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साइकिल के हैंडल पर लाउडस्पीकर से करते थे प्रचार
आशीष दीक्षित
Updated Sun, 12 Feb 2017 11:45 PM IST
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लल्लू सिंह चौहान
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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चुनाव आते ही लोगों की जुबान पर सादगी वाले विधायक आ ही जाते हैं। घिरोर क्षेत्र का विधानसभा में प्रतिनिधित्व कर चुके लल्लू सिंह चौहान इसकी मिसाल हैं। उनका चुनाव प्रचार का तरीका आज भी लोगों को याद है जब वह साइकिल पर लाउडस्पीकर टांगकर खेतों तक पहुंचकर किसानों की समस्याएं सुनकर निदान कराने का आश्वासन देकर वोट मांगते थे।
दन्नाहार क्षेत्र के गांव उझैया फकीरपुर के रहने वाले लल्लू सिंह चौहान कम्युनिस्ट विचारधारा के थे। नेशनल इंटर कालेज भोगांव में शिक्षण कार्य करते हुए उनकी रुचि हमेशा राजनीति में रही। मैनपुरी ब्लाक प्रमुख चुने जाने के बाद उन्होंने राजनीति की राह पकड़ी। 1964 में शिक्षक रहते हुए आगरा शिक्षक सीट से एमएलसी का चुनाव लड़ा। अपनी जुझारू छवि के कारण अच्छे वोट हासिल कर एमएलसी बने। विधान परिषद में शिक्षकों की समस्याएं जोरदारी से उठाकर प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव बनाकर समाधान कराने की कला उन्हें हासिल थी। वर्ष 1980 में कम्युनिस्ट पार्टी की टिकट पर उन्होंने घिरोर विधानसभा से चुनाव लड़ा। ताम झाम से दूर रहने वाले लल्लू सिंह ने चुनाव प्रचार एकला चलो की तर्ज पर किया। साइकिल के हैंडल पर लाउडस्पीकर टांगकर वह गांव गांव जाते और लोगों को बताते कि चुनो उसे जो आसानी से मिले। मांगो उससे जो दे खुशी से, खेतों में काम कर रहे किसानों के बीच बैठकर अपनी बात बताने के साथ ही उनका ही खाना खाकर दिल जीतने की कला लल्लू सिंह में थी।
विधायक रहते हुए भी उन्होंने सादगी नहीं छोड़ी। सुबह उठते ही क्षेत्र के लोगों की समस्याएं सुनना, सुबह 10 बजे के बाद कलक्ट्रेट पहुंचकर संबंधित अधिकारियों से समस्याओं का समाधान कराना उनकी आदत में शुमार था। कर्मचारियाें और अधिकारियों के समस्या के समाधान में अड़चन बताने पर लल्लू सिंह बडे़ अधिकारियों से बात करने में भी नहीं कतराते थे। विधायक रहते हुए भी उन्होंने शिक्षकों के हर आंदोलन में बढ़ चढ़कर भाग लिया था।
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दन्नाहार क्षेत्र के गांव उझैया फकीरपुर के रहने वाले लल्लू सिंह चौहान कम्युनिस्ट विचारधारा के थे। नेशनल इंटर कालेज भोगांव में शिक्षण कार्य करते हुए उनकी रुचि हमेशा राजनीति में रही। मैनपुरी ब्लाक प्रमुख चुने जाने के बाद उन्होंने राजनीति की राह पकड़ी। 1964 में शिक्षक रहते हुए आगरा शिक्षक सीट से एमएलसी का चुनाव लड़ा। अपनी जुझारू छवि के कारण अच्छे वोट हासिल कर एमएलसी बने। विधान परिषद में शिक्षकों की समस्याएं जोरदारी से उठाकर प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव बनाकर समाधान कराने की कला उन्हें हासिल थी। वर्ष 1980 में कम्युनिस्ट पार्टी की टिकट पर उन्होंने घिरोर विधानसभा से चुनाव लड़ा। ताम झाम से दूर रहने वाले लल्लू सिंह ने चुनाव प्रचार एकला चलो की तर्ज पर किया। साइकिल के हैंडल पर लाउडस्पीकर टांगकर वह गांव गांव जाते और लोगों को बताते कि चुनो उसे जो आसानी से मिले। मांगो उससे जो दे खुशी से, खेतों में काम कर रहे किसानों के बीच बैठकर अपनी बात बताने के साथ ही उनका ही खाना खाकर दिल जीतने की कला लल्लू सिंह में थी।
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विधायक रहते हुए भी उन्होंने सादगी नहीं छोड़ी। सुबह उठते ही क्षेत्र के लोगों की समस्याएं सुनना, सुबह 10 बजे के बाद कलक्ट्रेट पहुंचकर संबंधित अधिकारियों से समस्याओं का समाधान कराना उनकी आदत में शुमार था। कर्मचारियाें और अधिकारियों के समस्या के समाधान में अड़चन बताने पर लल्लू सिंह बडे़ अधिकारियों से बात करने में भी नहीं कतराते थे। विधायक रहते हुए भी उन्होंने शिक्षकों के हर आंदोलन में बढ़ चढ़कर भाग लिया था।
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