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Mainpuri News: ग्रामीण पर्यटन को होम स्टे से लगे नए पंख
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फोटो 27 भांवत गांव में शिव मंदिर में पूजा अर्चना करते विदेशी पर्यटक और ग्रामीण। संवाद
मैनपुरी। ग्रामीण परिवेश का लुत्फ उठाने और भारतीय संस्कृति से रूबरू होने के लिए जनपद के कई ग्रामीण इलाकों में विदेशी पर्यटक भ्रमण पर आते हैं। वे ग्रामीणों के साथ यहां रुकते हैं और उनकी पारिवारिक गतिविधियों में शामिल होते हैं। इसके लिए पर्यटन विभाग की ओर से लोगों ने अपने घरों को होम स्टे में परिवर्तित किया है। इससे पिछले पांच सालों में पर्यटकों की संख्या में इजाफा हुआ है। पूर्व में जहां साल भर में 20 से 30 पर्यटक आते थे उनकी संख्या अब 90 से 100 हो गई है। इससे क्षेत्रीय लोगों को आर्थिक आमदनी का मौका भी मिल रहा है।
ग्रामीण क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन विभाग की ओर से होम स्टे की योजना शुरू की गई। इसके तहत लोग अपने घर को होटल के तौर पर प्रयोग कर सकते हैं। जिससे उनके क्षेत्र में आने वाले पर्यटकों को अपने घर में ठहरा कर रहे ग्रामीण परिवेश से रूबरू करा सकें। इसके लिए लोगों को पर्यटन विभाग से पंजीकरण कराना होता है, जिसके बाद वह अपने स्तर से कमरों का किराया तय करते हैं। होम स्टे की सुविधा शुरू होने से जहां ग्रामीणों को आर्थिक रूप से मजबूत होने का मौका मिला है। वहीं यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में भी बढ़ोतरी हो रही है।
पर्यटन विभाग के आंकड़ों की बात करें तो पिछले कई सालों से जनपद के 5 इलाकों जिनमें भांवत, जसराजपुर, किरथुआ, लहरा और सहन शामिल हैं, उनमें पर्यटकों का आवागमन बढ़ा है, उनकी संख्या में वृद्धि हुई है। पर्यटन विभाग की ओर से शुरू की गई इस योजना के तहत अब तक करीब 36 लोगों ने होम स्टे का पंजीकरण करा कर पर्यटकों को रोकने की व्यवस्था अपने घरों में की है। विदेश से आने वाले पर्यटक यहां मौजूद पर्यटन स्थलों पर आते हैं और यहां आकर एक या दो रात तक ठहराव करते हैं और ग्रामीण क्षेत्र में होने वाली गतिविधियों में शामिल होते हैं।
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पिछले 5 सालों में बड़ी पर्यटकों की संख्या
पर्यटन विभाग के अनुमानित आंकड़ों की माने तो एक माह में इन पर्यटन क्षेत्रों पर करीब 10 से 12 पर्यटक आते हैं, जो एक या दो दिन होम स्टे में रुकते हैं। होम स्टे का संचालन करने वाले लोग उनसे 1000 से 5000 रुपये तक रुकने के लिए लेते हैं। इसमें उन्हें रहने की सुविधा, ग्रामीण गतिविधियों में शामिल होने की सुविधा और खेती-बाड़ी से संबंधित जानकारी के साथ धार्मिक व अन्य पर्यटन स्थल को दिखाने की सुविधा शामिल रहती है। सर्वाधिक पर्यटकों की संख्या नवंबर माह में रहती है, जब मौसम सर्द होता है। आंकड़ों के अनुसार पहले जहां करीब 20 से 30 पर्यटक 1 साल में आते थे, वहीं अब करीब 90 से 100 पर्यटक इन स्थलों पर आ रहे हैं। पिछले 5 सालों से लगातार पर्यटकों की संख्या मं इजाफा हो रहा है।
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ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति में हुआ सुधार
होम स्टे शुरू होने से पर्यटकों का ठहराव इन ग्रामीण क्षेत्रों में शुरू हो गया, जिसकी वजह से ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार होने लगा। पर्यटकों के रुकने के लिए वह लोग उनसे जो किराया लेते हैं वह होम स्टे का संचालन करने वालों की की ओर से तय किया जाता है।
