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बीमारी से मर रहे लोग, अस्पतालों में लटके ताले
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
Updated Fri, 09 Sep 2016 11:23 PM IST
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बीमारी से मर रहे लोग, अस्पतालों में लटके ताले
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जिले में डेंगू के रोगियों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। नगर के मलिक मील के अलावा मोहल्ला रघुराजपुरी में डेंगू की चपेट में एक ही परिवार के करीब छह सदस्य हैं। इनका उपचार आगरा के निजी अस्पताल में चल रहा है। वहीं इनमें से डेंगू से पीड़ित होने पर एक और वृद्ध की मौत हो गई है। उधर, जिला अस्पताल में भर्ती कराए गए डायरिया पीड़ित दो मरीजों की इलाज के दौरान मौत हो गई।
कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला रघुराजपुरी निवासी शिवपाल तिवारी (65) को और उनके परिवार के सदस्यों को कुछ दिन से बुखार आ रहा था। बुखार के साथ ही शिवपाल की एक दिन पूर्व सिर में तेज दर्द, आंखें लाल और सांस फूलने लगी। परिवारीजनों ने प्राइवेट चिकित्सक को दिखाया। चिकित्सक ने डेंगू की आशंका जताते हुए बाहर ले जाने की सलाह दी। परिवारीजन आगरा ले गए। वहां निजी अस्पताल में जांच कराई। जांच में डेंगू की पुष्टि हुई। उपचार के दौरान शुक्रवार की सुबह शिवपाल की मौत हो गई।
वहीं उनके परिवार के करीब आधा दर्जन लोगों को भी बुखार आ रहा था। हालत गंभीर देख परिवारीजन उन्हें आगरा ले गए। वहां चिकित्सकों ने सभी को डेंगू से पीड़ित बताया। सभी का उपचार आगरा के निजी अस्पताल में चल रहा है। इससे पूर्व भी मलिक मील में छह लोग डेंगू से पीड़ित निकल चुके हैं। इनका उपचार भी आगरा के निजी अस्पताल में कराया गया था। किशनी के गांव मन गांव के एक वृद्ध की भी मौत हो चुकी है।
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थाना भोगांव क्षेत्र के ग्राम भैंसरोली निवासी सुदीप मिश्रा (60) को डायरिया हो गया था। जिनका उपचार गांव में ही चल रहा था। हालत बिगड़ने पर परिवारीजन जिला अस्पताल लेकर आए। यहां उपचार के दौरान शुक्रवार को उनकी मौत हो गई। थाना कुरावली क्षेत्र के मोहल्ला महाजनान निवासी बबलू (60) की भी जिला अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई।
42 नवीन प्राथमिक केंद्र हुए बंद, संविदाकर्मियों की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं ठप
अमर उजाला ब्यूरो
मैनपुरी। जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत नियुक्त संविदा कर्मचारी और आशाओं के हड़ताल के चलते स्वास्थ्य सेवाएं ठप हो गईं। हड़ताल के कारण जिले से लेकर कस्बों में बने सीएचसी और पीएचसी पर आने वाले रोगियों को परेशानी उठानी पड़ रही है। 42 नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बंद पड़े हैं।
जिले में 595 संविदा कर्मचारी हैं। इसमें फार्मासिस्ट, एएनएम, स्टाफ नर्स, कंप्यूटर ऑपरेटर, काउंसलर सहित 19 पद शामिल हैं। इनकी हड़ताल पांच दिनों से चल रही है। इसके चलते ओपीडी, इमरजेंसी, टीकाकरण, पल्सपोलियो, प्रसव, स्कूल हेल्थ आदि संचालित स्वास्थ्य सेवाएं ठप हो गई हैं। वहीं जिले में 1453 आशा बहुएं हैं। इनमें से आधी आशाएं करीब एक सप्ताह से धरने पर बैठी हैं। यह जिले में प्रतिरक्षण का कार्य देखती हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय कार्यक्रम, गर्भवती महिलाओं की देखभाल, गर्भवती महिलाआें को प्रसव के लिए लाना और ले जाना आदि कार्य करती हैं। इसके चलते ग्रामीण लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया नहीं हो पा रही हैं।
