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...पवन प्रचंड बहत है प्यारी देहु रजाई आंचल आड़ौ

Sat, 17 Nov 2012 12:00 PM IST
Mathura
Mathura Updated Sat, 17 Nov 2012 12:00 PM IST
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बरबस तनहिं कंपावत जाड़ौ। पवन प्रचंड बहत है प्यारी देहु रजाई आंचल आड़ौ। ब्रज के आराध्य ठाकुरजी भी जाड़े में कांपते हैं। शीत पवन का वेग उन्हें भी हेमंत ऋतु की गुलाबी सर्दी में कंपकपाता है। ऐसे में श्रद्धा और समर्पण के वशीभूत भक्त रसिक अपने आराध्य को गर्म वस्त्रों और श्रद्धा की तपन से तपाते हैं।
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राजीव अग्रवाल/वृंदावन।
उत्तर भारत में ठंडक की दस्तक के साथ जहां घरों में स्वेटर और रजाइयां निकल आई हैं, वहीं ब्रज के प्राचीन मंदिरों में ठाकुरजी को ठंड से बचाने के लिए तरह-तरह के जतन शुरू कर दिए गए हैं। ठाकुरजी को भाव सेवा के अंतर्गत सेवायतों एवं भक्तों द्वारा गुलाबी ठंड में ऊनी पोशाक पहनाए जा रहे हैं तो हल्की रजाइयों में सुलाया जा रहा है। ब्रज में अपने आराध्य के प्रति भक्तों की यह अनूठी भाव सेवा देखते ही बन रही है।
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ब्रज भक्ति की मान्यता के अनुसार भगवान भक्तों की भावनाओं के वशीभूत हैं। इसी भाव से भक्त अपने आराध्य को खूब रिझाते और लाड़ लड़ाते हैं। इसी सामीप्य और समर्पण के भाव से परिपूर्ण हो रसिक आचार्य और भक्त परंपरागत रूप से अपने इष्ट के प्रति आत्मीय भाव रखते आए हैं। उसी भक्तिपूर्ण आत्मीय भाव से ओतप्रोत हो आज भी ठाकुुर केे श्रीविग्रहों की विधिपूर्वक सेवा अनवरत रूप से जारी है। भाव सेवा के तहत श्रद्धालुओं द्वारा अपने आराध्य को ठंड से बचाने के वे सारे प्रयास किए जाते हैं जो एक प्रेमी प्रियतम के लिए, दास स्वामी के लिए और सखा सखा के लिए करता है।
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ठाकुरजी के ऊनी पोशाकों से सजे बाजार
वृंदावन। ठाकुरजी के ऊनी वस्त्रों की विस्तृत क्वालिटी और रेंज बाजार में उपलब्ध है। जिन्हें खरीदने के लिए श्रद्धालुओं में उत्सुकता और श्रद्धा का भाव देखा जा सकता है। पोशाक व्यवसायी लेखराज, विष्णु अग्रवाल, लालजी शर्मा, मुन्नालाल अग्रवाल, महेश अग्रवाल, विनय अग्रवाल ने बताया कि ऊनी पोशाकों को तैयार करने का सिलसिला ठंड के आगमन से पहले ही शुरू हो जाता है। ठाकुरजी की ऊनी पोशाकें 10 रुपये से लेकर 50 हजार रुपये तक की कीमत में उपलब्ध हैं।

10 करोड़ का होगा कारोबार
वृंदावन। वृंदावन का ऊनी वस्त्र उद्योग लगातार वृद्धि दर्ज कर रहा है। पोशाक निर्माण उद्योग एक कुटीर उद्योग के रूप में बाजार का रूप ले रहा है। ऊनी वस्त्र विक्रेताओं को इस वर्ष लगभग 10 करोड़ का कारोबार होने की उम्मीद है। स्थानीय के साथ-साथ देशी विदेशी और एनआरआई भक्त इस उद्योग के बड़े ग्राहक हैं।


कश्मीरी पशमीने और जालंधर की पोशाक की मांग
वृंदावन (ब्यूरो)। भक्त अपने आराध्य की सेवा में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहते। इसी के चलते ठाकुरजी को कड़ाके की ठंड से बचाने के लिए अभी से इंतजाम शुरू कर दिए गए हैं। कश्मीरी पश्मीने और जालंधर की गर्म पोशाकों की बाजार में डिमांड है।
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