{"_id":"2-48395","slug":"Mathura-48395-2","type":"story","status":"publish","title_hn":"शहर की सरकार का कालिंदी पर सितम ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शहर की सरकार का कालिंदी पर सितम
Mathura
Updated Sun, 11 Nov 2012 12:00 PM IST
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शहर की सरकार ही कालिंदी पर सितम ढा रही है। लोगों ने जिन्हें यमुना मैया की रक्षा के लिए चुना था, वो ही मां का गला घोटने पर उतारू हैं। नगर पालिका मथुरा और वृंदावन नालों का 30 एमएलडी (मेगा लीटर पर डे) गंदा पानी और सीवर सीधे यमुना में उडे़ल रही हैं। इसे नियंत्रित करने के किए गए उपायों को निष्प्रभावी कर दिया गया है। जनता द्वारा चुनी गईं संस्थाओं की ये करतूत जहां लाखों यमुना भक्तों की धार्मिक आस्था पर चोट कर रही हैं, वहीं शहरवासी छला हुआ महसूस कर रहे हैं।
अमर उजाला ब्यूरो
मथुरा। वृंदावन की स्थिति पर गौर करें तो यहां 4.5 एमएलडी उत्सर्जित गंदे पानी को पालिका सीधे यमुना में गिरने से रोकने में नाकाम हो रही है। पागल बाबा स्थित एसटीपी सिल्ट से अटा है। लाइन टूटी पड़ी है। कालीदह एसटीपी को जल निगम ने तोड़ दिया है। ऐसे में वृंदावन का संपूर्ण गंदा पानी यमुना में सीधे बह रहा है। इससे बुरी स्थिति मथुरा की है। यहां 25 से 30 एमएलडी नालों का पानी सीधे यमुना में उडे़ला जा रहा है। रात को पंप चलते नहीं हैं। जनरेटर खराब है। अनेक पंप खराब हैं, जो सही हैं उन्हें चलाया नहीं जाता है।
इसी सप्ताह एडीएम प्रशासन अवधेश तिवारी नगर पालिका मथुरा की यमुना के प्रति निष्क्रियता देख ही चुके हैं। उन्हें बंगालीघाट पंपिंग स्टेशन पर नालों का पानी सीधे यमुना में गिरते मिला। यहां पांच में से एक खराब था तो चलते दो ही पंप मिले। डेरीफार्म पंपिंग स्टेशन पर छह में से तीन पंप खराब थे। उपयोग सिर्फ एक का हो रहा था। यहां भी नालों का गंदा पानी सीधे यमुना में जा रहा था।
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मसानी पंपिंग स्टेशन पर तो नालों का पानी पंप की ओर जाने के बजाए सीधे यमुना में गिर रहा था। यहां से शहर का 48 फीसदी गंदा पानी यमुना में गिरता है। मथुरा-वृंदावन नगर पालिकाओं की यमुना के प्रति ये निष्क्रियता ही एक बार फिर यमद्वितीया पर लाखों भक्तों को सीवरयुक्त यमुना जल में डुबकी लगाने को मजबूर कर रही है।
चेयरमैन और ईओ पर चल रहा मुकदमा
यमुना में नालों का पानी नियंत्रित न करने के लिए मथुरा नगर पालिका के अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज है। लखनऊ खंडपीठ में यह मामला चल रहा है।
1.5 करोड़ फूंक रहीं पालिकाएं
यमुना में नालों का पानी गिरने से रोकने के लिए मथुरा और वृंदावन की नगर पालिकाएं करीब 1.5 करोड़ रुपये प्रति वर्ष फूंक रही हैं। इसके बाद भी गंदा पानी सीधे यमुना में जा रहा है, जो पालिका प्रशासन पर तमाम सवाल खडे़ करता है।
क्या है इनकी राय
पालिका की संवेदनाएं मर चुकी हैं। नगर पालिकाएं वाईएपी का संचालन ही ईमानदारी से करा दे तो यमुना को काफी हद तक प्रदूषण से मुक्ति मिलने में देर नहीं लगेगी।
- गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी, याची यमुना, इलाहाबाद हाईकोर्ट