आधे से कम आशा धरने पर बैठी हैं। वहीं संविदा कर्मचारियों में अधिकांश क्लेरीकल स्टाफ है। इसमें डाक्टर कम हैं। इसके चलते स्वास्थ्य सेवाओं पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ा है। फिर भी वैकल्पिक व्यवस्था कर रखी हैं। जिस सीएचसी या पीएचसी पर ज्यादा जरूरत होती है तो दूसरे सेंटर से बुला लिया जाता है। इसके अलावा सभी स्थायी चिकित्सकों और कर्मियों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं।
- डा. केके शर्मा, सीएमओ, मैनपुरी
फार्मासिस्ट आज से काली पट्टी बांधकर करेंगे कार्य
डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन उत्तर प्रदेश ने सीएमओ कार्यालय पर एक दिवसीय धरना देने के बाद सीएमओ को ज्ञापन दिया।
धरने को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष डा. अवधेश यादव ने कहा कि फार्मासिस्ट संवर्ग वेतन विसंगतियों, पद, सृजन, संवर्ग का पुनर्गठन सहित सभी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाए। ब्लड बैंक, पोस्टमार्टम हाउस पर फार्मासिस्टों की तैनाती की गई। स्थानीय अधिकारियों द्वारा उक्त पदों पर कार्य न लेकर ड्रग एवं फार्मेसी एक्ट का उल्लंघन किया जा रहा है। साथ ही शासन द्वारा पद सृजन किए जाने के उद्देश्यों का भी हनन हो रहा है। जिससे संघ की मांगे पूरी नहीं हो पा रही हैं।
प्रांतीय उपाध्यक्ष शिवमंगल ने कहा कि 10 से 15 सितंबर तक काला फीता बंाधकर विरोध प्रदर्शन कर ध्यान आकर्षित किया जाएगा। 16 से 19 सितंबर तक सुबह दो घंटे कार्य बहिष्कार किया जाएगा। 20 सितंबर से अनिश्चित कालीन हड़ताल की जाएगी। धरने के बाद पारित प्रस्ताव को मुख्य चिकित्साधिकारी के माध्यम से स्वास्थ्य राज्य मंत्री, मुख्य सचिव आदि को प्रेषित किया गया। इस मौके पर रिषी यादव, केके दुबे, एचएस सिंह, मनोज पाल, वदन सिंह, राजेश बाबू, नेत्रपाल सिंह, मुनेश पाल आदि मौजूद रहे।
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कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला रघुराजपुरी निवासी शिवपाल तिवारी (65) को और उनके परिवार के सदस्यों को कुछ दिन से बुखार आ रहा था। बुखार के साथ ही शिवपाल की एक दिन पूर्व सिर में तेज दर्द, आंखें लाल और सांस फूलने लगी। परिवारीजनों ने प्राइवेट चिकित्सक को दिखाया। चिकित्सक ने डेंगू की आशंका जताते हुए बाहर ले जाने की सलाह दी। परिवारीजन आगरा ले गए। वहां निजी अस्पताल में जांच कराई। जांच में डेंगू की पुष्टि हुई। उपचार के दौरान शुक्रवार की सुबह शिवपाल की मौत हो गई।
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वहीं उनके परिवार के करीब आधा दर्जन लोगों को भी बुखार आ रहा था। हालत गंभीर देख परिवारीजन उन्हें आगरा ले गए। वहां चिकित्सकों ने सभी को डेंगू से पीड़ित बताया। सभी का उपचार आगरा के निजी अस्पताल में चल रहा है। इससे पूर्व भी मलिक मील में छह लोग डेंगू से पीड़ित निकल चुके हैं। इनका उपचार भी आगरा के निजी अस्पताल में कराया गया था। किशनी के गांव मन गांव के एक वृद्ध की भी मौत हो चुकी है।
