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‘जीवन दायिनी’ में प्राण वायु की कमी
Mathura
Updated Tue, 20 Nov 2012 12:00 PM IST
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अजय खंडेलवा/मथुरा।
जीवन दायिनी यमुना प्राणवायु की कमी से जूझ रही है। यमुना के जल में प्रति लीटर ऑक्सीजन की मात्र मानक से आधी रह गई है। एक माह में तेजी से आई गिरावट ने न केवल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के होश उड़ा दिए हैं वरन यमुना प्रदूषण को लेकर सरकारों की सोच पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आक्सीजन की कम मात्रा के बाद जलचरों के जीवन पर भी संकट गहरा गया है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मॉनिटरिंग सेल द्वारा मथुरा जनपद में प्रवेश वाले बिंदु शाहपुर में लिए गए नमूनों में इस बात का खुलासा हुआ है। अक्तूबर माह की रिपोर्ट में पीएच वेल्यू 7.20 तथा यमुना में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा 6.2 मिलीग्राम प्रति लीटर मापी गई।
वहीं नवंबर माह में लिए गए नमूनों की रिपोर्ट चौंकाने वाली रही है। इन नमूनों के परीक्षण में पीएच वेल्यू तो 7.10 मानक के अनुसार ही है। लेकिर यमुना में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा घटकर 1.8 मिलीग्राम प्रति लीटर रह गई है। जो न्यूनतम मानक 4 मिलीग्राम प्रति लीटर से 2.2 कम है। विज्ञानी इसे चिंता का विषय बताते हुए इसे जलचरों के जीवन पर संकट मान रहे हैं।
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न्यायालय की फटकार का भी असर नहीं
मथुरा (ब्यूरो)। यमुना प्रदूषण को लेकर उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालय द्वारा दिल्ली, हरियाणा और यूपी की सरकारों को न केवल फटकार लगाई जा रही है वरन संबधित विभागों को भी तलब किया जा रहा है। बावजूद इसके अफसर बेपरवाह हैं। यमुना में घुलित ऑक्सीजन की कमी की वजह हरियाणा और दिल्ली से गिर रहे सीवर, केमिकल युक्त पानी को माना जा रहा है।
‘शाहपुर में नमूनों की रिपोर्ट से स्पष्ट है यमुना में ऑक्सीजन की कमी की वजह हरियाणा और दिल्ली मेें गिर रहे सीवर, कैमिकल युक्त जल है। ऑक्सीजन की ये मात्रा जलचरों के जीवन के लिये पर्याप्त नहीं है।
- डा.अरविंद कुमार
वरिष्ठ विज्ञानी, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, मथुरा।
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जीवन दायिनी यमुना प्राणवायु की कमी से जूझ रही है। यमुना के जल में प्रति लीटर ऑक्सीजन की मात्र मानक से आधी रह गई है। एक माह में तेजी से आई गिरावट ने न केवल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के होश उड़ा दिए हैं वरन यमुना प्रदूषण को लेकर सरकारों की सोच पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आक्सीजन की कम मात्रा के बाद जलचरों के जीवन पर भी संकट गहरा गया है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मॉनिटरिंग सेल द्वारा मथुरा जनपद में प्रवेश वाले बिंदु शाहपुर में लिए गए नमूनों में इस बात का खुलासा हुआ है। अक्तूबर माह की रिपोर्ट में पीएच वेल्यू 7.20 तथा यमुना में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा 6.2 मिलीग्राम प्रति लीटर मापी गई।
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वहीं नवंबर माह में लिए गए नमूनों की रिपोर्ट चौंकाने वाली रही है। इन नमूनों के परीक्षण में पीएच वेल्यू तो 7.10 मानक के अनुसार ही है। लेकिर यमुना में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा घटकर 1.8 मिलीग्राम प्रति लीटर रह गई है। जो न्यूनतम मानक 4 मिलीग्राम प्रति लीटर से 2.2 कम है। विज्ञानी इसे चिंता का विषय बताते हुए इसे जलचरों के जीवन पर संकट मान रहे हैं।
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न्यायालय की फटकार का भी असर नहीं
मथुरा (ब्यूरो)। यमुना प्रदूषण को लेकर उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालय द्वारा दिल्ली, हरियाणा और यूपी की सरकारों को न केवल फटकार लगाई जा रही है वरन संबधित विभागों को भी तलब किया जा रहा है। बावजूद इसके अफसर बेपरवाह हैं। यमुना में घुलित ऑक्सीजन की कमी की वजह हरियाणा और दिल्ली से गिर रहे सीवर, केमिकल युक्त पानी को माना जा रहा है।
‘शाहपुर में नमूनों की रिपोर्ट से स्पष्ट है यमुना में ऑक्सीजन की कमी की वजह हरियाणा और दिल्ली मेें गिर रहे सीवर, कैमिकल युक्त जल है। ऑक्सीजन की ये मात्रा जलचरों के जीवन के लिये पर्याप्त नहीं है।
- डा.अरविंद कुमार
वरिष्ठ विज्ञानी, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, मथुरा।