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नहर में डूबकर दो किशोरों की मौत
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Thu, 28 May 2015 11:58 PM IST
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गांव धमसींगा में दो किशोरों टिंकू (15) और सचिन (12) की नहर में डूबने से मौत हो गई। वृंदावन से पहुंचे गोताखोरों ने शवों को बाहर निकाला।
टिंकू पुत्र गोविंदराम, सचिन पुत्र राजेंद्र अपने दोस्त भूषण, विपिन, ओमप्रकाश, नीरज, बंटी के साथ गुरुवार की सुबह दस बजे आगरा नहर में नहाने के लिए गए थे। नहाने के दौरान भूषण और सचिन नहर के बीच चले गए और दलदल में फंसकर डूबने लगे। टिंकू ने दोनों को बचाने पहुंचा।
भूषण को उसने पकड़कर खींच लिया और किनारे की ओर धकेल दिया। इसके बाद सचिन का हाथ पकड़कर उसे खींचने का प्रयास किया लेकिन स्वयं दलदल में फंस गया। देखते ही देखते दोनों डूब गए।
वहां से गुजर रहे ग्रामीण ओमप्रकाश ने घटना के बारे में गांव जाकर जानकारी दी। सूचना पर बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। टिंकू और सचिन को नहर में तलाश किया गया। इसी बीच एसडीएम रामअरज यादव, सीओ छाता अतुल कुमार श्रीवास्तव फोर्स के साथ पहुंच गए। तीन घंटे तक तलाश के बाद भी दोनों नहीं मिले तो वृंदावन से गोताखोरों की टीम बुलाई गई। गोताखोरों ने आधा घंटे की मशक्कत के बाद सचिन और टिंकू के शव को बाहर निकाला।
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तैरना नहीं जानता था टिंकू
कोसीकलां। शोक के क्षण में टिंकू के साहस की ही चर्चा थी। टिंकू ने अपने दोस्त सचिन को बचाने का भरसक प्रयास किया। अन्य बच्चों ने बताया कि टिंकू ने भूषण को किनारे की ओर धकेल दिया। लेकिन सचिन की जान बचाते-बचाते स्वयं काल के गाल में समा गया। बताया गया कि टिंकू को तैरना नहीं आता था। पिता गोविंदराम ने बताया कि उसका कल ही 11 वीं में दाखिला कराया था। पांच बहन-भाइयों में सबसे बड़े टिंकू के परिवार की माली हालत भी ठीक नहीं है। टिंकू को पढ़ा-लिखाकर कुछ बनाने की इच्छा थी। कर्ज लेकर उसका दाखिला कराया था, पर ऊपर वाले को यही मंजूर था। हाईस्कूल में प्रथम श्रेणी से पास हुआ टिंकू बेहद हिम्मती था।
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टिंकू पुत्र गोविंदराम, सचिन पुत्र राजेंद्र अपने दोस्त भूषण, विपिन, ओमप्रकाश, नीरज, बंटी के साथ गुरुवार की सुबह दस बजे आगरा नहर में नहाने के लिए गए थे। नहाने के दौरान भूषण और सचिन नहर के बीच चले गए और दलदल में फंसकर डूबने लगे। टिंकू ने दोनों को बचाने पहुंचा।
भूषण को उसने पकड़कर खींच लिया और किनारे की ओर धकेल दिया। इसके बाद सचिन का हाथ पकड़कर उसे खींचने का प्रयास किया लेकिन स्वयं दलदल में फंस गया। देखते ही देखते दोनों डूब गए।
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वहां से गुजर रहे ग्रामीण ओमप्रकाश ने घटना के बारे में गांव जाकर जानकारी दी। सूचना पर बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। टिंकू और सचिन को नहर में तलाश किया गया। इसी बीच एसडीएम रामअरज यादव, सीओ छाता अतुल कुमार श्रीवास्तव फोर्स के साथ पहुंच गए। तीन घंटे तक तलाश के बाद भी दोनों नहीं मिले तो वृंदावन से गोताखोरों की टीम बुलाई गई। गोताखोरों ने आधा घंटे की मशक्कत के बाद सचिन और टिंकू के शव को बाहर निकाला।
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तैरना नहीं जानता था टिंकू
कोसीकलां। शोक के क्षण में टिंकू के साहस की ही चर्चा थी। टिंकू ने अपने दोस्त सचिन को बचाने का भरसक प्रयास किया। अन्य बच्चों ने बताया कि टिंकू ने भूषण को किनारे की ओर धकेल दिया। लेकिन सचिन की जान बचाते-बचाते स्वयं काल के गाल में समा गया। बताया गया कि टिंकू को तैरना नहीं आता था। पिता गोविंदराम ने बताया कि उसका कल ही 11 वीं में दाखिला कराया था। पांच बहन-भाइयों में सबसे बड़े टिंकू के परिवार की माली हालत भी ठीक नहीं है। टिंकू को पढ़ा-लिखाकर कुछ बनाने की इच्छा थी। कर्ज लेकर उसका दाखिला कराया था, पर ऊपर वाले को यही मंजूर था। हाईस्कूल में प्रथम श्रेणी से पास हुआ टिंकू बेहद हिम्मती था।