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Mainpuri News: नदियाें को भागीरथ का इंजतार, अरिंद-सेंगर का प्रवाह थमा, ईशन जलमंजरी से अटी

Sat, 14 Mar 2026 01:06 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Sat, 14 Mar 2026 01:06 AM IST
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mainpuri news rivers crisis
फोटो 21 शहर से गुजर रही ईशन नदी में पड़ी गंदगी और पनपी जलकुंभी। संवाद
मैनपुरी। मैनपुरी जिले से होकर गुजरने वाली चार प्रमुख नदियां ईशन, अरिंद, काली और सेंगर गंभीर दुर्दशा का सामना कर रही हैं। इनमें से काली नदी को छोड़कर अन्य तीन नदियों का प्रवाह या तो पूरी तरह रुक गया है या उनके अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। सनातन संस्कृति में मां का दर्जा प्राप्त इन नदियों को अब पुनर्जीवन की दरकार है।मैनपुरी की अरिंद और सेंगर नदियां अब केवल नाममात्र की रह गई हैं। इन दोनों नदियों का प्रवाह पूरी तरह से रुक चुका है, जिससे इनके किनारे बसे गांवों में जल संकट गहरा रहा है। कभी इन नदियों से सिंचाई और पेयजल की आपूर्ति होती थी, लेकिन अब ये सूखी पड़ी हैं। स्थानीय निवासियों को अब पानी के लिए अन्य स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। इन नदियों के सूखने से जैव विविधता पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
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पूर्व डीएम का भागीरथ प्रयास ईशन के उद्धार में रहा असफल
ईशन नदी एटा जिले में नगला सुजान (सिकंदराराऊ) के पास से निकलती है, एटा से अपना सफर शुरू कर गंगा में मिलने वाली ईशन नदी अब अधर में ही अटक गई है। ये वही ईशन है, जिसमें गर्मियों में फसलों की सिंचाई के लिए अपना जल दिया तो बारिश में बाढ़ से मैनपुरी को बचाने के लिए पानी को खुद में समेट लिया। वर्ष 2020 में तत्कालीन डीएम महेंद्र बहादुर सिंह ने ईशन के उद्धार के लिए प्रयास किए थे। ईशन के किनारे पौधरोपण कर यहां दिवाली उत्सव भी मनाया था, लेकिन पूर्व डीएम का प्रयास भी ईशन के लिए सफल नहीं हो सका।
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काली नदी पर भी कई जगह अतिक्रमण
यह नदी मैनपुरी की उत्तर-पूर्वी सीमा को एटा और फर्रुखाबाद से अलग करती है। इस नदी की खासियत यह है कि इसमें साल भर पानी रहता है। जिले के कुरावली, भोगांव और बेवर क्षेत्र से होकर यह नदी निकली है। जिले की केवल यह एक नदी है जो लोगों के लिए सहायक बनी हुई है। बारिश में गांव और कस्बों के पानी को अपने में समेटती है तो वर्ष भर इस नदी के पानी से लोग अपने खेतों की सिंचाई का कार्य करते हैं। हालांकि इस नदी पर भी कुछ स्थानों पर लोगों ने कब्जा कर रखा है।
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अरिंद नदी का बहाव रुकने से हर साल सैकड़ों बीघा फसल होती है बर्बाद
अरिंद नदी का उद्गम प्रदेश के मुस्तफाबाद के उत्तरी क्षेत्र से माना जाता है। यह नदी जिले में उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व दिशा की ओर एक घुमावदार रास्ते से बहती है। यह नदी जिले के घिरोर, मैनपुरी, करहल, किशनी आदि क्षेत्रों से होकर निकलती है। करीब 10 साल पहले नदी की सफाई कराई गई थी, लेकिन अब नदी की सफाई पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। नदी पूरी तरह से जल मंजरी से अटी है। नदी का बहाव रुक गया है। इससे हर साल यह नदी बरसात में घिरोर, मैनपुरी, करहल और किशनी क्षेत्र में सैकड़ो बीघा खेतों में खड़ी धान, बाजरा और मक्का की फसल को बर्बाद कर देती है।
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सेंगर नदी का अस्तित्व बचाने की है चुनौती
सेंगर नदी का उद्गम स्थल प्रदेश के अलीगढ़ जिले में अधवान झील के पास स्थित है। यह नदी अलीगढ़, हाथरस, मैनपुरी, इटावा और कानपुर देहात जिलों से होकर बहती है। जिले के बरनाहल और करहल विकासखंड क्षेत्र से निकलने वाली सेंगर नदी से करीब तीन दर्जन गांव के किसान खेतों की सिंचाई करते हैं। जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की उदासीनता से किसान फसलों की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं।
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जिले से गुजरने वाली ईशन नदी की सफाई के लिए 6.50 करोड़ रुपये का मांग पत्र नमामि गंगे योजना के तहत जिला गंगा समिति ने भेजा है। उम्मीद है कि जल्द धनराशि प्राप्त होगी। धनराशि प्राप्त होने के बाद ईशन की सफाई कार्य कराया जाएगा।
राजीव कुमार, अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग
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नदियां पर्यावरण रक्षा में सहायक हैं। नदियों की सुरक्षा और विकास के लिए शासन और प्रशासन को मिलकर प्रयास करने चाहिए।
चंद्रप्रकाश चंदू, समाज सेवी
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ईशन नदी जिले की सबसे पवित्र नदी मानी गई है। इस नदी में गंदगी है। इसके चलते लोग इस नदी में स्नान भी नहीं कर सकते। नदी के विकास के लिए शासन और प्रशासन को जल्द कदम उठाने चाहिए।
प्रमोद दुबे बाब, समाजसेवी
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अरिंद नदी की सफाई बहुत जरूरी है। पिछले तीन साल से सैकड़ों एकड़ भूमि में रोपी जाने वाली हजारों किसानों की धान की फसल बर्बाद हो रही है। शासन और प्रशासन को इस नदी की सफाई पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

जीत सिंह, किसान रठेरा

फोटो 21 शहर से गुजर रही ईशन नदी में पड़ी गंदगी और पनपी जलकुंभी। संवाद

फोटो 21 शहर से गुजर रही ईशन नदी में पड़ी गंदगी और पनपी जलकुंभी। संवाद

फोटो 21 शहर से गुजर रही ईशन नदी में पड़ी गंदगी और पनपी जलकुंभी। संवाद

फोटो 21 शहर से गुजर रही ईशन नदी में पड़ी गंदगी और पनपी जलकुंभी। संवाद

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