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जिले में अटके विकास कार्य
भास्कर युगल
Updated Sun, 21 May 2017 11:22 PM IST
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ई-टेंडरिंग
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अब निकायों में सभी विकास कार्य ई-टेंडर से ही होंगे। डीएम ने आदेश जारी कर पुरानी प्रक्रिया से टेंडर जारी करने पर रोक लगा दी है। इसके बाद नगर पालिका और सभी आठ नगर पंचायतों में विकास कार्य रुक गए हैं। नया साफ्टवेयर आने के बाद ही विकास कार्य होंगे। डीएम यशवंत राव का कहना है कि विकास कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए ऐसा किया गया है।
अब तक नगर पालिका और नगर पंचायतों में सेटिंग से ठेकेदार मनमानी रेट पर टेंडर उठाते थे। कमीशन के खेल के चलते मानक की भी अनदेखी होती थी। इसी मनमानी पर रोक लगाने के लिए तीन दिन पहले डीएम ने ईओ की बैठक बुलाकर निकायों में विकास कार्य बिना ई-टेंडर के नहीं होन के निर्देश दिए। इससे ठेकेदारों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है। वहीं करोड़ों रुपये के विकास कार्य भी टेंडर न उठ पाने के चलते अटक गए हैं। बताया जाता है कि अकेले नगर पालिका में ही आठ करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की प्रक्रिया डीएम के निर्देश जारी होने पर रुक गई है। वहीं नगर पंचायतों में भी करोड़ों रुपये के विकास कार्यों के टेंडर जारी नहीं हो सके।
हालांकि इस दौरान सभी निकायों के चेयरमैन ने डीएम पर विभिन्न कारण बताते हुए दबाव बनाने की कोशिश की थी, लेकिन जिलाधिकारी ने किसी की एक नहीं सुनी।
तकनीकि कमी आ रही आडे़
ई टेंडर प्रक्रिया अच्छी है, लेकिन जिले के किसी भी निकाय पर ई टेंडरिंग के लिए जरूरी साफ्टवेयर नहीं है। इससे काफी मुश्किलें आ रही हैं। इस संबंध में डीएम यशवंत राव का कहना है कि लखनऊ से संबंधित साफ्टवेयर मंगाया जाएगा। लेकिन टेंडर अब ई टेंडरिंग से ही उठेंगे।
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यह विकास कार्य हैं प्रस्तावित
नगर पालिका और नगर पंचायत में करोड़ों रुपये के विकास कार्य प्रस्तावित हैं। इनमें बड़ी संख्या में सीसी सड़कें बनाना, पूर्व में बनी सड़कों की मरम्मत करना। नाले और नालियों का निर्माण, नालों के ऊपर कई पुलियों का निर्माण आदि शामिल हैं।
शीघ्र मंगाया जाएगा साफ्टवेयर
अधिशासी अधिकारी रामपाल ने बताया कि ई टेंडरिंग के लिए शीघ्र ही एनआईसी और नोडल एजेंसी के माध्यम से साफ्टवेयर मंगाया जाएगा। ताकि जल्द ठेके जारी कर विकास कार्य शुरू कराए जा सकें।
विकास कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए अब सभी टेंडर निकायों में ई टेंडर से उठाने के निर्देश जारी किए गए हैं। ताकि विकास कार्यों के टेंडर उठाने में कोई गड़बड़ी न हो। इसलिए सभी निकायों के ईओ को टेंडर की पुरानी प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोक देने के लिए कहा गया है।
यशवंत राव, जिलाधिकारी मैनपुरी
अब तक नगर पालिका और नगर पंचायतों में सेटिंग से ठेकेदार मनमानी रेट पर टेंडर उठाते थे। कमीशन के खेल के चलते मानक की भी अनदेखी होती थी। इसी मनमानी पर रोक लगाने के लिए तीन दिन पहले डीएम ने ईओ की बैठक बुलाकर निकायों में विकास कार्य बिना ई-टेंडर के नहीं होन के निर्देश दिए। इससे ठेकेदारों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है। वहीं करोड़ों रुपये के विकास कार्य भी टेंडर न उठ पाने के चलते अटक गए हैं। बताया जाता है कि अकेले नगर पालिका में ही आठ करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की प्रक्रिया डीएम के निर्देश जारी होने पर रुक गई है। वहीं नगर पंचायतों में भी करोड़ों रुपये के विकास कार्यों के टेंडर जारी नहीं हो सके।
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हालांकि इस दौरान सभी निकायों के चेयरमैन ने डीएम पर विभिन्न कारण बताते हुए दबाव बनाने की कोशिश की थी, लेकिन जिलाधिकारी ने किसी की एक नहीं सुनी।
तकनीकि कमी आ रही आडे़
ई टेंडर प्रक्रिया अच्छी है, लेकिन जिले के किसी भी निकाय पर ई टेंडरिंग के लिए जरूरी साफ्टवेयर नहीं है। इससे काफी मुश्किलें आ रही हैं। इस संबंध में डीएम यशवंत राव का कहना है कि लखनऊ से संबंधित साफ्टवेयर मंगाया जाएगा। लेकिन टेंडर अब ई टेंडरिंग से ही उठेंगे।
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यह विकास कार्य हैं प्रस्तावित
नगर पालिका और नगर पंचायत में करोड़ों रुपये के विकास कार्य प्रस्तावित हैं। इनमें बड़ी संख्या में सीसी सड़कें बनाना, पूर्व में बनी सड़कों की मरम्मत करना। नाले और नालियों का निर्माण, नालों के ऊपर कई पुलियों का निर्माण आदि शामिल हैं।
शीघ्र मंगाया जाएगा साफ्टवेयर
अधिशासी अधिकारी रामपाल ने बताया कि ई टेंडरिंग के लिए शीघ्र ही एनआईसी और नोडल एजेंसी के माध्यम से साफ्टवेयर मंगाया जाएगा। ताकि जल्द ठेके जारी कर विकास कार्य शुरू कराए जा सकें।
विकास कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए अब सभी टेंडर निकायों में ई टेंडर से उठाने के निर्देश जारी किए गए हैं। ताकि विकास कार्यों के टेंडर उठाने में कोई गड़बड़ी न हो। इसलिए सभी निकायों के ईओ को टेंडर की पुरानी प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोक देने के लिए कहा गया है।
यशवंत राव, जिलाधिकारी मैनपुरी