंजिश
पुलिस के सामने अमोल की हत्या के बाद यह चुनौती है कि रामवीर प्रधान की हत्या के बाद पैदा हुई इस रंजिश में अब कोई तीसरा मर्डर न हो। पुलिस ने खुफिया तंत्र को इन दोनों परिवारों की निगरानी में लगा दिया है। रामवीर की हत्या के संबंध में जो मुकदमा कोर्ट में विचाराधीन है, उसमें पड़ने वाली तारीखों पर भी दोनों पक्षों के लोगों, खासकर गवाहों की सुरक्षा का आदेश दिया गया है।
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