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Mainpuri News: लाखों का पैकेज ठुकराया, गेंदा की खेती से महकाई किस्मत

Sun, 07 Jun 2026 01:53 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Sun, 07 Jun 2026 01:53 AM IST
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mainpuri news genda farming
फोटो 9 गांव पदमपुर छिवकरिया में फूलों की खेती करते किसान रवि पाल। संवाद - फोटो : Archive
मैनपुरी। लाखों रुपये का कॉर्पोरेट पैकेज ठुकराकर मिट्टी से मोहब्बत करने वाले युवा किसान आज खेती की नई इबारत लिख रहे हैं। भोगांव क्षेत्र के गांव पदमपुर छिवकरिया के रहने वाले रवि पाल ने बीटेक के बाद 9 लाख सालाना की नौकरी छोड़कर गेंदा की खेती शुरू की। मेहनत के बल पर रवि न सिर्फ अपनी किस्मत को महकाया, गांव के दूसरे किसानों को उन्नति की राह दिखाई है।रवि पाल ने साल 2011 में मथुरा के सचदेवा इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट से एमबीए की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली सहित कई महानगरों में अलग-अलग मल्टीनेशनल कंपनियों में नौकरी की। रवि ने बताया कि वर्ष 2016 में वह अपने मित्रों के साथ दिल्ली के पूसा स्थित कृषि विज्ञान केंद्र घूमने गए। वहां देश के नामी कृषि वैज्ञानिकों से मुलाकात के दौरान उन्हें फूलों की खेती के प्रेरणा मिली।
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रवि ने बताया कि वर्ष 2017 में टाटा कंपनी में 9.60 लाख रुपये सालाना पैकेज की नौकरी छोड़ी और गांव लौट आए। उन्होंने शुरुआत में 8 बीघा खेत में गेंदा के फूल की खेती शुरू की। पहले साल फसल बेहतर हुई और दाम भी अच्छा मिला। पहली ही फसल में उन्हें 75 हजार रुपये का फायदा हुआ था। उन्होंने गांव के दूसरे किसानों को भी परंपरागत खेती के साथ फूलों की खेती के लिए प्रेरित किया।
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रवि ने बताया कि अपने करीब 10 बीघा खेत के अलावा गांव के अन्य खेतों को किराये पर लेकर उसमें गेंदा उगाते हैं। इससे उन्हें सालाना 12 से 15 लाख रुपये की आमदनी होती है। वहीं, उनसे जुड़कर गेंदा की खेती करने वाले किसान भी आर्थिक रूप से समृद्ध बन रहे हैं। रवि का कहना है कि घर से दूर रहकर भले ही बड़ी-बड़ी एसी बिल्डिंग में नौकरी कर सकते हैं, लेकिन असली सुकून अपने घर और गांव की मिट्टी में है।
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250 किसानों को भी दिखाई सफलता की राह

किसान रवि ने बताया कि उन्होंने गांव के करीब 250 किसानों को अपने साथ जोड़ा और उनको घर बैठे बीज और मार्केट दोनों की सुविधा दिलाई। उन्होंने बताया कि गांव में किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या होती है कि अगर वो फूलों की खेती कर रहे हैं तो उनको बाजार में अच्छी कीमत मिलेगी चाहिए। इसके लिए उन्होंने फूल कारोबारियों से संपर्क किया और फूलों को अच्छे दामों में बेचना शुरू कर दिया। उनके फूलों की मांग दिल्ली, इटावा, कानपुर, आगरा की मंडियों में हैं। खेत में 90 से लेकर 150 क्विंटल गेंदे के फूल का उत्पादन होता है।
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