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मां नहीं बन सकते तो क्या, ममता तो इनमें भी हैै
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी
Updated Wed, 28 Dec 2016 11:47 PM IST
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मां नहीं बन सकते तो क्या, ममता तो इनमें भी हैै
- फोटो : अमर उजाला
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मां नहीं बन सकते तो क्या हुआ ममता तो है। यह कहना है शहर में चल रहे मंगलामुखी महा सम्मेलन में शामिल होने आए पंजाब के दो मंगलामुखियों का। दोनों तीन बेसहारा बच्चों की जिंदगी संवार रहे हैं। साथ आई एक बच्ची ने बताया कि उसे कभी भी मां-बाप की कमी महसूस नहीं होने दी। वह पढ़ लिखकर कुछ बनना चाहती है।
शादी समारोह में गाते बजाते नेग मांगते मंगलामुखियों को तो सभी ने देखा होगा लेकिन आम इंसान से अलग होने के बावजूद इनका परिवार और त्याग अनोखा होता है। भले ही मंगलामुखी मां नहीं बन सकते, मगर मां सा दिल इनके भी पास है। शहर में आयोजित मंगलामुखी महासम्मेलन में शामिल होने आए पंजाब के कपूरथला निवासी मधू का कहना है कि करीब 12 वर्ष पूर्व एक गरीब रिश्तेदार से एक प्यारी से बच्ची गोद ली थी। इस बच्ची को गोद में लेते ही तय कर लिया था कि इसका भविष्य संवारना है। रिदिका पूरे 12 साल की हो गई है। वह कपूरथला स्थित एक अच्छे विद्यालय में शिक्षा ग्रहण कर रही है। रिदिका का कहना है कि नानी मां उससे बहुत प्यार करते हैं खुद खाने से पहले उसको खाना खिलाना उनकी हर ख्वाहिश को पल भर में पूरा करते हैं। वह इतने दिनों के लिए आयोजन में आ रहीं थी वो उनसे दूर नहीं रह सकती इसलिए साथ चली आई। वहीं पंजाब के जालंधर निवासी मंगलामुखी पित्ती भी दो यतीम बच्चों का सहारा बनी हुई हैं। गोद लिया बेटा मनप्रीत बीए की पढ़ाई कर रहा है छोटी बेटी शब्बो 12वीं में शिक्षा ले रही है। वह साथ आने की जिद कर रहे थे मगर उन्होंने पढ़ाई का नुकसान होने की बात कहकर उन्हें रोक दिया। मधू और पित्ती की माने तो मां नहीं तो क्या ममता तो हम में भी है। हम किसी को निराश और दुखी नहीं देख सकते। बच्चों से बेहद प्यार करते हैं उनका भविष्य संवारना ही अब उनके जीवन का उद्देश्य है।
कई बच्चियों की शादी करा चुके हैं
पंजाब निवासी मंगलामुखी पित्ती और मधू ने बताया कि वह गरीब बच्चियों की शादी भी करा चुके हैं। उनके गोद लिए बच्चे किसी के मोहताज न रहें वह सर उठाकर चल सकें और समाज में एक ऊंचे ओहदे पर पहुंचे। यही उनकी दुआ और तमन्ना है। भगवान हमेशा यही दुआ करते हैं कि उन्हें मौका दे कि वह गरीबों की मदद कर सकें।
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शादी समारोह में गाते बजाते नेग मांगते मंगलामुखियों को तो सभी ने देखा होगा लेकिन आम इंसान से अलग होने के बावजूद इनका परिवार और त्याग अनोखा होता है। भले ही मंगलामुखी मां नहीं बन सकते, मगर मां सा दिल इनके भी पास है। शहर में आयोजित मंगलामुखी महासम्मेलन में शामिल होने आए पंजाब के कपूरथला निवासी मधू का कहना है कि करीब 12 वर्ष पूर्व एक गरीब रिश्तेदार से एक प्यारी से बच्ची गोद ली थी। इस बच्ची को गोद में लेते ही तय कर लिया था कि इसका भविष्य संवारना है। रिदिका पूरे 12 साल की हो गई है। वह कपूरथला स्थित एक अच्छे विद्यालय में शिक्षा ग्रहण कर रही है। रिदिका का कहना है कि नानी मां उससे बहुत प्यार करते हैं खुद खाने से पहले उसको खाना खिलाना उनकी हर ख्वाहिश को पल भर में पूरा करते हैं। वह इतने दिनों के लिए आयोजन में आ रहीं थी वो उनसे दूर नहीं रह सकती इसलिए साथ चली आई। वहीं पंजाब के जालंधर निवासी मंगलामुखी पित्ती भी दो यतीम बच्चों का सहारा बनी हुई हैं। गोद लिया बेटा मनप्रीत बीए की पढ़ाई कर रहा है छोटी बेटी शब्बो 12वीं में शिक्षा ले रही है। वह साथ आने की जिद कर रहे थे मगर उन्होंने पढ़ाई का नुकसान होने की बात कहकर उन्हें रोक दिया। मधू और पित्ती की माने तो मां नहीं तो क्या ममता तो हम में भी है। हम किसी को निराश और दुखी नहीं देख सकते। बच्चों से बेहद प्यार करते हैं उनका भविष्य संवारना ही अब उनके जीवन का उद्देश्य है।
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कई बच्चियों की शादी करा चुके हैं
पंजाब निवासी मंगलामुखी पित्ती और मधू ने बताया कि वह गरीब बच्चियों की शादी भी करा चुके हैं। उनके गोद लिए बच्चे किसी के मोहताज न रहें वह सर उठाकर चल सकें और समाज में एक ऊंचे ओहदे पर पहुंचे। यही उनकी दुआ और तमन्ना है। भगवान हमेशा यही दुआ करते हैं कि उन्हें मौका दे कि वह गरीबों की मदद कर सकें।
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