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मधुमास रचाना फूलों में सबको आता है.....

Sun, 14 Sep 2014 05:30 AM IST
Mathura
Mathura Updated Sun, 14 Sep 2014 05:30 AM IST
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मथुरा। श्रीअरविंद की दिव्य आराधना की अनुभूति और सरस काव्यधारा का प्रवाह, अमरनाथ विद्याश्रम शनिवार को दोहरे आनंद से सराबोर रहा। अवसर था हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर काव्य गोष्ठी और साहित्यकारों के सम्मान समारोह के आयोजन का। इसमें मां वाणी की वंदना के बाद गीत, छंद और गजल ने ऐसा समां बांधा कि विद्यार्थियों के साथ शहर का प्रबुद्ध वर्ग भी करतल ध्वनि को रोक नहीं पाया।
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कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि जिलाधिकारी बी चंद्रकला, अमर उजाला के स्थानीय संपादक राजेंद्र त्रिपाठी ने मां सरस्वती और श्रीअरविंद के चित्रपट के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर किया। जिलाधिकारी ने कहा कि हिंदी ऐसी भाषा है जिसे पूरा देश समझता है। इसके बाद कवियों ने रचनाओं के रंग बिखेरे।
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वरिष्ठ कवि ललित मोहन वाजपेयी ने ‘मधुमास रचाना फूलों में सबको आता है, शूलों का काम वेदना देना होता है, जो शूलों से खेलकर मधुमास बुला लेते हैं, सच्चा जीवन जीना उन्हीं को आता है।’ सुनाकर समारोह को गरिमा प्रदान की। दिल्ली से आए कवि प्रवीण शुक्ल ने ‘जहां तक भी खुला आसमां बाकी है, मुझे पता है मेरी उड़ान बाकी है...’ सुनाया और बेशुमार तालियां बटोरीं। इसके बाद गठबंधन की राजनीति पर व्यंग्य रचना पढ़ी। कवयित्री तुषा शर्मा की गजल ‘वक्त के साथ जो मुश्किल कोई टल जाएगी, इसका मतलब नहीं तकदीर तेरी बदल जाएगी। सोच कर दोगे मुहब्बत का जवाब, इतने अरसे में तो दुनिया बदल जाएगी’ ने माहौल को रूमानी किया। कानपुर से आए कवि प्रमोद तिवारी ने ‘राहों में भी कुछ रिश्ते बन जाते हैं, ये रिश्ते भी मंजिल तक जाते हैं, आओ तुमको हम एक गीत सुनाते हैं, रिश्तों की खुशबू से नहलाते हैं।’ सुनाकर वाहवाही लूटी। विख्यात शायरा शबीना अदीब ने पढ़ा कि ‘इश्क भी लोग तिजारत की तरह करते हैं, हम यही काम इबादत की तरह करते हैं, जिनको दौलत से ज्यादा प्यारा कुछ भी नहीं, वो इश्क भी सियासत की तरह करते हैं।’ आखिर में कवयित्री नूतन कपूर ने राधा-कृष्ण के प्रेम रस में डूबे छंदों से काव्य संध्या को शीर्ष पर पहुंचा दिया। ऊधौ गोपी संवाद बताते हुए कहा कि ‘ये भी कायदा है कोई वायदा पूरा किया नहीं, भेजौ एक दूत जो दुश्मन सा लगता है।’
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इससे पूर्व विद्यालय के छात्र रितम वाजपेयी ने सिकंदर पुरु युद्ध पर लिखी गई कवि राजीव दीक्षित की कविता को अपनी शैली में श्रोताओं तक पहुंचाया। छात्रा प्रिया वाजपेयी ने रामधारी सिंह दिनकर द्वारा रचित रश्मिरथी की पंक्तियां पढ़ीं। सभी कवियों का विद्यालय के प्राचार्य डा. आदित्य वाजपेयी, प्रशासनिक अधिकारी अरुण वाजपेयी, डा. अनिल वाजपेयी, अनुराग वाजपेयी आदि ने सम्मान किया। इस अवसर पर ललित मोहन वाजपेयी, अनंत स्वरूप देशभक्त, कृष्ण कन्हाई चित्रकार, एसडीएम विश्वभूषण मिश्रा आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।



सबके दिल में उतरी ब्रज विरासत की मुहिम-डीएम
मथुरा। हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित काव्य गोष्ठी मेंमुख्य अतिथि डीएम बी चंद्रकला ने अमर उजाला के प्रयासों की मुक्त कंठ से सराहना की। कहा कि ‘बेटी ही बचायेगी’ अभियान को पूरे देश ने नमन किया है। अब ब्रज विरासत को बचाने की मुहिम सबके हृदय में उतर गई है। अपने संबोधन में डीएम ने बेटियों को हर क्षेत्र में आगे बढ़ने को प्रेरित किया। अमरनाथ विद्या आश्रम में गुरु-शिष्य परंपरा को जीवंत बनाए रखने की भी सराहना की। इस अवसर पर अमरनाथ विद्या आश्रम प्रबंधन ने उन्हें ‘प्रशासनिक उत्कृष्टता सम्मान’ से नवाजा।
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