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तीन सौ साल पुुराना है मां काली का मंदिर
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
Updated Thu, 14 Apr 2016 11:28 PM IST
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मंदिर
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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नगर से लगभग 13 किलोमीटर दूर विकासखंड क्षेत्र के ग्राम रतनपुरा बरा ग्राम में मां काली का प्राचीन मंदिर है। मान्यता है कि जो भी सच्चे मन से यहां मन्नत मांगता है मां उसकी मुराद पूरी करती है।
मैनपुरी-कुसमरा मार्ग स्थित एलाऊ चौराहा से महत तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम रतनपुरबरा में मां काली का बेहद प्राचीन मंदिर है। मंदिर तक आने जाने के लिए श्रद्धालु टेंपो और निजी वाहनों से आते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्राचीन काली मंदिर का निर्माण तीन सौ साल पूर्व गांव के ही थम्मन मिश्रा के पूर्वजों ने कराया था। मां काली मंदिर पर नवरात्र में नवमी के दिन मेले का आयोजन होता है। यहां हजारों श्रद्धालु जुटते हैं। मां का आशीर्वाद लेकर दरबार में माथा टेकते हैं। मंदिर में आषाढ़ माह की पूर्णिमा पर भी मेला आयोजन होता है। मंदिर में प्रतिदिन पूजा-अर्चना होती है। मंदिर की बुर्जी की ऊंचाई करीब 40 फीट है। भक्तों के आने जाने के लिए दो दरवाजे लगे हुए हैं। जिससे श्रद्धालुओं को आवागमन में मुश्किल नहीं होती है। लोगों का कहना है कि मां काली मंदिर में पूजा अर्चना करने से काम बन जाते हैं। दूर दराज से हजारों श्रद्धालु मत्था टेकने आते हैं।
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मैनपुरी-कुसमरा मार्ग स्थित एलाऊ चौराहा से महत तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम रतनपुरबरा में मां काली का बेहद प्राचीन मंदिर है। मंदिर तक आने जाने के लिए श्रद्धालु टेंपो और निजी वाहनों से आते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्राचीन काली मंदिर का निर्माण तीन सौ साल पूर्व गांव के ही थम्मन मिश्रा के पूर्वजों ने कराया था। मां काली मंदिर पर नवरात्र में नवमी के दिन मेले का आयोजन होता है। यहां हजारों श्रद्धालु जुटते हैं। मां का आशीर्वाद लेकर दरबार में माथा टेकते हैं। मंदिर में आषाढ़ माह की पूर्णिमा पर भी मेला आयोजन होता है। मंदिर में प्रतिदिन पूजा-अर्चना होती है। मंदिर की बुर्जी की ऊंचाई करीब 40 फीट है। भक्तों के आने जाने के लिए दो दरवाजे लगे हुए हैं। जिससे श्रद्धालुओं को आवागमन में मुश्किल नहीं होती है। लोगों का कहना है कि मां काली मंदिर में पूजा अर्चना करने से काम बन जाते हैं। दूर दराज से हजारों श्रद्धालु मत्था टेकने आते हैं।
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