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Mathura News: श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति के लिए जुटेंगे 10 हजार कोल और भील

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 23 Sep 2026 12:42 AM IST
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10,000 Kol and Bhil tribals to mobilize for the liberation of Shri Krishna Janmabhoomi
महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट के नेतृत्व में यात्रा का समर्थन करते संत व ग्रामीण। 
मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मभूमि की पूर्ण मुक्ति और मूल गर्भगृह की वापसी के संकल्प के साथ चित्रकूट से शुरू हुई संकल्प यात्रा सोमवार को मथुरा पहुंची। सलेमपुर रोड स्थित केडीएस इंटरनेशनल स्कूल में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष व हिंदू पक्षकार एडवोकेट महेंद्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में यात्रा का स्वागत किया गया। इस अवसर पर स्वामी हरिनारायण दास महाराज ने कहा कि आगामी 16 नवंबर को 10 हजार कोल-भील जनजाति के लोगों के साथ मथुरा में बड़ा और ऐतिहासिक आंदोलन किया जाएगा।
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चित्रकूट से 19 सितंबर को रवाना हुई यह यात्रा विभिन्न शहरों से होकर मथुरा की सीमा में दाखिल हुई। स्वागत सभा के दौरान माहौल पूरी तरह धर्ममय रहा और ‘आ गए हैं अवध बिहारी, अब आएंगे कृष्ण मुरारी’ के गगनभेदी नारे गूंजते रहे। यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी भी देखने को मिली।
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सभा को संबोधित करते हुए हिंदू पक्षकार महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि का मुद्दा अब केवल स्थानीय नहीं रहा, बल्कि देश-विदेश के कोने-कोने तक पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि न्यायालय में मूल गर्भगृह की कानूनी लड़ाई पूरी मजबूती से लड़ी जा रही है। इसके लिए दुनियाभर से जुटाए गए ऐतिहासिक साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए हैं। इतिहास गवाह है कि इस पवित्र मंदिर को कई बार ध्वस्त किया गया, लेकिन अब हिंदू समाज अपने आराध्य के मूल गर्भगृह को वापस लेकर रहेगा। इसका श्रद्धालुओं ने हाथ उठाकर समर्थन किया।
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भगवान बिरसा मुंडा सेवा संस्थान एवं सीता रसोई, चित्रकूट के अध्यक्ष स्वामी हरिनारायण दास महाराज ने कहा कि 16 नवंबर को दोबारा मथुरा पहुंचने वाली यात्रा में जनजातीय समाज की भागीदारी निर्णायक होगी। इस घोषणा के बाद पूरा प्रांगण तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

संवेदनशील मुद्दे और मथुरा में बड़े जमावड़े की घोषणा को देखते हुए पुलिस-प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर नजर आया। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर एसडीएम सदर, सीओ रिफाइनरी और थाना हाइवे प्रभारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर तैनात रहे। लोकल इंटेलिजेंस की टीम भी यात्रा की हर गतिविधि पर लगातार नजर बनाए हुए थी। 23 सितंबर को अपने गंतव्य पर समाप्त होने वाली यह यात्रा मथुरा में एक नए जनांदोलन की नींव रख गई है। इस दाैरान राधाकुंड के संत कृष्ण दासजी महाराज, सुंदरिया, मालती, अशोक प्रताप सिंह, जितेंद्र सिंह, ब्रज बिहारी, रामवती, मनोज, महेश, राजीव शर्मा, भगत सिंह, त्रिलोकी, लाखन सिंह आदि मौजूद रहे।
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