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आत्मबल को मजबूत करने की जरूरत: सतपाल महाराज
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
Updated Sun, 16 Oct 2016 11:42 PM IST
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सद्भावना सम्मेलन
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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महापुरुषों ने हमको धर्म और देश की रक्षा के लिए कायरता नहीं वीरता का पाठ पढ़ाया है। हमारा देश ऋषि मुनियों और महापुरुषों की भूमि रहा है। देश की रक्षा के लिए सपूत हंसते हंसते अपनी जान दे देते हैं। आतंकियों का हमको मुहतोड़ जबाब देना चाहिए। यह प्रवचन करहल रोड स्थित महारानी लक्ष्मीबाई इंटर कालेज के मैदान में सतपाल महाराज ने दिए।
मानव सेवा समिति के तत्वावधान में दो दिवसीय सद्भावना सम्मेलन के अंतिम दिन उन्होंने कहा आज अपना आत्म बल मजबूत करने की जरूरत है। देश में व्याप्त नकारात्मक शक्तियों को आत्म विश्वास और अंत:प्रेरणा के बल पर शिकस्त देकर समाज और राष्ट्र निर्माण में अपना उच्च आदर्श प्रस्तुत करें। देश में शिक्षा के क्षेत्र में विकास हो रहा है मगर हम स्वामी विवेकानंद, क्षत्रपति शिवाजी, महाराणा प्रताप, महारानी लक्ष्मीबाई जैसी विभूतियां पैदा नहीं कर पा रहे हैं। जिसका कारण ऋषि मुनियों और महापुरुषों के आध्यात्मवाद को भुला देना है।
आध्यात्म और सद्भावना से ही देश विश्व गुरु बन सकता है। माता अमृता ने कहा स्वच्छ और निर्मल मन बालक जैसा हृदय वाला भक्त ही परमात्मा की भक्ति और वास्तविक स्वरूप को पा सकता है। जिस तरह हम गंदे, झूठे और छेद वाले पात्र में भोजन नहीं रखते हमेशा साफ बर्तन ही तलाशते हैं उसी तरह भक्ति भी स्वच्छ, निर्मल और कुटिलता से रहित होनी चाहिए। व्यक्ति को कुसंग का त्याग करके सत्संग करना चाहिए। गुरु विभुजी ने कहा आज युवाओं में नैतिक और चारित्रिक पतन हो रहा है। आज का युवा मानवता के नाम को भी कलंकित कर रहा है। बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। महात्मा हरि संतोषानंद ने संचालन किया।
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मानव सेवा समिति के तत्वावधान में दो दिवसीय सद्भावना सम्मेलन के अंतिम दिन उन्होंने कहा आज अपना आत्म बल मजबूत करने की जरूरत है। देश में व्याप्त नकारात्मक शक्तियों को आत्म विश्वास और अंत:प्रेरणा के बल पर शिकस्त देकर समाज और राष्ट्र निर्माण में अपना उच्च आदर्श प्रस्तुत करें। देश में शिक्षा के क्षेत्र में विकास हो रहा है मगर हम स्वामी विवेकानंद, क्षत्रपति शिवाजी, महाराणा प्रताप, महारानी लक्ष्मीबाई जैसी विभूतियां पैदा नहीं कर पा रहे हैं। जिसका कारण ऋषि मुनियों और महापुरुषों के आध्यात्मवाद को भुला देना है।
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आध्यात्म और सद्भावना से ही देश विश्व गुरु बन सकता है। माता अमृता ने कहा स्वच्छ और निर्मल मन बालक जैसा हृदय वाला भक्त ही परमात्मा की भक्ति और वास्तविक स्वरूप को पा सकता है। जिस तरह हम गंदे, झूठे और छेद वाले पात्र में भोजन नहीं रखते हमेशा साफ बर्तन ही तलाशते हैं उसी तरह भक्ति भी स्वच्छ, निर्मल और कुटिलता से रहित होनी चाहिए। व्यक्ति को कुसंग का त्याग करके सत्संग करना चाहिए। गुरु विभुजी ने कहा आज युवाओं में नैतिक और चारित्रिक पतन हो रहा है। आज का युवा मानवता के नाम को भी कलंकित कर रहा है। बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। महात्मा हरि संतोषानंद ने संचालन किया।
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