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टूटा गिनीज बुक में नाम दर्ज कराने का सपना
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी
Updated Thu, 10 Nov 2016 11:35 PM IST
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रामनरेश मिश्रा जिनका सपना टूटा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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500 और 1000 रुपये के नोट बंद होने से कस्बा निवासी रामनरेश का गिनीज बुक आफ वर्ल्ड में नाम दर्ज कराने का सपना भी टूट गया। वह गुरुवार को जमा किए गए 786 नंबर वाले पांच सौ और एक हजार के नोटों को बैंक में जमा कराने पहुंचे, लेकिन भीड़ देख वापस लौट आए। अब शुक्रवार को फिर से बैंक जाएंगे।
रामनरेश मिश्रा ने वर्ष 1996 में गिनीज बुक में नाम दर्ज कराने के लिए 786 नंबर के 10, 20, 50, 100, 500, व 1000 के नोट एकत्रित करने शुरू किए थे। उनका सपना 786 नंबर के दो लाख के नोट एकत्र करके गिनीज बुक में अपना नाम दर्ज कराने का था और सोमवार की शाम तक एक लाख रुपये के नोट एकत्रित कर लिए थे। रामनरेश ने बताया पांच सौ और एक हजार के नोट बंद होने से उसकी मेहनत पर पानी फिर गया। उन्होंने बताया कि वह आज तो नोट जमा नहीं कर पाया, बैंक में भीड़ बहुत अधिक थी, अब शुक्रवार को फिर से प्रयास करेंगे।
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रामनरेश मिश्रा ने वर्ष 1996 में गिनीज बुक में नाम दर्ज कराने के लिए 786 नंबर के 10, 20, 50, 100, 500, व 1000 के नोट एकत्रित करने शुरू किए थे। उनका सपना 786 नंबर के दो लाख के नोट एकत्र करके गिनीज बुक में अपना नाम दर्ज कराने का था और सोमवार की शाम तक एक लाख रुपये के नोट एकत्रित कर लिए थे। रामनरेश ने बताया पांच सौ और एक हजार के नोट बंद होने से उसकी मेहनत पर पानी फिर गया। उन्होंने बताया कि वह आज तो नोट जमा नहीं कर पाया, बैंक में भीड़ बहुत अधिक थी, अब शुक्रवार को फिर से प्रयास करेंगे।
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