मथुरा-वृंदावन नगर पालिकाएं सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना कर रही हैं। बगैर शोधन किए नालों का पानी यमुना में डाला जा रहा है। इस पर सरकारी मशीनरी और जनप्रतिनिधि सुनने को भी तैयार नहीं हैं।
- महेंद्र नाथ चतुर्वेदी, याची सुप्रीमकोर्ट, संस्थापक बृज लाइफ लाइन वेलफेयर
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अमर उजाला ब्यूरो
मथुरा। वृंदावन की स्थिति पर गौर करें तो यहां 4.5 एमएलडी उत्सर्जित गंदे पानी को पालिका सीधे यमुना में गिरने से रोकने में नाकाम हो रही है। पागल बाबा स्थित एसटीपी सिल्ट से अटा है। लाइन टूटी पड़ी है। कालीदह एसटीपी को जल निगम ने तोड़ दिया है। ऐसे में वृंदावन का संपूर्ण गंदा पानी यमुना में सीधे बह रहा है। इससे बुरी स्थिति मथुरा की है। यहां 25 से 30 एमएलडी नालों का पानी सीधे यमुना में उडे़ला जा रहा है। रात को पंप चलते नहीं हैं। जनरेटर खराब है। अनेक पंप खराब हैं, जो सही हैं उन्हें चलाया नहीं जाता है।
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इसी सप्ताह एडीएम प्रशासन अवधेश तिवारी नगर पालिका मथुरा की यमुना के प्रति निष्क्रियता देख ही चुके हैं। उन्हें बंगालीघाट पंपिंग स्टेशन पर नालों का पानी सीधे यमुना में गिरते मिला। यहां पांच में से एक खराब था तो चलते दो ही पंप मिले। डेरीफार्म पंपिंग स्टेशन पर छह में से तीन पंप खराब थे। उपयोग सिर्फ एक का हो रहा था। यहां भी नालों का गंदा पानी सीधे यमुना में जा रहा था।
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मसानी पंपिंग स्टेशन पर तो नालों का पानी पंप की ओर जाने के बजाए सीधे यमुना में गिर रहा था। यहां से शहर का 48 फीसदी गंदा पानी यमुना में गिरता है। मथुरा-वृंदावन नगर पालिकाओं की यमुना के प्रति ये निष्क्रियता ही एक बार फिर यमद्वितीया पर लाखों भक्तों को सीवरयुक्त यमुना जल में डुबकी लगाने को मजबूर कर रही है।
चेयरमैन और ईओ पर चल रहा मुकदमा
यमुना में नालों का पानी नियंत्रित न करने के लिए मथुरा नगर पालिका के अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज है। लखनऊ खंडपीठ में यह मामला चल रहा है।
1.5 करोड़ फूंक रहीं पालिकाएं
यमुना में नालों का पानी गिरने से रोकने के लिए मथुरा और वृंदावन की नगर पालिकाएं करीब 1.5 करोड़ रुपये प्रति वर्ष फूंक रही हैं। इसके बाद भी गंदा पानी सीधे यमुना में जा रहा है, जो पालिका प्रशासन पर तमाम सवाल खडे़ करता है।
क्या है इनकी राय
पालिका की संवेदनाएं मर चुकी हैं। नगर पालिकाएं वाईएपी का संचालन ही ईमानदारी से करा दे तो यमुना को काफी हद तक प्रदूषण से मुक्ति मिलने में देर नहीं लगेगी।
- गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी, याची यमुना, इलाहाबाद हाईकोर्ट
मथुरा-वृंदावन नगर पालिकाएं सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना कर रही हैं। बगैर शोधन किए नालों का पानी यमुना में डाला जा रहा है। इस पर सरकारी मशीनरी और जनप्रतिनिधि सुनने को भी तैयार नहीं हैं।
- महेंद्र नाथ चतुर्वेदी, याची सुप्रीमकोर्ट, संस्थापक बृज लाइफ लाइन वेलफेयर