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जनपद में पर्यटकों की सुविधा और उनके ठहराव को बढ़ाने के लिए होम स्टे से मदद मिल रही है। इससे जहां पर्यटकों का आवागमन बढ़ा है वहीं क्षेत्रीय लाेगों को आर्थिक फायदा भी हो रहा है। इससे पर्यटक भारतीय संस्कृति से भी रूबरू हो रहे हैं। जयवीर सिंह, पर्यटन मंत्री
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ग्रामीण क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन विभाग की ओर से होम स्टे की योजना शुरू की गई। इसके तहत लोग अपने घर को होटल के तौर पर प्रयोग कर सकते हैं। जिससे उनके क्षेत्र में आने वाले पर्यटकों को अपने घर में ठहरा कर रहे ग्रामीण परिवेश से रूबरू करा सकें। इसके लिए लोगों को पर्यटन विभाग से पंजीकरण कराना होता है, जिसके बाद वह अपने स्तर से कमरों का किराया तय करते हैं। होम स्टे की सुविधा शुरू होने से जहां ग्रामीणों को आर्थिक रूप से मजबूत होने का मौका मिला है। वहीं यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में भी बढ़ोतरी हो रही है।
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पर्यटन विभाग के आंकड़ों की बात करें तो पिछले कई सालों से जनपद के 5 इलाकों जिनमें भांवत, जसराजपुर, किरथुआ, लहरा और सहन शामिल हैं, उनमें पर्यटकों का आवागमन बढ़ा है, उनकी संख्या में वृद्धि हुई है। पर्यटन विभाग की ओर से शुरू की गई इस योजना के तहत अब तक करीब 36 लोगों ने होम स्टे का पंजीकरण करा कर पर्यटकों को रोकने की व्यवस्था अपने घरों में की है। विदेश से आने वाले पर्यटक यहां मौजूद पर्यटन स्थलों पर आते हैं और यहां आकर एक या दो रात तक ठहराव करते हैं और ग्रामीण क्षेत्र में होने वाली गतिविधियों में शामिल होते हैं।
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पिछले 5 सालों में बड़ी पर्यटकों की संख्या
पर्यटन विभाग के अनुमानित आंकड़ों की माने तो एक माह में इन पर्यटन क्षेत्रों पर करीब 10 से 12 पर्यटक आते हैं, जो एक या दो दिन होम स्टे में रुकते हैं। होम स्टे का संचालन करने वाले लोग उनसे 1000 से 5000 रुपये तक रुकने के लिए लेते हैं। इसमें उन्हें रहने की सुविधा, ग्रामीण गतिविधियों में शामिल होने की सुविधा और खेती-बाड़ी से संबंधित जानकारी के साथ धार्मिक व अन्य पर्यटन स्थल को दिखाने की सुविधा शामिल रहती है। सर्वाधिक पर्यटकों की संख्या नवंबर माह में रहती है, जब मौसम सर्द होता है। आंकड़ों के अनुसार पहले जहां करीब 20 से 30 पर्यटक 1 साल में आते थे, वहीं अब करीब 90 से 100 पर्यटक इन स्थलों पर आ रहे हैं। पिछले 5 सालों से लगातार पर्यटकों की संख्या मं इजाफा हो रहा है।
ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति में हुआ सुधार
होम स्टे शुरू होने से पर्यटकों का ठहराव इन ग्रामीण क्षेत्रों में शुरू हो गया, जिसकी वजह से ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार होने लगा। पर्यटकों के रुकने के लिए वह लोग उनसे जो किराया लेते हैं वह होम स्टे का संचालन करने वालों की की ओर से तय किया जाता है।
जनपद में पर्यटकों की सुविधा और उनके ठहराव को बढ़ाने के लिए होम स्टे से मदद मिल रही है। इससे जहां पर्यटकों का आवागमन बढ़ा है वहीं क्षेत्रीय लाेगों को आर्थिक फायदा भी हो रहा है। इससे पर्यटक भारतीय संस्कृति से भी रूबरू हो रहे हैं। जयवीर सिंह, पर्यटन मंत्री

फोटो 27 भांवत गांव में शिव मंदिर में पूजा अर्चना करते विदेशी पर्यटक और ग्रामीण। संवाद