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Mathura News: संकरे रास्ते से लेकर मंदिर परिसर तक में 2 साल में 6 मौतें, कब सुधरेंगे हालात

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 25 Dec 2023 12:48 AM IST
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6 deaths in 2 years from the narrow road to the temple complex, when will the situation improve?
मथुरा। मन में आराध्य के दर्शन की तमन्ना लिए पुण्य लाभ कमाने की चाहत में आने वाले छह श्रद्धालुओं को दो साल में मौत नसीब हो चुकी है। हर दफा पुलिस-प्रशासन की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़ा होता है और वह किसी व किसी कारण से फेल हो जाती हैं। पहले तो पुलिस-प्रशासन कॉरिडोर का मामला हाईकोर्ट में लंबित होने की बात कहते हुए अपना पल्ला झाड़ लेता था, मगर अब हाईकोर्ट ने भी कॉरिडोर निर्माण को मंजूरी दे दी है।
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एक माह से अधिक समय आदेश को आए हुए हो गया है, मगर अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि आखिर कब से कॉरिडोर बनना शुरू होगा। ऐसे में सवाल यह खड़ा हो गया है कि आखिर कब तक भीड़ के चलते बदइंतजामी पर यूं ही जानें जाती रहेंगी। रविवार को हुईं तो मौतों का कारण बेशक पुलिस तबीयत बिगड़ने का बता रही है, मगर मंदिर मार्ग पर श्रद्धालुओं की भीड़ को काबू करने में पुलिस-प्रशासन की व्यवस्थाएं फेल हो गईं थीं।
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रविवार को बीना गुप्ता (70) पत्नी ओम प्रकाश गुप्ता निवासी गंज बाजार, महोली, सीतापुर और मंजू मिश्रा (58) पत्नी भोलेनाथ मिश्रा निवासी अधारताल, जबलपुर, मध्य प्रदेश की मौत मंदिर मार्ग पर हुई। इससे पूर्व वर्ष 2022 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पर्व पर श्रीकृष्ण के जन्म के बाद मंगला आरती के दौरान ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं की भगदड़ मचने से नोएडा निवासी निर्मला देवी और वृंदावन के रुक्मिणी विहार निवासी रामप्रसाद विश्वकर्मा की मृत्यु हो गई थी। जबकि एक दर्जन से अधिक की तबीयत बिगड़ गई थी।
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इससे पूर्व श्रीबांके बिहारी मंदिर में 12 फरवरी 2022 को गोवर्धन रोड स्थित आनंद लोक काॅलोनी निवासी लक्ष्मण सिंह की बांकेबिहारी मंदिर में भीड़ में दम घुटने से मृत्यु हो गई। इसके एक माह बाद ही 12 मार्च 2022 को मुंबई की सतनाम सोसाइटी निवासी मधु अग्रवाल की भी भीड़ में दम घुटने से मृत्यु हुई थी।


महज 1000 भक्तों के दर्शन की एक बार में जगह, कॉरिडोर कब तक
सन 1864 में स्थापित श्रीबांकेबिहारी मंदिर में वर्तमान में हर रोज हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन करते हैं। शनिवार और रविवार को यह संख्या एक लाख के पार होती है। विशेष त्योहारों पर तो पांच लाख से अधिक श्रद्धालु एक दिन में यहां आ जाते हैं। बीती श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर पुलिस का आकलन 50 लाख का था। जबकि मंदिर परिसर के भीतर चौक का एरिया 48 वाई 48 फुट का है, जिसमें एक समय में महज एक हजार के करीब लोग ही आ पाते हैं। ऐसे में पुलिस-प्रशासन के सामने भीड़ नियंत्रण बड़ी चुनौती साबित होती है। बांके बिहारी का कॉरिडोर बनने के बाद 10 हजार लोग एक साथ दर्शन कर सकते हैं।


