{"_id":"57c327b44f1c1b0d72d4f68a","slug":"sabhee-bhaee-bahan-hain-raajy-puraskaar-se-sammaanit","type":"story","status":"publish","title_hn":"सभी भाई बहन हैं राज्य पुरस्कार से सम्मानित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सभी भाई बहन हैं राज्य पुरस्कार से सम्मानित
Thu, 09 Nov 2023 07:05 PM IST
Anonymous User
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
Published by: Anonymous User
Updated Thu, 09 Nov 2023 07:05 PM IST
विज्ञापन
राज्य पुरस्कार
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एक कहावत है कि गुदड़ी में ही लाल खिला करते हैं। इसे साबित किया है शहर के मोहल्ला पुरोहिताना में रहने वाले एक परिवार ने। इस परिवार के सभी भाई-बहन यानि पांच सदस्य स्टेट अवार्ड से सम्मानित हैं। सभी को यह पुरस्कार हस्तशिल्प में बेहतरीन कलाकृतियां बनाने के लिए प्राप्त हुआ है।
पुरानी मैनपुरी के मोहल्ला पुरोहिताना में रामसनेही लाल का परिवार रहता है। उनकी चार बेटियां और एक बेटा है। बाहर से मकान देखने में लगता ही नहीं कि यहां एक दो नहीं बल्कि पांच-पांच स्टेट अवार्डी रहते हैं। सभी को यह सम्मान मिला है हस्तशिल्प तारकशी की बेहतरीन कलाकृतियां बनाने पर। रामसनेही के परिवार में तारकशी का काम 20 वर्ष पहले शुरू हुआ था। तब उनकी सबसे बड़ी बेटी पूनम ने यह काम शुरू किया था। तारकशी की शानदार कलाकृति बनाने पर उसे वर्ष 2000 में राज्य की ओर से हस्तशिल्प पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वर्तमान पूनम प्राइमरी स्कूल में शिक्षक हैं। फिर यही पुरस्कार वर्ष 2005 में रामसनेही के बेटे विकास को मिला। यह क्रम यहीं नहीं रुका। रासमनेही की चौथे नंबर की बेटी मेघा को वर्ष 2014 में और अब उनकी पांचवें नंबर की बेटी प्रगति और तीसरे नंबर की बेटी निधि को भी वर्ष 2015 में स्टेट अवार्ड अगस्त 2016 में मिल गया। रामसनेही बताते हैं कि वर्तमान में सिर्फ बच्चों के काम में ही सहयोग करते हैं। उनकी कलाकृतियों की बिक्री के बाद जो पैसा आता है, उससे घर का खर्चा चलता है।
विज्ञापन
पुरानी मैनपुरी के मोहल्ला पुरोहिताना में रामसनेही लाल का परिवार रहता है। उनकी चार बेटियां और एक बेटा है। बाहर से मकान देखने में लगता ही नहीं कि यहां एक दो नहीं बल्कि पांच-पांच स्टेट अवार्डी रहते हैं। सभी को यह सम्मान मिला है हस्तशिल्प तारकशी की बेहतरीन कलाकृतियां बनाने पर। रामसनेही के परिवार में तारकशी का काम 20 वर्ष पहले शुरू हुआ था। तब उनकी सबसे बड़ी बेटी पूनम ने यह काम शुरू किया था। तारकशी की शानदार कलाकृति बनाने पर उसे वर्ष 2000 में राज्य की ओर से हस्तशिल्प पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वर्तमान पूनम प्राइमरी स्कूल में शिक्षक हैं। फिर यही पुरस्कार वर्ष 2005 में रामसनेही के बेटे विकास को मिला। यह क्रम यहीं नहीं रुका। रासमनेही की चौथे नंबर की बेटी मेघा को वर्ष 2014 में और अब उनकी पांचवें नंबर की बेटी प्रगति और तीसरे नंबर की बेटी निधि को भी वर्ष 2015 में स्टेट अवार्ड अगस्त 2016 में मिल गया। रामसनेही बताते हैं कि वर्तमान में सिर्फ बच्चों के काम में ही सहयोग करते हैं। उनकी कलाकृतियों की बिक्री के बाद जो पैसा आता है, उससे घर का खर्चा चलता है।
विज्ञापन