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नाबालिग से दुष्कर्म के अभियुक्त को २० वर्ष का कठोर कारावास
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मथुरा। नाबालिग से दुष्कर्म के अभियुक्त को अदालत ने २० वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। पांच वर्ष पूर्व हुई घटना का अभियुक्त पांच वर्षीय बालिका को बेर खिलाने के लिए खेत पर ले गया और दुष्कर्म किया था। वारदात के बाद से ही आरोपी जेल में बंद है।
वृंदावन के एक गांव निवासी पांच वर्षीय नाबालिग बालिका १५ फरवरी २०१७ को नाबालिग भाई के संग घर के बाहर खेल रही थी। तभी पड़ोसी मनोज थाना वृंदावन बेर खिलाने के बहाने खेत पर ले गया। मनोज ने बालिका के संग दुष्कर्म किया। बालिका चीखी चिल्लाई। आवाज सुनकर परिजन और अन्य लोग आ गए। उन्हें देखकर युवक वहां से भाग निकला। बालिका के पिता ने उसी दिन १५ फरवरी को ही वृंदावन कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई।
पुलिस दुष्कर्म और कुकर्म दोनों की चार्जशीट अदालत मेें पेश की। केस की सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट अमर सिंह ने अभियुक्त को २० वर्ष का कठोर कारावास तथा एक लाख ६० हजार के अर्थ दंड से दंडित किया है। एडीजीसी क्रिमिनल सुभाष चतुर्वेदी तथा लोक अभियोजक रामपाल सिंह ने बताया कि अभियुक्त वारदात के बाद से ही जेल मेें है।
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जेल मेें बिताई अवधि को सजा की अवधि मेें समायोजित किया जाएगा। अभियोजन की ओर से केस में छह गवाह साक्ष्य के तौर पर पेश किए गए। अभियुक्त की ओर से दी जाने वाली धनराशि पीड़िता को दी जाएगी। अर्थ दंड अदा न करने पर छह माह का अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
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वृंदावन के एक गांव निवासी पांच वर्षीय नाबालिग बालिका १५ फरवरी २०१७ को नाबालिग भाई के संग घर के बाहर खेल रही थी। तभी पड़ोसी मनोज थाना वृंदावन बेर खिलाने के बहाने खेत पर ले गया। मनोज ने बालिका के संग दुष्कर्म किया। बालिका चीखी चिल्लाई। आवाज सुनकर परिजन और अन्य लोग आ गए। उन्हें देखकर युवक वहां से भाग निकला। बालिका के पिता ने उसी दिन १५ फरवरी को ही वृंदावन कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई।
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पुलिस दुष्कर्म और कुकर्म दोनों की चार्जशीट अदालत मेें पेश की। केस की सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट अमर सिंह ने अभियुक्त को २० वर्ष का कठोर कारावास तथा एक लाख ६० हजार के अर्थ दंड से दंडित किया है। एडीजीसी क्रिमिनल सुभाष चतुर्वेदी तथा लोक अभियोजक रामपाल सिंह ने बताया कि अभियुक्त वारदात के बाद से ही जेल मेें है।
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जेल मेें बिताई अवधि को सजा की अवधि मेें समायोजित किया जाएगा। अभियोजन की ओर से केस में छह गवाह साक्ष्य के तौर पर पेश किए गए। अभियुक्त की ओर से दी जाने वाली धनराशि पीड़िता को दी जाएगी। अर्थ दंड अदा न करने पर छह माह का अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।