{"_id":"579b530c4f1c1b1f1521e164","slug":"killed-by-the-negligence-of-the-doctor-prasuta","type":"story","status":"publish","title_hn":"चिकित्सक की लापरवाही से गई प्रसूता की जान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चिकित्सक की लापरवाही से गई प्रसूता की जान
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
Updated Fri, 29 Jul 2016 10:32 PM IST
विज्ञापन
लापरवाही
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पीएचसी कुसमरा पर तैनात चिकित्सक की लापरवाही से शुक्रवार को एक प्रसूता की जान चली गई। परिवारीजनों का कहना है कि नॉर्मल डिलीवरी होने के बाद प्रसूता की हालत बिगड़ गई। बार-बार कहने के बाद भी चिकित्सक ने डेढ़ घंटे बाद रेफर किया। इससे रास्ते में ही प्रसूता की मौत हो गई।
किशनी थाना क्षेत्र के ग्राम गलरियापुर निवासी पिंकी की शादी कुरावली के गांव बेलाहर में हुई थी। वह गर्भवती थी और मायके में रह रही थी। प्रसव पीड़ा होेने पर पिता राधेश्याम रिंकी को शुक्रवार की सुबह 9:34 बजे कुसमरा स्थित पीएचसी पर ले गए। वहां पीएचसी के गेट पर पहुंचते ही रिंकी ने एक बेटे को जन्म दिया। इसके चलते उसे पीएचसी पर भर्ती कराया गया। परिवारीजनों का आरोप है कि इसके बाद वहां तैनात महिला चिकित्सक ने भर्ती कर लिया। डिलीवरी के बाद करीब 11 बजे उसे घबराहट होने लगी। इससे परिवारीजन परेशान हो गए।
पीएचसी पर तैनात डाक्टर रश्मि जौहरी से परिवारीजनों ने रेफर करने को कहा, पर उन्होंने नहीं किया। इसके बाद जब परिवारीजनों ने दबाव बनाया। तब दोपहर 12:24 बजे रिंकी को रेफर किया। रिंकी के भाई गोरेलाल ने बताया कि रिंकी को जिला महिला अस्पताल उपचार के लिए ला रहे थे। तभी रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। भाई गोरेलाल और पिता राधेश्याम का कहना था कि यदि डाक्टर जल्दी रेफर कर देती तो रिंकी की जान बच जाती।
विज्ञापन
मामला संज्ञान में आया है। नार्मल डिलीवरी के बाद महिला को घबराहट हुई है। उसे रेफर करने में देरी क्यों हुई इसकी जांच की जाएगी। यदि डाक्टर दोषी पाई जाती है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- डाक्टर केके शर्मा, सीएमओ
कैसे होगा चार बच्चों का पालन पोषण
रिंकी के पहले से दो बेटे और एक बेटी है। महिला की मौत के बाद बच्चों का पालन-पोषण कैसे होगा यह बात परिवारीजनों को सता रही है। मासूम बच्चों का ख्याल पिता कैसे रखेगा। वहीं सबसे छोटे बच्चे के पालन पोषण में भी दिक्कत आएगी।
विज्ञापन
किशनी थाना क्षेत्र के ग्राम गलरियापुर निवासी पिंकी की शादी कुरावली के गांव बेलाहर में हुई थी। वह गर्भवती थी और मायके में रह रही थी। प्रसव पीड़ा होेने पर पिता राधेश्याम रिंकी को शुक्रवार की सुबह 9:34 बजे कुसमरा स्थित पीएचसी पर ले गए। वहां पीएचसी के गेट पर पहुंचते ही रिंकी ने एक बेटे को जन्म दिया। इसके चलते उसे पीएचसी पर भर्ती कराया गया। परिवारीजनों का आरोप है कि इसके बाद वहां तैनात महिला चिकित्सक ने भर्ती कर लिया। डिलीवरी के बाद करीब 11 बजे उसे घबराहट होने लगी। इससे परिवारीजन परेशान हो गए।
विज्ञापन
पीएचसी पर तैनात डाक्टर रश्मि जौहरी से परिवारीजनों ने रेफर करने को कहा, पर उन्होंने नहीं किया। इसके बाद जब परिवारीजनों ने दबाव बनाया। तब दोपहर 12:24 बजे रिंकी को रेफर किया। रिंकी के भाई गोरेलाल ने बताया कि रिंकी को जिला महिला अस्पताल उपचार के लिए ला रहे थे। तभी रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। भाई गोरेलाल और पिता राधेश्याम का कहना था कि यदि डाक्टर जल्दी रेफर कर देती तो रिंकी की जान बच जाती।
विज्ञापन
मामला संज्ञान में आया है। नार्मल डिलीवरी के बाद महिला को घबराहट हुई है। उसे रेफर करने में देरी क्यों हुई इसकी जांच की जाएगी। यदि डाक्टर दोषी पाई जाती है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- डाक्टर केके शर्मा, सीएमओ
कैसे होगा चार बच्चों का पालन पोषण
रिंकी के पहले से दो बेटे और एक बेटी है। महिला की मौत के बाद बच्चों का पालन-पोषण कैसे होगा यह बात परिवारीजनों को सता रही है। मासूम बच्चों का ख्याल पिता कैसे रखेगा। वहीं सबसे छोटे बच्चे के पालन पोषण में भी दिक्कत आएगी।