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Mainpuri News: अन्य टैंकर चालक से सांठगांठ कर चल रहा था काले तेल का काला कारोबार
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करहल। सिरसागंज रोड पर काफी समय से काले तेल का काला कारोबार रिफाइनरी से तेल लाने वाले टैंकर चालक की सांठगांठ से चल रहा था, पकड़े गए धंधे से जुड़े लोगों ने पूछताछ में बताया कि माल मथुरा रिफाइनरी से लाए थे, बाराबंकी ले रास्ते में ही 800 किलो माल उतारना था। इससे पहले ही पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। प्राथमिकी दर्ज करने के बाद बुधवार को न्यायालय में पेश किया गया।एसपी ग्रामीण अभिषेक तिवारी ने बताया कि करहल क्षेत्र में काले तेल का अवैध कारोबार की सूचना पर मंगलवार रात को एसओजी टीम को कार्रवाई के लिए भेजा गया था। बाबूराम डिग्री कॉलेज के सामने गोदाम में अस्थाई गेट लगा था। जिसके अंदर कुछ लोग ट्रक से तारकोल उतारकर मशीन के जरिये काला तेल तैयार कर रहे थे। मौके से मशीन, दो ड्रम, प्लास्टिक पाइप व टैंकर बरामद हुआ। जिसमें करीब 18 टन तारकोल था। मौके से गोदाम संचालक विपिन कुमार उर्फ साधु यादव निवासी नगला राधे नसीरपुर जनपद फिरोजाबाद, टैंकर चालक राजेंद्र प्रसाद निवासी पूरेधाकू मिल एरिया रायबरेली और संजय कुमार निवासी गांव स्याना थाना छाता जनपद मथुरा को गिरफ्तार किया गया। सभी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर बुधवार को न्यायालय में पेश किया गया।
एसपी ग्रामीण ने बताया कि पूछताछ में सामने आया है कि चालक टैंकर में मथुरा रिफाइनरी से तारकोल लेकर बाराबंकी के लिए निकला था, गोदाम संचालक साधु यादव व संजय से सांठगांठ कर चालक गाड़ी को करहल लाया और काला तेल बनाने के लिए तारकोल चोरी से उतार रहे थे। तीनों काफी समय से यह काम कर रहे हैं, कितनी बार यह लोग तारकोल चोरी कर चुके हैं। इस बारे में भी जानकारी की जा रही है।
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किराये पर लिया था गोदाम
टैंकर चालक राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि वह मुनाफा कमाने की लालच में वह तारकोल रास्ते में बेच देता है। जो माल बचता वह पार्टी को दे देता था। तीनों लोग काफी समय से यह काम मिल कर कर रहे थे। विपिन ने गोदाम किराये पर 15 हजार रुपये महीना पर अनिल कुमार निवासी करहल से लिया था। इसका संचालन साधु करता था। इसमें तारकोल से काला तेल बनाने के लिए मशीन भी लगवाई थी। मशीन में तारकोल को गर्म कर पिघलाते थे। उसके पास इस काम का कोई वैध लाइसेंस भी नहीं है।
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कहां होती है काले तेल की खपत
काले तेल का काला कारोबार जनपद के अलावा अन्य राज्यों में भी फैला हुआ है, दरअसल तारकोल से काला तेल बनाने वाले इसको सड़क बनाने वाले ठेकेदार को तारकोल से कम कीमत पर उपलब्ध कराते हैं। दिल्ली, मथुरा और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भट्ठी और बॉयलरों के लिए सस्ते ईंधन के रूप में काले तेल का प्रयोग होता है। काला तेल बेच कर अच्छा मुनाफा कमाते हैं।
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एसपी ग्रामीण ने बताया कि पूछताछ में सामने आया है कि चालक टैंकर में मथुरा रिफाइनरी से तारकोल लेकर बाराबंकी के लिए निकला था, गोदाम संचालक साधु यादव व संजय से सांठगांठ कर चालक गाड़ी को करहल लाया और काला तेल बनाने के लिए तारकोल चोरी से उतार रहे थे। तीनों काफी समय से यह काम कर रहे हैं, कितनी बार यह लोग तारकोल चोरी कर चुके हैं। इस बारे में भी जानकारी की जा रही है।
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किराये पर लिया था गोदाम
टैंकर चालक राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि वह मुनाफा कमाने की लालच में वह तारकोल रास्ते में बेच देता है। जो माल बचता वह पार्टी को दे देता था। तीनों लोग काफी समय से यह काम मिल कर कर रहे थे। विपिन ने गोदाम किराये पर 15 हजार रुपये महीना पर अनिल कुमार निवासी करहल से लिया था। इसका संचालन साधु करता था। इसमें तारकोल से काला तेल बनाने के लिए मशीन भी लगवाई थी। मशीन में तारकोल को गर्म कर पिघलाते थे। उसके पास इस काम का कोई वैध लाइसेंस भी नहीं है।
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कहां होती है काले तेल की खपत
काले तेल का काला कारोबार जनपद के अलावा अन्य राज्यों में भी फैला हुआ है, दरअसल तारकोल से काला तेल बनाने वाले इसको सड़क बनाने वाले ठेकेदार को तारकोल से कम कीमत पर उपलब्ध कराते हैं। दिल्ली, मथुरा और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भट्ठी और बॉयलरों के लिए सस्ते ईंधन के रूप में काले तेल का प्रयोग होता है। काला तेल बेच कर अच्छा मुनाफा कमाते हैं।