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बोली जनता, हमारी तो कभी सुनने आए ही नहीं एमएलए

Thu, 01 Sep 2016 12:10 AM IST
अमर उजाला मथुरा
अमर उजाला मथुरा Updated Thu, 01 Sep 2016 12:10 AM IST
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amar ujala abhiyan in mathura for mla
एप्रोच मार्ग - फोटो : अमर उजाला वृंदावन
कहते-कहते थक गए। अब तो कहना ही बंद कर दिया। जब भी विधायकजी के बारे में पूछा यही पता चला कि वह बाहर गए हैं। वृंदावन के लोगों का कहना है कि जो वादे चुनाव में हुए उनमें से कोई भी तो पूरा नहीं किया गया है। सड़कें जर्जर हैं, पानी निकासी का इंतजाम नहीं। ड्रेनेज सिस्टम फेल पड़ा है। भूमिगत विद्युत परियोजना अधूरी पड़ी है। यमुना शुद्धीकरण और यमुना किनारे राधाकृष्ण की पौड़ी निर्माण का वादा भी पूरा नहीं हो पाया है।
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मथुरा-वृंदावन सीट पर अकेले वृंदावन और आसपास के गांव मिलाकर ही साठ हजार वोटर हैं। अब इतनी बड़ी आबादी की अनदेखी किसी को भी भारी पड़ सकती है। 2012 के चुनाव में यहां की जनता ने प्रदीप माथुर का खुलकर सहयोग किया था। इन्हें उम्मीद थी कि उनकी समस्याओं का समाधान हो जाएगा, लेकिन लोगों का कहना है कि जो समस्याएं थीं वह आज भी बरकरार हैं। बुधवार को अमर उजाला की टीम ने वृंदावन में गांधी मार्ग स्थित गीता आश्रम में नगर के प्रबुद्ध लोगों से शहर के विकास और उनकी दिक्कतों के संबंध में चर्चा की तो सभी बोले, हालात आप देख रहे हैं। एक भी सड़क तो ऐसी नहीं है जहां से निकल सकें। थोड़ी सी बरसात हो जाए तो शहर तालाब बन जाता है। इस धार्मिक नगरी की भारी उपेक्षा की जा रही है। 
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वृंदावन के गौरानगर कालोनी, राधा निवास, मथुरा दरवाजा, किशोरपुरा, गांधी नगर, गोधूलिपुरम, मारुति नगर, दावानल कुंड, संत कालोनी, मोतीझील मार्ग, दुसायत, बांकेबिहारी कालोनी, रतनछतरी, परिक्रमा मार्ग, गुरुकुल विवि रोड, रंगजी का नगला, टटिया स्थान और रामानुज नगर के लोगों का कहना है कि नाले टूटे पड़े हैं, सड़क ध्वस्त है। विधायकजी जीतने के बाद यहां कभी आए नहीं है। जबकि उन लोगों को उम्मीद थी कि विधायकजी उनके बीच रहेंगे। गोधूलिपुरम निवासी चंद्रलाल शर्मा, पंडित बनवारीलाल, राजेश शर्मा गौड़, शोभित शर्मा, सुरेंद्र गौतम एडवोकेट का कहना है कि जनता ने जो जिम्मेदारी विधायक प्रदीप माथुर को सौंपी थी, विधायकजी उन्हें पूरी तरह नहीं निभा पाए। आज भी वृंदावन के बहुत से ऐसे इलाके हैं जिसमें जर्जर सड़कें और जलभराव की समस्या जस की तस बनी हुई है। नीरज गौतम, देवेंद्र शर्मा, हरीबाबू शर्मा, पंडित अश्वनी मिश्र, श्रीवल्लभ गौतम ने कहा कि जिस रफ्तार से विकास होना चाहिए वैसा नहीं हुआ।
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मधुमंगल शुक्ला ने कहा कि जनता चाहती है कि उनका जनप्रतिनिधि उनके सुख दुख में शरीक हो। मेघश्याम वार्ष्णेय, कपिलदेव उपाध्याय, संजय शर्मा, रघु अरोड़ा, देशराज चौधरी, शैलेंद्र सिंह ने कहा कि 2010 में यमुना में आई बाढ़ के चलते क्षतिग्रस्त हुए वृंदावन पानी गांव पुल को जोड़ने वाला एप्रोच मार्ग का निर्माण नहीं हुआ। डा. लक्ष्मी गौतम, मधु शर्मा, विनीता अग्रवाल ने कहा कि वृंदावन में आए दिन हो रहे महिला अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए कभी भी विधानसभा में आवाज बुलंद नहीं की और न ही अफसरों से मिलकर धर्मनगरी की सुरक्षा व्यवस्था को चौकस करने का कोई इंतजाम किया।  सोशल मीडिया पर वृंदावन शर्मसार हो गया, पर विधायक चुप रहे। महामंडलेश्वर डा. अवशेषानंद महाराज, डा. अभिषेक शर्मा, विपुल गौड़, मोहन अग्रवाल, पुरुषोत्तम, मदन सोनी ने कहा कि बंदरों के बढ़ते आतंक से मुक्ति दिलाने के लिए जिस स्तर से विधायक को प्रयास करने चाहिए थे वो कर नहीं सके।



महत्वपूर्ण बैठकों में नहीं होते विधायक 
वृंदावन। वृंदावन की जनता का यह भी कहना है कि क्षेत्र के विकास के लिए होने वाली बैठकों में विधायक भाग ही नहीं लेते हैं। नगर पालिका की बोर्ड बैठक के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकों में विधायक आज तक नजर नहीं आए, केवल उनका भेजा प्रतिनिधि ही बैठक में उनकी औपचारिकता पूरी करता है। 

वृंदावन की प्रमुख समस्याएं
- नगर की सड़कों पर लगने वाला जाम।
- बरसात में जलभराव।
- बंदरों का आतंक।
- अधूरा पड़ा एप्रोच मार्ग।
- अधूरा पड़ा परिक्रमा मार्ग।
- अधूरा पड़ा भूमिगत विद्युत।
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