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किसान परेशान, नहीं ले पा रहे खाद

Sun, 04 Dec 2016 10:41 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी Updated Sun, 04 Dec 2016 10:41 PM IST
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kisaan pareshaan, nahin le pa rahe khaad
खेती - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
केंद्र सरकार की नोटबंदी का खेती पर भी असर हुआ है। किसान को खाद और बीज नहीं मिल रहा है। जिससे खेती भी प्रभावित हो रही है।  
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कालेधन के खिलाफ केंद्र सरकार की नोटबंदी से जिले में खेती प्रभावित हुई है। जिले में कई स्थानों पर गेहूं, लहसुन और आलू की बुवाई हो चुकी है। गेहूं की बुवाई कुछ स्थानाें पर नहीं हो सकी है। जिन खेतों में हो चुकी है वहां खेती में खाद डालने का समय आ चुका है। नोटबंदी के चलते किसान दुकानों से खाद नहीं खरीद पा रहा है। किसान के पास नए नोट नहीं हैं। बीज खरीदने में आ रही दिक्कतों के चलते कई किसानों ने पुराने बीज का प्रयोग कर लिया है मगर अब खाद के लिए उनको मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है।   
भोगांव निवासी किसान चंद्रभान का कहना है कि सरकार ने जब पुराने नोट बंद किए तो नए नोटों की व्यवस्था करनी चाहिए थी। नोट नहीं होने के कारण उनकी गेहूं की फसल में खाद नहीं लग पा रही है जिससे उनकी 40 बीघा की फसल में नुकसान होने की संभावना है।
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नवादा निवासी किसान कालीचरन का कहना है कि उन्होंने पुराने नोट बंद होने से पहले 20 बीघा खेत में आलू बो दिया पर अब खाद के लिए परेशानी हो रही है। बैंक से नए नोट नहीं मिलने के कारण खेत में खाद नहीं लगा पा रहे हैं। खाद न लगने से आलू बर्बाद हो जाएगा।  
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नगला शीश निवासी किसान राजेश कुमार को 25 बीघा खेत में बोए गए लहसुन की चिंता सता रही है। उनको खाद नहीं मिल पा रही है। खाद के लिए नए नोट नहीं हैं। पुराने नोटों से सहकारी समिति पर उनको खाद नहीं मिल रही है। नोटबंदी से फसल बर्बाद होने की चिंता है।
नगला पजाबा निवासी किसान जीवालाल का कहना है कि उनको 30 बीघा खेत में गेहूं बोना है। नोटबंदी से वह बीज ही नहीं खरीद पा रहे हैं। बीज न मिल पाने से उनको फसल नहीं हो पाने की चिंता है। बीज के बाद खाद की समस्या भी सता रही है।


जिले में होने वाली पैदावार
फसल         क्षेत्रफल
गेहूं           1.66 हजार हेक्टेयर
आलू          22 हजार हेक्टेयर
लहसुन         सात हजार हेक्टेयर

जिले में लहसुन और आलू की फसल बोई जा चुकी है। 75 प्रतिशत गेहूं भी किसान ने बो दिया है। बुवाई हो जाने के कारण बीज की समस्या तो नहीं है। खाद के लिए जरूर किसानों को परेशानी हो रही है। सरकारी एजेंसियों पर पुराने नोटों से भी खाद बेची जा रही है। खाद की परेशानी भी एक सप्ताह में दूर होने की संभावना है। फिर भी फसल प्रभावित होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है।
- पीसी विश्वकर्मा, जिला कृषि अधिकारी
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