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निमोनिया और डायरिया से दो की मौत
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी
Updated Wed, 23 Nov 2016 11:38 PM IST
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निमोनिया और डायरिया से दो की मौत
- फोटो : अमर उजाला
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ठंड बढ़ते ही बीमारियों का प्रकोप भी बढ़ने लगा है। जिला अस्पताल में निमोनिया और डायरिया की चपेट में आने से दो रोगियों की मौत हो गई। सौ से अधिक रोगियों को चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार देकर छुट्टी दे दी।
थाना कोतवाली क्षेत्र के आगरा रोड निवासी नवीन कुमार (45) पुत्र बच्चन लाल को उल्टी दस्त होने लगे। हालत बिगड़ने पर परिवारीजन नवीन कुमार को जिला अस्पताल ले गए। वहां चिकित्सकों ने डायरिया से गंभीर हालत बताते हुए उपचार शुरू कर दिया। इलाज के दौरान नवीन कुमार की मौत हो गई। थाना भोगांव क्षेत्र के नगला भगत निवासी राघवेंद्र (नौ माह) पुत्र चरन सिंह को सांस लेने में परेशानी होने लगी। परिवारीजन राघवेंद्र को जिला अस्पताल लाए। वहां चिकित्सकों ने निमोनिया से पीड़ित बताते हुए उपचार शुरू कर दिया। जिला अस्पताल में राघवेंद्र की मौत हो गई।
जिला अस्पताल में बुधवार को बुखार, डायरिया और निमोनिया से पीड़ित होने पर करीब एक दर्जन से अधिक रोगी जिला अस्पताल पहुंचे। वहां चिकित्सकों ने जांच कराकर उपचार देकर परहेज बरतने की सलाह दी। आपातकालीन चिकित्साधिकारी डा. पीके झा का कहना है कि रोगियों को बीमार होने पर तत्काल चिकित्सक से उपचार लेना चाहिए। इधर-उधर उपचार कराने से कई रोगियों की हालत इतनी गंभीर हो जाती है कि कुशल चिकित्सकों को भी उन्हें स्वस्थ करने में परेशानी होती है।
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थाना कोतवाली क्षेत्र के आगरा रोड निवासी नवीन कुमार (45) पुत्र बच्चन लाल को उल्टी दस्त होने लगे। हालत बिगड़ने पर परिवारीजन नवीन कुमार को जिला अस्पताल ले गए। वहां चिकित्सकों ने डायरिया से गंभीर हालत बताते हुए उपचार शुरू कर दिया। इलाज के दौरान नवीन कुमार की मौत हो गई। थाना भोगांव क्षेत्र के नगला भगत निवासी राघवेंद्र (नौ माह) पुत्र चरन सिंह को सांस लेने में परेशानी होने लगी। परिवारीजन राघवेंद्र को जिला अस्पताल लाए। वहां चिकित्सकों ने निमोनिया से पीड़ित बताते हुए उपचार शुरू कर दिया। जिला अस्पताल में राघवेंद्र की मौत हो गई।
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जिला अस्पताल में बुधवार को बुखार, डायरिया और निमोनिया से पीड़ित होने पर करीब एक दर्जन से अधिक रोगी जिला अस्पताल पहुंचे। वहां चिकित्सकों ने जांच कराकर उपचार देकर परहेज बरतने की सलाह दी। आपातकालीन चिकित्साधिकारी डा. पीके झा का कहना है कि रोगियों को बीमार होने पर तत्काल चिकित्सक से उपचार लेना चाहिए। इधर-उधर उपचार कराने से कई रोगियों की हालत इतनी गंभीर हो जाती है कि कुशल चिकित्सकों को भी उन्हें स्वस्थ करने में परेशानी होती है।
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