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नाले में तब्दील हुई ईशन नदी
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
Updated Sun, 29 May 2016 10:42 PM IST
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सिरसा नदी
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तीन दशक पूर्व तक ईशन नदी जिले में लबालब बहती थी। एक समय शहर की प्यास बुझाने वाले इस नदी का पानी इतना प्रदूषित हो चुका है कि लोग इससे अब सिंचाई तक नहीं करते हैं। शीत और ग्रीष्म ऋतु में अपने संचित जल से कृषि और पशुओं की प्यास मिटाने वाली ईशन अब गंदे नाले में तब्दील हो चुकी है। लगातार हो रहे अतिक्रमणों एवं सफाई न होने के चलते यह नदी वर्तमान में नाले में तब्दील हो चुकी है। यही नहीं यदि अच्छी बारिश हो जाए तो इसके पानी से आसपास के क्षेत्रों में जल प्लावन की स्थिति पैदा हो जाती है।
शहर के बुजुर्ग बताते हैं कि तीन दशक पूर्व तक जिले से होकर गुजरने वाली ईशन नदी लबालब बहती थी। यह नदी नगर और जिले के 50 से अधिक ग्रामों के किनारे से होती हुई बिल्लोर में गंगा में मिलती है। इससे जिले का बड़ा क्षेत्र सिंचित होता था। आसपास के गांवों और शहर के लिए तो यह जीवन धारा के समान थी।
अब दो दशक बाद ईशन नदी अपना वजूद खोती जा रही है। लगातार जमा हो रही सिल्ट और अतिक्रमण से अस्तित्व को ही खतरा पैदा कर दिया है। एक ओर शहर के गंदे नाले गिरने से नदी का पानी प्रदूषित हो गया है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में तो गर्मी में नदी में नाम मात्र का ही पानी रहता है। तीन दशक पूर्व तक आसपास के गांव की फसलों की सिंचाई और पशुआें के लिए पीने का पानी ईशन नदी ही उपलब्ध कराती थी। शहर भर का गंदा पानी लेकर दो नाले ईशन नदी में गिरते हैं। आश्रम रोड और दीवानी रोड से गिरने वाले गंदे नालों का पानी गिरने के कारण अब ईशन नदी का पानी सिंचाई के योग्य तक नहीं रह गया है।
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तीन दशक पूर्व तक नदी का पानी इतना स्वच्छ था कि लोग इससे स्नान करते थे। साथ ही पशुओं को भी पानी पिलाते थे। अब स्थिति यह है कि नदी में गर्मियों में नाम मात्र को पानी बचता है। पानी के नाम पर शहर की गंदगी ही देखने को मिलती है।
कमलाकांत , समाजसेवी
नदी का पानी अब इतना अधिक प्रदूषित हो गया है कि ग्रामीणों को अपने पशुओं को इसलिए बांधकर रखना पड़ता है। उन्हें डर है कि कहीं पशु छूटकर नदी का पानी न पी लें और बीमारी की चपेट में न आ जाएं।
मनोज चतुर्वेदी, दवा विक्रेता
दो दशक पूर्व तक नदी की हालत सही थी। इसके बाद से भूमाफिया और अधिकारियों का गठजोड़ नदी के अस्तित्व पर भारी पड़ने लगा। यही कारण है कि शहर में नदी के आसपास स्थित जमीन तो दूर नदी की जमीन तक पर लोगों ने भवन बनाकर खड़े कर दिए। तमाम प्रयासों के बाद भी उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।
सोम गुप्ता, व्यापारी
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शहर के बुजुर्ग बताते हैं कि तीन दशक पूर्व तक जिले से होकर गुजरने वाली ईशन नदी लबालब बहती थी। यह नदी नगर और जिले के 50 से अधिक ग्रामों के किनारे से होती हुई बिल्लोर में गंगा में मिलती है। इससे जिले का बड़ा क्षेत्र सिंचित होता था। आसपास के गांवों और शहर के लिए तो यह जीवन धारा के समान थी।
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अब दो दशक बाद ईशन नदी अपना वजूद खोती जा रही है। लगातार जमा हो रही सिल्ट और अतिक्रमण से अस्तित्व को ही खतरा पैदा कर दिया है। एक ओर शहर के गंदे नाले गिरने से नदी का पानी प्रदूषित हो गया है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में तो गर्मी में नदी में नाम मात्र का ही पानी रहता है। तीन दशक पूर्व तक आसपास के गांव की फसलों की सिंचाई और पशुआें के लिए पीने का पानी ईशन नदी ही उपलब्ध कराती थी। शहर भर का गंदा पानी लेकर दो नाले ईशन नदी में गिरते हैं। आश्रम रोड और दीवानी रोड से गिरने वाले गंदे नालों का पानी गिरने के कारण अब ईशन नदी का पानी सिंचाई के योग्य तक नहीं रह गया है।
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तीन दशक पूर्व तक नदी का पानी इतना स्वच्छ था कि लोग इससे स्नान करते थे। साथ ही पशुओं को भी पानी पिलाते थे। अब स्थिति यह है कि नदी में गर्मियों में नाम मात्र को पानी बचता है। पानी के नाम पर शहर की गंदगी ही देखने को मिलती है।
कमलाकांत , समाजसेवी
नदी का पानी अब इतना अधिक प्रदूषित हो गया है कि ग्रामीणों को अपने पशुओं को इसलिए बांधकर रखना पड़ता है। उन्हें डर है कि कहीं पशु छूटकर नदी का पानी न पी लें और बीमारी की चपेट में न आ जाएं।
मनोज चतुर्वेदी, दवा विक्रेता
दो दशक पूर्व तक नदी की हालत सही थी। इसके बाद से भूमाफिया और अधिकारियों का गठजोड़ नदी के अस्तित्व पर भारी पड़ने लगा। यही कारण है कि शहर में नदी के आसपास स्थित जमीन तो दूर नदी की जमीन तक पर लोगों ने भवन बनाकर खड़े कर दिए। तमाम प्रयासों के बाद भी उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।
सोम गुप्ता, व्यापारी