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गुरू जी बताएंगे, उनके बच्चे कांवेंट में क्यों जाएंगे
ब्यूरो, अमर उजाला मैनपुरी
Updated Wed, 18 Mar 2015 11:41 PM IST
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अपने बच्चों को निजी स्कूलों में शिक्षा दिलाने वाले कर्मचारियों पर राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद ने शिकंजा कसा है। शिक्षा विभाग अब अपने उन कर्मचारियों का सर्वे कराएगा जिनके बच्चे प्राइवेट स्कूलों में कक्षा आठ तक की शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इसके तहत एससीईआरटी ने एक सर्वेक्षण प्रपत्र तैयार किया है। इस प्रपत्र में दिए गए प्रश्नों का शिक्षा विभाग के कर्मचारियों को हां या नहीं में जबाब देना होगा।
संयुक्त निदेशक एससीईआरटी अजय कुमार सिंह ने जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों के प्राचार्य और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र भेज कर रिपोर्ट मांगी है। गौरतलब है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देने के साथ-साथ एमडीएम, यूनिफार्म, किताबें, छात्रवृत्ति सहित तमाम सुविधाओं में सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। उसके बाद भी सरकारी अफसर अथवा कर्मचारी अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ाना चाहते हैं। डायट प्राचार्य आरएस बघेल ने बताया कि संयुक्त निदेशक एससीईआरटी के पत्र पर अग्रिम कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
पूछे जाएंगे 25 प्रश्न
एससीईआरटी ने सर्वेक्षण के लिए ‘एकेडमिक और नॉन एकेडमिक सर्वेक्षण’ को प्रश्नावली तैयार की है। एकेडमिक प्रश्नावली के अनुसार 25 बिंदुओं के माध्यम से पूछा जाएगा कि निजी स्कूलों में सरकारी कर्मचारी अपने बच्चों को पढ़ाना पसंद क्यों करते हैं। इनमें अधिकतर शिक्षक जो कि उसी क्लास में बच्चों को सरकारी स्कूलाें में पढ़ा रहे हैं तो उनके बच्चे निजी कान्वेट स्कूल में क्यों जाते हैं। क्या उनको खुद की योग्यता और क्षमता पर भरोसा नहीं? इसमें पूर्णतया सहमत, आंशिका सहमत, अनिश्चित, आंशिक असहमत एवं पूर्णतया असहमत में से किसी एक पर टिक लगाना होगा।
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इन सवालों का करना होगा सामना
प्रश्नावली में बताना होगा कि बच्चों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने के पीछे क्या कारण हैं। विद्यालय भवन साफ है, पेयजल की अच्छी व्यवस्था है, खेलने का मैदान है, विद्यालय में अभिलेखों के लिए पर्याप्त संसाधन है, क्लास में श्यामपट अच्छा है, लाइब्रेरी में पर्याप्त किताबें हैं, बिजली जाने पर जनरेटर की व्यवस्था है, कंप्यूटर पर्याप्त मात्रा में हैं, बच्चों के बैठने के लिए कुर्सी, मेज की समुचित व्यवस्था है, स्कूल में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, प्राइवेट स्कूल में बच्चों का पढ़ाना सामाजिक श्रेष्ठता एवं स्टेटस का प्रतीक माना जाता है, क्या सरकारी प्राथमिक और जूनियर स्कूलों की पढ़ाई की व्यवस्था ठीक नहीं लगती आदि प्रश्न पूछे जाएंगे।
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संयुक्त निदेशक एससीईआरटी अजय कुमार सिंह ने जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों के प्राचार्य और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र भेज कर रिपोर्ट मांगी है। गौरतलब है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देने के साथ-साथ एमडीएम, यूनिफार्म, किताबें, छात्रवृत्ति सहित तमाम सुविधाओं में सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। उसके बाद भी सरकारी अफसर अथवा कर्मचारी अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ाना चाहते हैं। डायट प्राचार्य आरएस बघेल ने बताया कि संयुक्त निदेशक एससीईआरटी के पत्र पर अग्रिम कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
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पूछे जाएंगे 25 प्रश्न
एससीईआरटी ने सर्वेक्षण के लिए ‘एकेडमिक और नॉन एकेडमिक सर्वेक्षण’ को प्रश्नावली तैयार की है। एकेडमिक प्रश्नावली के अनुसार 25 बिंदुओं के माध्यम से पूछा जाएगा कि निजी स्कूलों में सरकारी कर्मचारी अपने बच्चों को पढ़ाना पसंद क्यों करते हैं। इनमें अधिकतर शिक्षक जो कि उसी क्लास में बच्चों को सरकारी स्कूलाें में पढ़ा रहे हैं तो उनके बच्चे निजी कान्वेट स्कूल में क्यों जाते हैं। क्या उनको खुद की योग्यता और क्षमता पर भरोसा नहीं? इसमें पूर्णतया सहमत, आंशिका सहमत, अनिश्चित, आंशिक असहमत एवं पूर्णतया असहमत में से किसी एक पर टिक लगाना होगा।
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इन सवालों का करना होगा सामना
प्रश्नावली में बताना होगा कि बच्चों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने के पीछे क्या कारण हैं। विद्यालय भवन साफ है, पेयजल की अच्छी व्यवस्था है, खेलने का मैदान है, विद्यालय में अभिलेखों के लिए पर्याप्त संसाधन है, क्लास में श्यामपट अच्छा है, लाइब्रेरी में पर्याप्त किताबें हैं, बिजली जाने पर जनरेटर की व्यवस्था है, कंप्यूटर पर्याप्त मात्रा में हैं, बच्चों के बैठने के लिए कुर्सी, मेज की समुचित व्यवस्था है, स्कूल में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, प्राइवेट स्कूल में बच्चों का पढ़ाना सामाजिक श्रेष्ठता एवं स्टेटस का प्रतीक माना जाता है, क्या सरकारी प्राथमिक और जूनियर स्कूलों की पढ़ाई की व्यवस्था ठीक नहीं लगती आदि प्रश्न पूछे जाएंगे।