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Mainpuri News: शहर के बीचों बीच खड़े जर्जर भवन, हादसों को दे रहे आमंत्रण
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फोटो 28 शहर के सदर बाजार में जर्जर भवन। संवाद
मैनपुरी। बरसात में जर्जर भवन हादसे का कारण बनते हैं। शहर में कई जगह जर्जर भवन खड़े हुए हैं। लेकिन जिम्मेदार इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। निजी भवनों के साथ ही शहर में कुछ सरकारी इमारतें भी जर्जर हैं। यदि हादसा हुआ तो यहां कर्मचारियों का जीवन खतरे में पड़ सकता है।
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दृश्य नंबर- 1
स्थान- सदर बाजार
शहर के सदर बाजार में प्रतिदिन हजारों लोगों को आना जाना रहता है। मुख्य बाजार होने के कारण यहां खरीदारों की सुबह से लेकर देर रात तक भीड़ रहती है। यहां कुछ भवन जर्जर है। पहली मंजिल में दुकानें संचालित हो रही हैं जिनकी मरम्मत तो दुकानदार कराते रहते हैं लेकिन यहां दूसरी मंजिल पर जर्जर भवन खड़े हैं। यदि आंधी और बारिश में यहां हादसा हुआ तो कई लोगों की जान जा सकती है।
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दृश्य नंबर-2
स्थान- 25 शैया आयुर्वेदिक जिला अस्पताल
शहर के बीचों-बीच 25 शैया आयुर्वेदिक अस्पताल का पुराना भवन संचालित हो रहा है। इस भवन में आज भी डॉक्टर और कर्मचारी बैठते हैं। बरसात में इस भवन से पानी टपकता है। कई बार छत से कुछ अवशेष भी गिरे हैं लेकिन इस जर्जर भवन की ओर जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं। यदि हादसा हुआ तो यहां मौजूद डॉक्टर और कर्मचारियों के साथ दवा लेने आने वाले मरीजों की जान भी जोखिम में पड़ सकती है।
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42 परिषदीय स्कूलों में खड़े हैं जर्जर भवन
परिषदीय स्कूलों की बात करें तो बीएसए के निर्देश पर गत वर्ष 66 परिषदीय स्कूलों में जर्जर भवन चिह्नित किए गए थे। इसमें से 24 को ध्वस्त कराया जा चुका है। लेकिन 42 तकनीकी समिति की रिपोर्ट न लगने के कारण आज भी जर्जर खड़े हैं। स्कूल परिसर में बने इन भवनों में छात्र तो नहीं बैठाए जा रहे हैं लेकिन यहां किसी प्रकार से यदि बच्चे खेलते समय पहुंच गए तो उनका जीवन संकट में पड़ सकता है। हालांकि बीएसए सूर्य प्रताप सिंह ने सभी प्रधानाध्यापकों को पत्र जारी कर कहा है कि जर्जर भवनों के पास किसी प्रकार से बच्चे न पहुंचें।
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17 सहायता प्राप्त कॉलेजों में भी जर्जर भवन
जिले के सहायता प्राप्त कॉलेजों की स्थिति बहुत ही दयनीय है। 53 में से 17 कॉलेज ऐसे हैं जहां प्रबंध समिति के लिए विवाद चल रहा है। इसका नतीजा यह है कि यहां बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त भवन तक नहीं हैं। कई जगह जर्जर भवन खड़े हुए हैं। यदि हादसा हुआ तो यहां बच्चों का जीवन खतरे में पड़ सकता है। हालांकि जिला विद्यालय निरीक्षक सतीश कुमार की ओर से सभी प्रधानाचार्यों को पत्र जारी कर निर्देश दिए गए हैं कि जर्जर भवनों में किस प्रकार से बच्चों का न बैठाया जाए।