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थाना भोगांव क्षेत्र के ग्राम भैंसरोली निवासी सुदीप मिश्रा (60) को डायरिया हो गया था। जिनका उपचार गांव में ही चल रहा था। हालत बिगड़ने पर परिवारीजन जिला अस्पताल लेकर आए। यहां उपचार के दौरान शुक्रवार को उनकी मौत हो गई। थाना कुरावली क्षेत्र के मोहल्ला महाजनान निवासी बबलू (60) की भी जिला अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई।
42 नवीन प्राथमिक केंद्र हुए बंद, संविदाकर्मियों की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं ठप
अमर उजाला ब्यूरो
मैनपुरी। जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत नियुक्त संविदा कर्मचारी और आशाओं के हड़ताल के चलते स्वास्थ्य सेवाएं ठप हो गईं। हड़ताल के कारण जिले से लेकर कस्बों में बने सीएचसी और पीएचसी पर आने वाले रोगियों को परेशानी उठानी पड़ रही है। 42 नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बंद पड़े हैं।
जिले में 595 संविदा कर्मचारी हैं। इसमें फार्मासिस्ट, एएनएम, स्टाफ नर्स, कंप्यूटर ऑपरेटर, काउंसलर सहित 19 पद शामिल हैं। इनकी हड़ताल पांच दिनों से चल रही है। इसके चलते ओपीडी, इमरजेंसी, टीकाकरण, पल्सपोलियो, प्रसव, स्कूल हेल्थ आदि संचालित स्वास्थ्य सेवाएं ठप हो गई हैं। वहीं जिले में 1453 आशा बहुएं हैं। इनमें से आधी आशाएं करीब एक सप्ताह से धरने पर बैठी हैं। यह जिले में प्रतिरक्षण का कार्य देखती हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय कार्यक्रम, गर्भवती महिलाओं की देखभाल, गर्भवती महिलाआें को प्रसव के लिए लाना और ले जाना आदि कार्य करती हैं। इसके चलते ग्रामीण लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया नहीं हो पा रही हैं।
आधे से कम आशा धरने पर बैठी हैं। वहीं संविदा कर्मचारियों में अधिकांश क्लेरीकल स्टाफ है। इसमें डाक्टर कम हैं। इसके चलते स्वास्थ्य सेवाओं पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ा है। फिर भी वैकल्पिक व्यवस्था कर रखी हैं। जिस सीएचसी या पीएचसी पर ज्यादा जरूरत होती है तो दूसरे सेंटर से बुला लिया जाता है। इसके अलावा सभी स्थायी चिकित्सकों और कर्मियों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं।
- डा. केके शर्मा, सीएमओ, मैनपुरी
फार्मासिस्ट आज से काली पट्टी बांधकर करेंगे कार्य
डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन उत्तर प्रदेश ने सीएमओ कार्यालय पर एक दिवसीय धरना देने के बाद सीएमओ को ज्ञापन दिया।
धरने को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष डा. अवधेश यादव ने कहा कि फार्मासिस्ट संवर्ग वेतन विसंगतियों, पद, सृजन, संवर्ग का पुनर्गठन सहित सभी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाए। ब्लड बैंक, पोस्टमार्टम हाउस पर फार्मासिस्टों की तैनाती की गई। स्थानीय अधिकारियों द्वारा उक्त पदों पर कार्य न लेकर ड्रग एवं फार्मेसी एक्ट का उल्लंघन किया जा रहा है। साथ ही शासन द्वारा पद सृजन किए जाने के उद्देश्यों का भी हनन हो रहा है। जिससे संघ की मांगे पूरी नहीं हो पा रही हैं।
प्रांतीय उपाध्यक्ष शिवमंगल ने कहा कि 10 से 15 सितंबर तक काला फीता बंाधकर विरोध प्रदर्शन कर ध्यान आकर्षित किया जाएगा। 16 से 19 सितंबर तक सुबह दो घंटे कार्य बहिष्कार किया जाएगा। 20 सितंबर से अनिश्चित कालीन हड़ताल की जाएगी। धरने के बाद पारित प्रस्ताव को मुख्य चिकित्साधिकारी के माध्यम से स्वास्थ्य राज्य मंत्री, मुख्य सचिव आदि को प्रेषित किया गया। इस मौके पर रिषी यादव, केके दुबे, एचएस सिंह, मनोज पाल, वदन सिंह, राजेश बाबू, नेत्रपाल सिंह, मुनेश पाल आदि मौजूद रहे।