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नोटबंदी से महिलाओं का घरेलू बजट गड़बड़ाया
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी
Updated Sun, 27 Nov 2016 11:15 PM IST
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Notbandi
- फोटो : Notbandi
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नोटबंदी के चलते अब महिलाओं का घरेलू बजट गड़बड़ा गया है। रोजमर्रा की खरीदारी पर भी असर पड़ रहा है। बाजार में खुले रुपये नहीं होने से ग्राहक और दुकानदार दोनोें ही परेशान हैं। दुकानदार उधार सौदा देने से भी कतराने लगे हैं। नोटबंदी से परेशान लोग सरकार की नीतियों को कोसते नजर आ रहे हैं।
आठ नवंबर से हुई नोटबंदी से रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगी है। महिलाएं घरेलू बजट गड़बड़ाने से परेशान हैं। विजयलक्ष्मी राजपूत का कहना है कि बाजार में खुले रुपये आ ही नहीं रहे हैं। बड़े नोटों का चलन बाजार में बंद हो चुका है। खुले रुपये नहीं होने से घर का खर्चा चलाना मुश्किल हो रहा है। बीना श्रीवास्तव का कहना है कि घरेलू बजट के साथ ही बच्चों की फीस भी जमा नहीं होने के साथ ही दुकानों से रोजमर्रा की खरीदारी भी नहीं हो पा रही है। दैनिक उपयोग की वस्तुएं तक खरीदने में लोग परेशान हो रहे हैं।
किराना दुकानदार नेकसे गुप्ता का कहना है कि दुकानदार भी आखिर कब तक उधार सौदा दें। उनको तो उधार में सौदा नहीं मिलती है। सौदा खरीदते समय उनको नगद ही देना पड़ता है। अब तो उन्होंने उधार ही देना बंद कर दिया है। सब्जी विक्रेता राजू का कहना है कि नोटबंदी के बाद वह नियमित ग्राहकों को सब्जी उधार दे देता था। अब तो उनको मंडी से भी आढ़तियों ने सब्जी उधार देना बंद कर दिया है। उधारी नहीं करने से उनकी रोजाना की बिक्री प्रभावित हो रही है।
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आठ नवंबर से हुई नोटबंदी से रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगी है। महिलाएं घरेलू बजट गड़बड़ाने से परेशान हैं। विजयलक्ष्मी राजपूत का कहना है कि बाजार में खुले रुपये आ ही नहीं रहे हैं। बड़े नोटों का चलन बाजार में बंद हो चुका है। खुले रुपये नहीं होने से घर का खर्चा चलाना मुश्किल हो रहा है। बीना श्रीवास्तव का कहना है कि घरेलू बजट के साथ ही बच्चों की फीस भी जमा नहीं होने के साथ ही दुकानों से रोजमर्रा की खरीदारी भी नहीं हो पा रही है। दैनिक उपयोग की वस्तुएं तक खरीदने में लोग परेशान हो रहे हैं।
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किराना दुकानदार नेकसे गुप्ता का कहना है कि दुकानदार भी आखिर कब तक उधार सौदा दें। उनको तो उधार में सौदा नहीं मिलती है। सौदा खरीदते समय उनको नगद ही देना पड़ता है। अब तो उन्होंने उधार ही देना बंद कर दिया है। सब्जी विक्रेता राजू का कहना है कि नोटबंदी के बाद वह नियमित ग्राहकों को सब्जी उधार दे देता था। अब तो उनको मंडी से भी आढ़तियों ने सब्जी उधार देना बंद कर दिया है। उधारी नहीं करने से उनकी रोजाना की बिक्री प्रभावित हो रही है।
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