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इंस्पेक्टर वृंदावन और चौकी इंचार्ज जैंत सस्पेंड
अमर उजाला मथुरा
Updated Fri, 24 Jun 2016 11:40 PM IST
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police
- फोटो : amar ujala
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22 जून की शाम को आगरा-दिल्ली हाईवे पर चौमुंहा अड्डे पर ट्रक में मरी हुईं 58 गायें मिलने के बाद हुए बवाल में पुलिस की लापरवाही खुलकर सामने आ गई। अपने स्तर पर जांच के बाद डीआईजी ने इंस्पेक्टर वृंदावन उदय प्रताप सिंह और जैंत चौकी इंचार्ज संतोष कुमार यादव को सस्पेंड कर दिया है। वहीं पूरे प्रकरण में जांच भी बैठा दी गई है।
चौमुंहा अड्डे पर बुधवार की शाम को एक ट्रक में 58 मरीं हुईं गायें मिलने के बाद बवाल हो गया था। भीड़ ने गायों को निकालकर ट्रक में आग लगा दी थी। फायर ब्रिगेड की गाड़ी पर पथराव किया। हाईवे को भी जाम कर दिया था। शाम को सात बजे से यहां बवाल शुरू हो गया था। लेकिन थानाध्यक्ष वृंदावन उदय प्रताप सिंह और संबंधित चौकी जैंत के इंचार्ज संतोष कुमार यादव दो से तीन घंटे तक लेट पहुंचे। अगर यह दोनों समय से पहुंच जाते तो बवाल को रोका जा सकता था। ‘अमर उजाला’ ने पुलिस वालों की लेटलतीफी को इंगित करते हुए शिद्दत से इस मामले को उठाया।
डीआईजी अजय मोहन शर्मा ने पूरे मामले में संज्ञान लिया और अपने स्तर से जांच कराई। जांच में पता चला कि इंस्पेक्टर तीन घंटे और दरोगा दो घंटे लेट पहुंचे थे। एसएसपी बबलू कुमार ने बताया कि डीआईजी ने दोनों को सस्पेंड कर दिया है। इस पूरे प्रकरण पर जांच भी बैठा दी गई है।
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तीन थाने और पांच चौकियां भी जांच के दायरे में
गायों से लदा ट्रक आगरा से मथुरा तक तीन थाने और पांच चौकियों को पार करके चौमुंहा तक पहुंचा था। जबकि हर थाना और चौकी क्षेत्र में चेकिंग बैरियर लगा हुआ है। अब बड़ा सवाल यह है कि पुलिस वालों को इतना बड़ा ट्रक नजर क्यों नहीं आया।
पुलिस का मुखबिर तंत्र फेल, नहीं पता चला गोतस्करों का
अभी तक पुलिस यह पता नहीं कर सकी है कि इन गायों को कहां से लाया जा रहा था और कहां ले जा रहे थे। अगर पुलिस की जांच इसी रफ्तार से चलती रही तो यह केस भी पुलिस की जीडी में ही दम तोड़ देगा। मामले में पुलिस के मुखबिर तंत्र के फेल होने की बात भी सामने आ रही है।
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चौमुंहा अड्डे पर बुधवार की शाम को एक ट्रक में 58 मरीं हुईं गायें मिलने के बाद बवाल हो गया था। भीड़ ने गायों को निकालकर ट्रक में आग लगा दी थी। फायर ब्रिगेड की गाड़ी पर पथराव किया। हाईवे को भी जाम कर दिया था। शाम को सात बजे से यहां बवाल शुरू हो गया था। लेकिन थानाध्यक्ष वृंदावन उदय प्रताप सिंह और संबंधित चौकी जैंत के इंचार्ज संतोष कुमार यादव दो से तीन घंटे तक लेट पहुंचे। अगर यह दोनों समय से पहुंच जाते तो बवाल को रोका जा सकता था। ‘अमर उजाला’ ने पुलिस वालों की लेटलतीफी को इंगित करते हुए शिद्दत से इस मामले को उठाया।
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डीआईजी अजय मोहन शर्मा ने पूरे मामले में संज्ञान लिया और अपने स्तर से जांच कराई। जांच में पता चला कि इंस्पेक्टर तीन घंटे और दरोगा दो घंटे लेट पहुंचे थे। एसएसपी बबलू कुमार ने बताया कि डीआईजी ने दोनों को सस्पेंड कर दिया है। इस पूरे प्रकरण पर जांच भी बैठा दी गई है।
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तीन थाने और पांच चौकियां भी जांच के दायरे में
गायों से लदा ट्रक आगरा से मथुरा तक तीन थाने और पांच चौकियों को पार करके चौमुंहा तक पहुंचा था। जबकि हर थाना और चौकी क्षेत्र में चेकिंग बैरियर लगा हुआ है। अब बड़ा सवाल यह है कि पुलिस वालों को इतना बड़ा ट्रक नजर क्यों नहीं आया।
पुलिस का मुखबिर तंत्र फेल, नहीं पता चला गोतस्करों का
अभी तक पुलिस यह पता नहीं कर सकी है कि इन गायों को कहां से लाया जा रहा था और कहां ले जा रहे थे। अगर पुलिस की जांच इसी रफ्तार से चलती रही तो यह केस भी पुलिस की जीडी में ही दम तोड़ देगा। मामले में पुलिस के मुखबिर तंत्र के फेल होने की बात भी सामने आ रही है।