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शहर में जर्जर निजी भवनों को चिह्नित किया जा रहा है। भवन स्वामियों को नोटिस भेजकर ध्वस्त कराया जाएगा। पिछले साल 23 गृहस्वामियों को नोटिस जारी किए गए थे जिनमें से अधिकतर जर्जर भवन ध्वस्त करा दिए गए हैं। बुद्धिप्रकाश, ईओ नगर पालिका
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दृश्य नंबर- 1
स्थान- सदर बाजार
शहर के सदर बाजार में प्रतिदिन हजारों लोगों को आना जाना रहता है। मुख्य बाजार होने के कारण यहां खरीदारों की सुबह से लेकर देर रात तक भीड़ रहती है। यहां कुछ भवन जर्जर है। पहली मंजिल में दुकानें संचालित हो रही हैं जिनकी मरम्मत तो दुकानदार कराते रहते हैं लेकिन यहां दूसरी मंजिल पर जर्जर भवन खड़े हैं। यदि आंधी और बारिश में यहां हादसा हुआ तो कई लोगों की जान जा सकती है।
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स्थान- 25 शैया आयुर्वेदिक जिला अस्पताल
शहर के बीचों-बीच 25 शैया आयुर्वेदिक अस्पताल का पुराना भवन संचालित हो रहा है। इस भवन में आज भी डॉक्टर और कर्मचारी बैठते हैं। बरसात में इस भवन से पानी टपकता है। कई बार छत से कुछ अवशेष भी गिरे हैं लेकिन इस जर्जर भवन की ओर जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं। यदि हादसा हुआ तो यहां मौजूद डॉक्टर और कर्मचारियों के साथ दवा लेने आने वाले मरीजों की जान भी जोखिम में पड़ सकती है।
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42 परिषदीय स्कूलों में खड़े हैं जर्जर भवन
परिषदीय स्कूलों की बात करें तो बीएसए के निर्देश पर गत वर्ष 66 परिषदीय स्कूलों में जर्जर भवन चिह्नित किए गए थे। इसमें से 24 को ध्वस्त कराया जा चुका है। लेकिन 42 तकनीकी समिति की रिपोर्ट न लगने के कारण आज भी जर्जर खड़े हैं। स्कूल परिसर में बने इन भवनों में छात्र तो नहीं बैठाए जा रहे हैं लेकिन यहां किसी प्रकार से यदि बच्चे खेलते समय पहुंच गए तो उनका जीवन संकट में पड़ सकता है। हालांकि बीएसए सूर्य प्रताप सिंह ने सभी प्रधानाध्यापकों को पत्र जारी कर कहा है कि जर्जर भवनों के पास किसी प्रकार से बच्चे न पहुंचें।
17 सहायता प्राप्त कॉलेजों में भी जर्जर भवन
जिले के सहायता प्राप्त कॉलेजों की स्थिति बहुत ही दयनीय है। 53 में से 17 कॉलेज ऐसे हैं जहां प्रबंध समिति के लिए विवाद चल रहा है। इसका नतीजा यह है कि यहां बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त भवन तक नहीं हैं। कई जगह जर्जर भवन खड़े हुए हैं। यदि हादसा हुआ तो यहां बच्चों का जीवन खतरे में पड़ सकता है। हालांकि जिला विद्यालय निरीक्षक सतीश कुमार की ओर से सभी प्रधानाचार्यों को पत्र जारी कर निर्देश दिए गए हैं कि जर्जर भवनों में किस प्रकार से बच्चों का न बैठाया जाए।
शहर में जर्जर निजी भवनों को चिह्नित किया जा रहा है। भवन स्वामियों को नोटिस भेजकर ध्वस्त कराया जाएगा। पिछले साल 23 गृहस्वामियों को नोटिस जारी किए गए थे जिनमें से अधिकतर जर्जर भवन ध्वस्त करा दिए गए हैं। बुद्धिप्रकाश, ईओ नगर पालिका

फोटो 28 शहर के सदर बाजार में जर्जर भवन। संवाद