शासन की गाइड लाइन के इंतजार में बांकेबिहारी कॉरिडोर प्रोजेक्ट
मथुरा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 20 नवंबर को ठाकुर श्रीबांकेबिहारी के कॉरिडोर निर्माण का रास्ता साफ करते हुए देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बड़ी राहत दी, मगर हाईकोर्ट के आदेश के एक माह बाद भी धरातल पर कोई कार्रवाई शुरू नहीं हो सकी है। स्थानीय प्रशासन शासन की गाइडलाइन का इंतजार कर रहा है। श्रीबांकेबिहारी प्रोजेक्ट को लेकर अभी तक कमेटी का भी गठन नहीं हो सका है। इधर, भीड़ प्रबंधन को लेकर मंदिर के भीतर व बाहर किए गए इंतजाम भी फेल हो गए हैं। ऐसे में नव वर्ष से मकर संक्रांति तक बांके बिहारी के दर्शन को आने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ को कैसे काबू किया जाएगा यह बड़ा सवाल है।


कॉरिडोर बिहारीजी मंदिर के सामने 5.65 एकड़ क्षेत्र में प्रस्तावित है, जो जमीन की भौगोलिक स्थिति के चलते दो हिस्सों में होगा। इसे विद्यापीठ और परिक्रमा मार्ग से जोड़ा गया है। प्रस्तावित कॉरिडोर में बिहारी जी के भक्तों की प्रत्येक सुविधा का ध्यान रखा गया है। इसमें एक साथ 10 हजार लोगों की मौजूदगी हो सकेगी। इस पर करीब 505 करोड़ रुपये के खर्च का आकलन किया गया है, जिसके लिए करीब 276 से अधिक दुकान और मकानों का अधिग्रहण किया जाएगा। इसमें 149 आवासीय, 66 व्यावसायिक, 57 मिश्रित भवन हैं। हाईकोर्ट के आदेश के बाद जमीन अधिग्रहण और निर्माणों को ध्वस्त करने की कार्रवाई होनी है। मगर, अभी तक बजट का एक भी हिस्सा शासन ने नहीं भेजा है। संवाद


दो साल में इंतजाम तमाम, लेकिन हर बार फेल
21 अगस्त 2022 को मंदिर में वन-वे रूट और गेट पर बैरिकेडिंग कर दी गई। वीआईपी के लिए भी गेट संख्या दो से ही प्रवेश प्रारंभ हुआ।
22 अगस्त 2022 को मंदिर के गेट संख्या एक और दो के बीच बैरिकेडिंग, चबूतरे पर बैरिकेडिंग हुई तो सेवायतों ने विरोध किया।
24 अगस्त 2022 को मंदिर के अंदर रेलिंग व्यवस्था से श्रद्धालुओं को प्रवेश।
18 सितंबर 2022 को बाजार में रस्सी बांधकर श्रद्धालुओं को कतारबद्ध तरीके से मंदिर में प्रवेश कराया गया।
7 अक्तूबर 2022 को मंदिर की गली में दोनों ओर रेलिंग लगाईं, दुकानदारों के विरोध पर हटाईं।
14 नवंबर 2022 को श्रद्धालुओं को कतारबद्ध मंदिर में प्रवेश कराया, एक सप्ताह में व्यवस्था फेल हो गई।
19 नवंबर 2022 को मंदिर के अंदर बैरिकेडिंग, रेलिंग से होकर श्रद्धालु निकाले यह व्यवस्था भी फेल हुई।
24 नवंबर 2022 को मंदिर के अंदर बांधकर श्रद्धालुओं को कतारबद्ध तरीके फिर रेलिंग की व्यवस्था, जो कि दो दिन बाद ही फेल।
24 दिसंबर 2022 को फिर मंदिर के रास्ते में रस्सा बांधकर श्रद्धालुओं को कतारबद्ध प्रवेश, पांच जनवरी तक व्यवस्था चली।
12 अप्रैल 2023- विद्यापीठ से मंदिर तक रेलिंग में होकर श्रद्धालुओं के प्रवेश की व्यवस्था हुई, ये भी अब फेल हो रही।
17 अप्रैल 2023- बांकेबिहारी मार्केट में लगाई गई रेलिंग हटाई गईं। 10 मई को फिर लगाई गई।
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