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पोषण पुनर्वास केंद्र विभागीय उपेक्षा का शिकार केंद्र के लिए स्थायी
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी
Updated Thu, 17 Nov 2016 11:18 PM IST
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पोषण पुनर्वास केंद्र विभागीय उपेक्षा का शिकार केंद्र के लिए स्थायी
- फोटो : अमर उजाला
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जिला अस्पताल में बनाया गया पोषण पुनर्वास केंद्र विभागीय उपेक्षा का शिकार है। केंद्र के लिए स्थायी चिकित्सक की व्यवस्था तक नहीं है। इसके चलते जिला अस्पताल में तैनात बाल रोग विशेषज्ञ ही बच्चों को देखते हैं।
उल्लेखनीय है कि जिला अस्पताल में करीब एक वर्ष पूर्व पोषण पुनर्वास केंद्र की स्थापना की गई थी। ताकि जिले को कुपोषण मुक्त किया जाए। केंद्र पर कुपोषित बच्चों को भर्ती कराया जाता है। वहीं इस केंद्र पर अभी तक एक भी स्थायी बाल रोग चिकित्सक की तैनाती नहीं है। इस कारण यहां पर भर्ती बच्चों को परेशानी होती है। वहीं जिला अस्पताल में तैनात बाल रोग विशेषज्ञ डा. आरके सागर और डा. डीके गुप्ता ही बच्चों को देखते हैं। वहीं यदि वह दूसरे रोगियों को उपचार देने में व्यस्त हों तो उन बच्चाें को उपचार मिलना भी मुश्किल हो जाता है। इसके चलते बच्चों को परेशानी होती। परेशानी को देखते हुए अभिभावक बच्चों को बिना बताए ही ले जाते हैं। इसके चलते जिले में कुपोषित बच्चों की संख्या कम होते नजर नहीं आ रही है। जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डा. आरके सागर की मानें तो कुपोषण केंद्र में प्रतिदिन छह से सात बच्चे कुपोषण से पीड़ित आ रहे हैं। इनमें दो से तीन बच्चे अति कुपोषित होते हैं। कई बच्चे तो इतनी गंभीर हालत में होते हैं कि उन्हें स्वस्थ करना काफी मुश्किल भरा होता है। यदि समय रहते आंगनबाड़ी केंद्रों से बच्चे केंद्र पर पहुंचाए जाएं तो वह आसानी से ठीक हो सकते हैं।
प्रतिदिन मिलते हैं 100 रुपये
जिला अस्पताल में स्थापित पोषण पुनर्वास केंद्र पर भर्ती कुपोषित बच्चों की मां को प्रतिदिन 100 रुपये मिलते हैं। बच्चों को खाना और दूध भी नि:शुल्क दिया जाता है।
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जिला अस्पताल में स्थापित पोषण पुनर्वास केंद्र पर स्थाई चिकित्सक तैनात करने के लिए कई बार शासन को लिखा गया है। साथ ही जिला अस्पताल में तैनात बाल रोग विशेषज्ञ ही भर्ती कुपोषित बच्चों को उपचार देते हैं।
डा. केके शर्मा, सीएमओ, मैनपुरी
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उल्लेखनीय है कि जिला अस्पताल में करीब एक वर्ष पूर्व पोषण पुनर्वास केंद्र की स्थापना की गई थी। ताकि जिले को कुपोषण मुक्त किया जाए। केंद्र पर कुपोषित बच्चों को भर्ती कराया जाता है। वहीं इस केंद्र पर अभी तक एक भी स्थायी बाल रोग चिकित्सक की तैनाती नहीं है। इस कारण यहां पर भर्ती बच्चों को परेशानी होती है। वहीं जिला अस्पताल में तैनात बाल रोग विशेषज्ञ डा. आरके सागर और डा. डीके गुप्ता ही बच्चों को देखते हैं। वहीं यदि वह दूसरे रोगियों को उपचार देने में व्यस्त हों तो उन बच्चाें को उपचार मिलना भी मुश्किल हो जाता है। इसके चलते बच्चों को परेशानी होती। परेशानी को देखते हुए अभिभावक बच्चों को बिना बताए ही ले जाते हैं। इसके चलते जिले में कुपोषित बच्चों की संख्या कम होते नजर नहीं आ रही है। जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डा. आरके सागर की मानें तो कुपोषण केंद्र में प्रतिदिन छह से सात बच्चे कुपोषण से पीड़ित आ रहे हैं। इनमें दो से तीन बच्चे अति कुपोषित होते हैं। कई बच्चे तो इतनी गंभीर हालत में होते हैं कि उन्हें स्वस्थ करना काफी मुश्किल भरा होता है। यदि समय रहते आंगनबाड़ी केंद्रों से बच्चे केंद्र पर पहुंचाए जाएं तो वह आसानी से ठीक हो सकते हैं।
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प्रतिदिन मिलते हैं 100 रुपये
जिला अस्पताल में स्थापित पोषण पुनर्वास केंद्र पर भर्ती कुपोषित बच्चों की मां को प्रतिदिन 100 रुपये मिलते हैं। बच्चों को खाना और दूध भी नि:शुल्क दिया जाता है।
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जिला अस्पताल में स्थापित पोषण पुनर्वास केंद्र पर स्थाई चिकित्सक तैनात करने के लिए कई बार शासन को लिखा गया है। साथ ही जिला अस्पताल में तैनात बाल रोग विशेषज्ञ ही भर्ती कुपोषित बच्चों को उपचार देते हैं।
डा. केके शर्मा, सीएमओ, मैनपुरी