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दहशत इतनी कि बुखार भी लोग मान रहे डेंगू
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
Updated Mon, 03 Oct 2016 11:17 PM IST
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platelets, dengue
- फोटो : Demo Pic
नगर और क्षेत्र में डेंगू की बीमारी से लोग में दहशत है। डेंगू से बचाव के लिए अब लोगों ने घरेलू नुक्सों का प्रयोग करना शुरू कर दिया है। बकरी का दूध, पपीता के पत्ता, गिलोय के लिए नगर और ग्रामीण इलाकों में लोग भटक रहे हैं। वहीं घरों में मच्छरों से बचाव के लिए मच्छर रोधी कॉयल आदि का प्रयोग दिन में भी कर रहे हैं।
डेंगू की दहशत इस कदर है कि बुखार आने पर ही लोग इलाज को आगरा पहुंच रहे हैं। वहीं बहुत से लोग घरेलू नुक्सों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। सामन्य बुखार आने पर भी लोग डेंगू मानकर उपचार में जुट जाते हैं। मलेरिया, टाइफाइड आदि से पीड़ित रोगी चिकित्सकों के उपचार के साथ ही घरेलू नुक्सों को भी आजमा रहे हैं।
अधिकांश लोग बुखार से पीड़ित रोगियों को प्लेटलेट्स कम न हो जाएं इसके लिए पपीता के पत्ता, गिलोय और बकरी का दूध खोजते लोगों को देखा जा रहा है। जिला अस्पताल पर मौजूद रोगियों के तीमारदार सुरेश कुमार, सुमन देवी आदि का कहना है कि बकरी का दूध इन दिनों भैंस के दूध से कई गुनी अधिक कीमत पर मिल रहा है। मोहल्ला छपट्टी निवासी रमेश राठौर की पत्नी को चिकित्सकों ने चिकनगुनिया से पीड़ित बताया था। घरेलू उपचार से उनकी हालत में सुधार है।
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जनपद के मोहल्ला मलिक मील, खरगजीत नगर, छपट्टी, कस्बा किशनी, एलाऊ, जागीर आदि क्षेत्रों में डेंगू और चिकनगुनिया से लोग पीड़ित हैं। इन क्षेत्रों के करीब 26 रोगियों का उपचार आगरा और जनपद के निजी अस्पतालों से चल रहा है। वहीं डेंगू से पीड़ित होने पर अभी तक सात लोगों की मौत हो चुकी है।
साधरण बुखार को भी लोग डेंगू और चिकनगुनिया का बुखार समझने लगते हैं। रही प्लेटलेट्स की बात वह हो वायरल फीवर और मलेरिया में भी कम हो जाती हैं। बुखार आने पर चिकित्सक से उपचार लेना चाहिए। जिला अस्पताल और पीएचसी, सीएचसी पर डेंगू और बुखार की दवाएं पर्याप्त मात्रा में हैं। डा. केके शर्मा, सीएमओ
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डेंगू की दहशत इस कदर है कि बुखार आने पर ही लोग इलाज को आगरा पहुंच रहे हैं। वहीं बहुत से लोग घरेलू नुक्सों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। सामन्य बुखार आने पर भी लोग डेंगू मानकर उपचार में जुट जाते हैं। मलेरिया, टाइफाइड आदि से पीड़ित रोगी चिकित्सकों के उपचार के साथ ही घरेलू नुक्सों को भी आजमा रहे हैं।
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अधिकांश लोग बुखार से पीड़ित रोगियों को प्लेटलेट्स कम न हो जाएं इसके लिए पपीता के पत्ता, गिलोय और बकरी का दूध खोजते लोगों को देखा जा रहा है। जिला अस्पताल पर मौजूद रोगियों के तीमारदार सुरेश कुमार, सुमन देवी आदि का कहना है कि बकरी का दूध इन दिनों भैंस के दूध से कई गुनी अधिक कीमत पर मिल रहा है। मोहल्ला छपट्टी निवासी रमेश राठौर की पत्नी को चिकित्सकों ने चिकनगुनिया से पीड़ित बताया था। घरेलू उपचार से उनकी हालत में सुधार है।
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जनपद के मोहल्ला मलिक मील, खरगजीत नगर, छपट्टी, कस्बा किशनी, एलाऊ, जागीर आदि क्षेत्रों में डेंगू और चिकनगुनिया से लोग पीड़ित हैं। इन क्षेत्रों के करीब 26 रोगियों का उपचार आगरा और जनपद के निजी अस्पतालों से चल रहा है। वहीं डेंगू से पीड़ित होने पर अभी तक सात लोगों की मौत हो चुकी है।
साधरण बुखार को भी लोग डेंगू और चिकनगुनिया का बुखार समझने लगते हैं। रही प्लेटलेट्स की बात वह हो वायरल फीवर और मलेरिया में भी कम हो जाती हैं। बुखार आने पर चिकित्सक से उपचार लेना चाहिए। जिला अस्पताल और पीएचसी, सीएचसी पर डेंगू और बुखार की दवाएं पर्याप्त मात्रा में हैं। डा. केके शर्मा, सीएमओ