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कात्यायनी की पूजा-अर्चना कर मानी मनौती
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी
Updated Fri, 07 Oct 2016 11:03 PM IST
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कात्यायनी की पूजा-अर्चना कर मानी मनौती
- फोटो : अमर उजाला
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नौ दिवसीय नवदुर्गा महोत्सव में शुक्रवार को देवी के छठवें स्वरूप कात्यायनी की पूजा-अर्चना की गई। श्रद्धालुआें ने हवन में आहुतियां देकर मनौतियां मानी।
शहर के शीतला माता मंदिर पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। शुक्रवार को देवी के छठवें स्वरूप कात्यायनी की पूजा अर्चना की गई। पंडित गीतमदास ने वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया, भक्तों ने यज्ञ में आहुतियां दी गईं। उन्होंने बताया कि हवन-यज्ञ से वातावरण शुद्ध होता है। देवी-देवताओं का मुख अग्नि है। हवन के दौरान जिस देवी-देवता के नाम से आहुति दी जाती है वह उस देवी-देवता को प्राप्त होती है। जिससे देवी देवता प्रसन्न होकर मनवांछित फल देते हैं।
वहीं कुरावली के जीटीरोड स्थित प्राचीन मंदिर वनखंडेश्वर पर चल रहे दस दिवसीय नवरात्र महोत्सव में शुक्रवार को श्रद्धालुओं ने देवी के छठवें स्वरूप कात्यायनी देवी की पूजा-अर्चना कर हवन-यज्ञ किया।
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शहर के शीतला माता मंदिर पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। शुक्रवार को देवी के छठवें स्वरूप कात्यायनी की पूजा अर्चना की गई। पंडित गीतमदास ने वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया, भक्तों ने यज्ञ में आहुतियां दी गईं। उन्होंने बताया कि हवन-यज्ञ से वातावरण शुद्ध होता है। देवी-देवताओं का मुख अग्नि है। हवन के दौरान जिस देवी-देवता के नाम से आहुति दी जाती है वह उस देवी-देवता को प्राप्त होती है। जिससे देवी देवता प्रसन्न होकर मनवांछित फल देते हैं।
वहीं कुरावली के जीटीरोड स्थित प्राचीन मंदिर वनखंडेश्वर पर चल रहे दस दिवसीय नवरात्र महोत्सव में शुक्रवार को श्रद्धालुओं ने देवी के छठवें स्वरूप कात्यायनी देवी की पूजा-अर्चना कर हवन-यज्ञ किया।
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