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हर कांवड़िये का ख्याल रखते हैं साबिर अली
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी।
Updated Sat, 16 Apr 2016 11:22 PM IST
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हर कांवड़िये का ख्याल रखते हैं साबिर अली
- फोटो : अमर उजाला
हिंदू श्रद्धालु कांवड़ और नेजा चढ़ाने आते हैं तो साबिर अली और अन्य मुस्लिम उनकी मदद करते हैं। यह ध्यान रखते हैं कि कांवड़ियों को को कोई परेशानी न हो। सौहार्द और भाईचारे की यह मिसाल पौराणिक च्यवन ऋषि आश्रम स्थित मंदिर पर देखने को मिल रही हैं। कुछ मुस्लिम तो मन्नत पूरी होने पर मंदिर में नेजा और घंटा भी चढ़ाते हैं।
च्यवन ऋषि आश्रम की मान्यता दूर-दूर तक है। इसका अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि यहां स्थित मंदिर पर प्रतिवर्ष यहां लाखों श्रद्धालु कांवड़, घंटे और नेजा चढ़ाने आते हैं। इसमें सैकड़ों की संख्या में मुस्लिम समाज के लोग भी शामिल हैं। औंछा के साबिर और उनका परिवार यहां आने वाले श्रद्धालुओं की मदद में बढ़ चढ़कर आगे रहता है। मुस्लिम होने के बाद भी उनकी मंदिर में अगाध श्रद्धा है। मुनीम अली, इकबाल, रफीक, फिरोज अली ऐसे नाम हैं, जो मंदिर दर्शन करने नियमित रूप से आते हैं। साथ ही मेला की व्यवस्थाओं में भी शामिल रहते हैं। कौमी एकता की एक मिसाल यहां की रामलीला भी है। इसमें 50 से अधिक मुस्लिम युवक रामलीला में अलग-अलग पात्र बनते हैं। इनमें लक्ष्मण का पात्र अफरोज, दशरथ का पाठ अली शेर खां करते हैं। इसके अलावा अन्य पाठ व रामलीला की देखरेख इन सभी लोगों के सहयोग से होती है।
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च्यवन ऋषि आश्रम की मान्यता दूर-दूर तक है। इसका अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि यहां स्थित मंदिर पर प्रतिवर्ष यहां लाखों श्रद्धालु कांवड़, घंटे और नेजा चढ़ाने आते हैं। इसमें सैकड़ों की संख्या में मुस्लिम समाज के लोग भी शामिल हैं। औंछा के साबिर और उनका परिवार यहां आने वाले श्रद्धालुओं की मदद में बढ़ चढ़कर आगे रहता है। मुस्लिम होने के बाद भी उनकी मंदिर में अगाध श्रद्धा है। मुनीम अली, इकबाल, रफीक, फिरोज अली ऐसे नाम हैं, जो मंदिर दर्शन करने नियमित रूप से आते हैं। साथ ही मेला की व्यवस्थाओं में भी शामिल रहते हैं। कौमी एकता की एक मिसाल यहां की रामलीला भी है। इसमें 50 से अधिक मुस्लिम युवक रामलीला में अलग-अलग पात्र बनते हैं। इनमें लक्ष्मण का पात्र अफरोज, दशरथ का पाठ अली शेर खां करते हैं। इसके अलावा अन्य पाठ व रामलीला की देखरेख इन सभी लोगों के सहयोग से होती है।
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