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10 प्रत्याशियों ने किया नामांकन
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी
Updated Fri, 27 Jan 2017 11:46 PM IST
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10 प्रत्याशियों ने किया नामांकन
- फोटो : अमर उजाला
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नामांकन के तीसरे दिन शुक्रवार को कुल 10 प्रत्याशियों ने नामांकन पत्र दाखिल किया। इनमें से बसपा के चार, सपा के तीन और भाजपा के एक प्रत्याशी ने नामांकन किया। जबकि दो अन्य ने भी नामांकन पत्र दाखिल किया।
शुक्रवार को बसपा के चारों प्रत्याशियों ने नामांकन पत्र दाखिल किया। इनमें मैनपुरी से महाराज सिंह शाक्य, भोगांव से सुरेंद्र सिंह ने, किशनी से कमलेश कुमारी ने और करहल से दलवीर सिंह पाल ने पर्चा दाखिल किया। इस दौरान कोआर्डिनेटर दीपक पेंटर व जिलाध्यक्ष एसपीएस राणा के अलावा चारों प्रत्याशियों के प्रस्तावक भी मौजूद रहे। इसी प्रकार सपा के तीन प्रत्याशियों ने भी नामांकन किया। इनमें करहल विधानसभा से सोबरन सिंह यादव ने, भोगांव से आलोक शाक्य ने और किशनी से इंजीनियर ब्रजेश कठेरिया ने नामांकन पत्र दाखिल किया। इसके अलावा भाजपा प्रत्याशी अशोक चौहान ने दोपहर 12 बजे सदर सीट से नामांकन पत्र दाखिल किया। इसके अलावा करहल से राष्ट्रीय किसान मजदूर पार्टी से लाल कुमार ने और रजनेश ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में भोगांव सीट से नामांकन पत्र दाखिल किया। नामांकन के दौरान सभी प्रत्याशी बड़ी संख्या में समर्थकों के साथ कलक्ट्रेट पहुंचे। हालांकि कलक्ट्रेट परिसर में सिर्फ प्रत्याशियों और उनके प्रस्तावकों को ही प्रवेश करने दिया गया।
नामांकन में दिखी तल्खी
सपा के तीन प्रत्याशियों ने शुक्रवार को नामांकन पत्र दाखिल किया। इस दौरान भी पार्टी के नेताओं में दो फाड़ स्पष्ट दिखे। नामांकन के लिए सबसे पहले करहल विधायक सोबरन सिंह यादव पहुंचे। साथ में उनके समर्थक भी थे। इसके लगभग आधा घंटा बाद भोगांव विधायक आलोक शाक्य और किशनी विधायक ब्रजेश कठेरिया पहुंचे। उनके साथ सांसद तेज प्रताप सिंह यादव और एमएलसी अरविंद यादव भी थे। नामांकन के दौरान भी विधायक सोबरन सिंह ने दूसरे विधायकों और सांसद से बातचीत नहीं की। यही नहीं नामांकन के बाद सोबरन सिंह बिना सांसद का इंतजार किए चले गए। थोड़ी देर बाद शेष दोनों विधायकों के साथ सांसद बाहर आए। यही तल्खी सपा कार्यालय और बाद में कांग्रेस कार्यालय पर हुई बैठक में भी दिखी। सोबरन सिंह न तो सपा कार्यालय में ही दूसरे गुट से बोले और न ही सांसद, एमएलसी और दोनों अन्य विधायकों के साथ ही कांग्रेस कार्यालय पर आयोजित बैठक में ही गए। उल्लेखनीय है कि सोबरन सिंह शिवपाल गुट के हैं। वहीं अरविंद यादव व अन्य दोनों विधायक रामगोपाल गुट के माने जाते हैं। देखना यह है कि यह तल्खी चुनावों में क्या गुल खिलाती है।
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शुक्रवार को बसपा के चारों प्रत्याशियों ने नामांकन पत्र दाखिल किया। इनमें मैनपुरी से महाराज सिंह शाक्य, भोगांव से सुरेंद्र सिंह ने, किशनी से कमलेश कुमारी ने और करहल से दलवीर सिंह पाल ने पर्चा दाखिल किया। इस दौरान कोआर्डिनेटर दीपक पेंटर व जिलाध्यक्ष एसपीएस राणा के अलावा चारों प्रत्याशियों के प्रस्तावक भी मौजूद रहे। इसी प्रकार सपा के तीन प्रत्याशियों ने भी नामांकन किया। इनमें करहल विधानसभा से सोबरन सिंह यादव ने, भोगांव से आलोक शाक्य ने और किशनी से इंजीनियर ब्रजेश कठेरिया ने नामांकन पत्र दाखिल किया। इसके अलावा भाजपा प्रत्याशी अशोक चौहान ने दोपहर 12 बजे सदर सीट से नामांकन पत्र दाखिल किया। इसके अलावा करहल से राष्ट्रीय किसान मजदूर पार्टी से लाल कुमार ने और रजनेश ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में भोगांव सीट से नामांकन पत्र दाखिल किया। नामांकन के दौरान सभी प्रत्याशी बड़ी संख्या में समर्थकों के साथ कलक्ट्रेट पहुंचे। हालांकि कलक्ट्रेट परिसर में सिर्फ प्रत्याशियों और उनके प्रस्तावकों को ही प्रवेश करने दिया गया।
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नामांकन में दिखी तल्खी
सपा के तीन प्रत्याशियों ने शुक्रवार को नामांकन पत्र दाखिल किया। इस दौरान भी पार्टी के नेताओं में दो फाड़ स्पष्ट दिखे। नामांकन के लिए सबसे पहले करहल विधायक सोबरन सिंह यादव पहुंचे। साथ में उनके समर्थक भी थे। इसके लगभग आधा घंटा बाद भोगांव विधायक आलोक शाक्य और किशनी विधायक ब्रजेश कठेरिया पहुंचे। उनके साथ सांसद तेज प्रताप सिंह यादव और एमएलसी अरविंद यादव भी थे। नामांकन के दौरान भी विधायक सोबरन सिंह ने दूसरे विधायकों और सांसद से बातचीत नहीं की। यही नहीं नामांकन के बाद सोबरन सिंह बिना सांसद का इंतजार किए चले गए। थोड़ी देर बाद शेष दोनों विधायकों के साथ सांसद बाहर आए। यही तल्खी सपा कार्यालय और बाद में कांग्रेस कार्यालय पर हुई बैठक में भी दिखी। सोबरन सिंह न तो सपा कार्यालय में ही दूसरे गुट से बोले और न ही सांसद, एमएलसी और दोनों अन्य विधायकों के साथ ही कांग्रेस कार्यालय पर आयोजित बैठक में ही गए। उल्लेखनीय है कि सोबरन सिंह शिवपाल गुट के हैं। वहीं अरविंद यादव व अन्य दोनों विधायक रामगोपाल गुट के माने जाते हैं। देखना यह है कि यह तल्खी चुनावों में क्या गुल खिलाती है।
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