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Mathura News: कोषागार घोटाले के आरोपी ने थाने में किया सरेंडर
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अभिषेक श्रीवास्तव।
मथुरा। जिला कोषागार में 1.62 करोड़ रुपये के घोटाले के आरोपी व चार माह से लापता सहायक लेखाकार अभिषेक श्रीवास्तव ने पुलिस को ठेंगा दिखाते हुए फिल्मी स्टाइल में सदर थाने में पहुंचकर सरेंडर कर दिया। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। वहीं पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं कि चार माह बाद भी प्रकरण की विवेचना लंबित है।
सहायक लेखाकार अभिषेक श्रीवास्तव पर आरोप है कि वह 2020 से छह मृत पेंशनरों के फर्जी जीवित प्रमाण पत्र लगाकर अपने बैंक खाते में पेंशन की रकम ट्रांसफर करता रहा। महालेखाकार (एजी) पेंशन प्रयागराज की टीम की जांच में यह खेल पकड़ में आया था। अपर निदेशक (एडी) पेंशन, आगरा महिमा चंद्र की जांच में 1.62 करोड़ का घोटाला सामान आया। जांच की भनक लगने के बाद 24 जनवरी से सहायक लेखाकार लापता हो गया।
जांच के बाद कोषागार के अधिकारियों ने उसके खिलाफ सदर बाजार थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उसी समय से पुलिस उसकी गिरफ्तारी में जुटी थी। इधर आरोपी पुलिस को धता बताते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट से 26 अप्रैल को गिरफ्तारी पर स्टे ले आया। कोर्ट ने एक माह का समय देते हुए उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। स्टे का समय समाप्त होने के एक दिन पहले 25 मई को सहायक लेखाकार थाने पहुंच गया। यहां पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। सीओ सिटी आशना चौधरी ने बताया कि अभिषेक श्रीवास्तव को न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया है। प्रकरण की जांच जारी है।
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विवेचना में बरती लापरवाही
-मामले में पुलिस ने लापरवाही बरती। वह घोटाले कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करना भूल गई। चार माह बाद भी पुलिस मामले की विवेचना में जुटी हुई है, जबकि कोषागार के अधिकारियों व कर्मचारियों ने समय से पुलिस को दस्तावेज उपलब्ध करा दिए थे।
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22 लाख की हुई रिकवरी
-थाना प्रभारी अजीत सिंह का कहना कि जांच के साथ अब तक 22 लाख रुपये से अधिक की रिकवरी कर ली है। सहायक लेखाकार के रिश्तेदारों के बैंक खातों से पैसे रिकवर कराए गए हैं, जिसे नियमानुसार कोषागार में जमा कराया गया है। बाकी रकम रिकवरी की प्रक्रिया जारी है।
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सहायक लेखाकार अभिषेक श्रीवास्तव पर आरोप है कि वह 2020 से छह मृत पेंशनरों के फर्जी जीवित प्रमाण पत्र लगाकर अपने बैंक खाते में पेंशन की रकम ट्रांसफर करता रहा। महालेखाकार (एजी) पेंशन प्रयागराज की टीम की जांच में यह खेल पकड़ में आया था। अपर निदेशक (एडी) पेंशन, आगरा महिमा चंद्र की जांच में 1.62 करोड़ का घोटाला सामान आया। जांच की भनक लगने के बाद 24 जनवरी से सहायक लेखाकार लापता हो गया।
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जांच के बाद कोषागार के अधिकारियों ने उसके खिलाफ सदर बाजार थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उसी समय से पुलिस उसकी गिरफ्तारी में जुटी थी। इधर आरोपी पुलिस को धता बताते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट से 26 अप्रैल को गिरफ्तारी पर स्टे ले आया। कोर्ट ने एक माह का समय देते हुए उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। स्टे का समय समाप्त होने के एक दिन पहले 25 मई को सहायक लेखाकार थाने पहुंच गया। यहां पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। सीओ सिटी आशना चौधरी ने बताया कि अभिषेक श्रीवास्तव को न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया है। प्रकरण की जांच जारी है।
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विवेचना में बरती लापरवाही
-मामले में पुलिस ने लापरवाही बरती। वह घोटाले कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करना भूल गई। चार माह बाद भी पुलिस मामले की विवेचना में जुटी हुई है, जबकि कोषागार के अधिकारियों व कर्मचारियों ने समय से पुलिस को दस्तावेज उपलब्ध करा दिए थे।
22 लाख की हुई रिकवरी
-थाना प्रभारी अजीत सिंह का कहना कि जांच के साथ अब तक 22 लाख रुपये से अधिक की रिकवरी कर ली है। सहायक लेखाकार के रिश्तेदारों के बैंक खातों से पैसे रिकवर कराए गए हैं, जिसे नियमानुसार कोषागार में जमा कराया गया है। बाकी रकम रिकवरी की प्रक्रिया जारी है।